यूएन महासभा: मानवाधिकार परिषद से रूस के निलम्बन के पक्ष में मतदान

यूएन महासभा ने यूक्रेन मुद्दे पर आयोजित अपने एक आपात विशेष सत्र में, रूस को मानवाधिकार परिषद की सदस्यता से निलम्बित करने के पक्ष में मतदान किया (7 अप्रैल 2022).
UN Photo/Manuel Elias
यूएन महासभा ने यूक्रेन मुद्दे पर आयोजित अपने एक आपात विशेष सत्र में, रूस को मानवाधिकार परिषद की सदस्यता से निलम्बित करने के पक्ष में मतदान किया (7 अप्रैल 2022).

यूएन महासभा: मानवाधिकार परिषद से रूस के निलम्बन के पक्ष में मतदान

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 11वें 'आपात विशेष सत्र' (ESS) के दौरान गुरूवार को एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें यूएन मानवाधिकार परिषद में रूसी महासंघ की सदस्यता को निलम्बित किये जाने की मांग की गई है. 

यूएन महासभा के विशेष आपात सत्र के दौरान गुरूवार को ‘मानवाधिकार परिषद में रूसी महासंघ की सदस्यता के अधिकार के निलम्बन’ के विषय में एक प्रस्ताव पेश किया गया. 

193 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव को मतदान में हिस्सा लेने वाले सदस्य देशों का दो-तिहाई बहुमत प्राप्त हुआ.

इसके पक्ष में 93 वोट डाले गए,

रूस, चीन, क्यूबा, उत्तर कोरिया, ईरान, सीरिया, वियतनाम समेत 24 सदस्य देशों ने विरोध में मतदान किया.

भारत, ब्राज़ील, दक्षिण अफ़्रीका, मैक्सिको, मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, पाकिस्तान, मलेशिया, इण्डोनेशिया सहित 58 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.  

यह पहली बार नहीं है जब मानवाधिकार परिषद में किसी देश की सदस्यता को निलम्बित किया गया है.

इससे पहले, वर्ष 2011 में तत्कालीन शासक मुआम्मर ग़द्दाफ़ी के विरुद्ध हुए प्रदर्शनों पर दमनात्मक कार्रवाई के लिये लीबिया को निलम्बित किया गया था.

यूएन महासभा में मतदान के नतीजे.
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यूएन महासभा में मतदान के नतीजे.

24 फ़रवरी को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से, यूक्रेन के अनेक शहरों में भीषण लड़ाई में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है, लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, मानवीय संकट उत्पन्न हुआ है और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगे हैं. 

यूक्रेन के बूचा क़स्बे में कथित रूप से रूसी सैन्य बलों द्वारा मानवाधिकार हनन के मामलों के यूक्रेन में युद्ध के मुद्दे पर यूएन महासभा का विशेष आपात सत्र गुरूवार को फिर से शुरू हुआ.

अन्तरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों के अनुसार, बूचा में अनेक सप्ताहों की गम्भीर लड़ाई और फिर, रूसी सेनाओं की वापसी के बाद सड़कों और मैदानों में लोगों के शव पड़े देखे गए हैं.

मतदान से पहले, यूक्रेन के राजदूत सर्गेइ किस्लित्स्या ने सदस्य देशों से प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया.

“बूचा और दर्जन से अधिक अन्य यूक्रेनी शहरों और गाँवों, जहाँ हज़ारों शान्तिपूर्ण निवासी मार दिये गए, यातनाएँ दी गईं, बलात्कार व अगवा किया गया और रूसी सेना द्वारा लूटा गया, ये एक उदाहरण है कि किस तरह नाटकीय ढंग से रूसी महासंघ, मानवाधिकारों के विषय में अपनी आरम्भिक घोषणाओं से दूर चला गया है.” 

“यही वजह है कि यह मामला अनूठा है और आज की प्रतिक्रिया स्पष्ट व स्व-व्याख्यात्मक है.”

