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यमन: युद्धविराम समझौता, 'विनाशकारी युद्ध के अन्त की दिशा में पहला क़दम' 

यमन की अल-धलेए गर्वनरेट में एक घरेलू विस्थापित परिवार.
© UNOCHA/Mahmoud Fadel-YPN
यमन की अल-धलेए गर्वनरेट में एक घरेलू विस्थापित परिवार.

यमन: युद्धविराम समझौता, 'विनाशकारी युद्ध के अन्त की दिशा में पहला क़दम' 

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यमन में दो महीने की अवधि के लिये, यमन सरकार, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और हूथी लड़ाकों के बीच युद्धविराम समझौते की घोषणा का स्वागत किया है. यूएन प्रमुख ने भरोसा जताया है कि समझौते का सफलतापूर्वक लागू होना, वर्षों से जारी युद्ध पर विराम लगाने की दिशा में पहला क़दम होगा.   

महासचिव गुटेरेश ने समझौते पर पहुँचने के लिये दोनो पक्षों की सराहना की, जोकि स्थानीय समयानुसार शनिवार को सात बजे शुरू होगा. 

रमदान के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही इसे लागू किया जाएगा. 

सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा समर्थित यमन सरकार और हूथी लड़ाकों में वर्ष 2015 से युद्ध जारी है.

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यूएन प्रमुख ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा, “आज यमन की जनता के लिये एक बेहतर भविष्य की शुरुआत होनी चाहिए.” 

उन्होंने सभी पक्षों से आवश्यक प्रबन्ध करने का आग्रह किया है ताकि संघर्षविराम को सफलतापूर्व लागू करने के प्रयासों के लिये समर्थन प्रदान किया जा सके, और सहयोग तंत्रों को बिना देरी के सक्रिय बनाया जा सके.

यमन के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैन्स ग्रुण्डबर्ग ने इससे पहले, शुक्रवार को इस आशय की घोषणा की है.

उन्होंने अपना एक वक्तव्य जारी करके सभी पक्षों से समझौते का पूर्ण रूप से निर्वहन और उसका सम्मान किये जाने का आग्रह किया है. 

साथ ही, उसे तत्काल लागू करने के लिये सभी आवश्यक क़दम उठाने की अपील की गई है. 
यूएन के विशेष दूत ने कहा कि, “यह युद्धविराम समझौता एक पहला और बहुप्रतीक्षित क़दम है.”

“सभी यमनी महिलाएँ, पुरुष और बच्चे, जिन्होंने सात वर्ष से अधिक के युद्ध में भीषण कष्ट झेला है, वे इस युद्ध के अन्त से