संयुक्त राष्ट्र के 11वें आपात विशेष सत्र के दौरान यूक्रेन के राजदूत सर्गेई किस्लत्स्या.
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संयुक्त राष्ट्र के 11वें आपात विशेष सत्र के दौरान यूक्रेन के राजदूत सर्गेई किस्लत्स्या.

संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थाई उप प्रतिनिधि गेनाडी कुज़मिन ने देशों से इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने, पश्चिमी देशों व उनके सहयोगियों द्वारा मौजूदा मानवाधिकार तंत्रों को तबाह करने की कोशिश बताया.

निलम्बन का आधार

जिनीवा स्थित 47 सदस्य देशों वाली संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य, यूएन महासभा के 193 सदस्य देशों से मिले बहुमत के आधार पर चुने जाते हैं, जिसके लिये प्रत्यक्ष और गुप्त मतदान होता है. 

रूस का परिषद में कार्यकाल जनवरी 2021 में शुरू हुआ जब महासभा ने 15 देशों को तीन-वर्षीय कार्यकाल के लिये चुना था.  

वर्ष 2006 में परिषद की स्थापना करने वाले प्रस्ताव के तहत, किसी सदस्य देश द्वारा व्यवस्थागत ढंग से मानवाधिकार हनन के मामलों को अंजाम दिये जाने की स्थिति में, संयुक्त राष्ट्र महासभा उसे निलम्बित कर सकती है.

रूस ने छोड़ी परिषद

प्रस्ताव के पारित होने के बाद, रूस के स्थाई उप प्रतिनिधि कुज़मिन ने कहा कि रूस ने अपने कार्यकाल की अवधि पूरी होने से पहले ही मानवाधिकार परिषद छोड़ने का निर्णय ले लिया था.

उन्होंने कहा कि परिषद में ऐसे सदस्य देशों के समूह का एकाधिकार है, जोकि इसे अपने अल्पकालिक फ़ायदों के लिये इस्तेमाल कर रहे हैं. 
“ये देश अनेक वर्षों से खुले तौर पर मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन और उन्हें उकसाने में सीधे रूप से शामिल रहे हैं.”

संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थाई मिशन के उप प्रतिनिधि गेनाडी कुज़मिन.
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संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थाई मिशन के उप प्रतिनिधि गेनाडी कुज़मिन.

उन्होंने कहा कि परिषद की सदस्यता होने के बावजूद, वे अपने अल्पकालिक राजनैतिक व आर्थिक हितों को वास्तविक सहयोग एवं कुछ देशों में मानवाधिकारों की स्थिति को स्थिर बनाने के पक्ष में नहीं हैं.

'ख़तरनाक मिसाल'

इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने वाले चीन के राजदूत झांग जुन ने कहा कि महासभा में जल्दबाज़ी में उठाया गया ऐसा कोई भी क़दम, आग में घी डालने जैसा होगा.

उन्होंने कहा कि इससे दरारें गहराएंगी, हिंसक संघर्ष गहन होगा और शान्ति प्रयासों को धक्का पहुँचेगा.

“मानवाधिकार परिषद की सदस्यता के साथ इस तरह के बर्ताव से एक ख़तरनाक मिसाल बनेगी, मानवाधिकारों के विषय में टकराव और भी ज़्यादा गहन होगा, जिसका यूएन प्रशासन प्रणाली पर बड़ा असर होगा, और गम्भीर दुष्परिणाम होंगे.”

योरोपीय संघ

योरोपीय संघ ने कहा है कि यूक्रेन में रूस द्वारा मानवाधिकार हनन और क्षेत्रीय अखण्डता व सम्प्रभुता के हनन का स्तर व गम्भीरता के मद्देनज़र, एक मज़बूत, एकजुट अन्तरराष्ट्रीय क़दम की आवश्यकता है. 

योरोपीय प्रतिनिधिमण्डल के प्रमुख राजदूत ओलाफ़ स्कूग ने बताया कि असेम्बली का यह दुर्लभ निर्णय जवाबदेही का एक मज़बूत सन्देश भेजता है, और उम्मीद है कि इससे मानवाधिकारों के अन्य उल्लंघनों की रोकथाम में मदद मिलेगी.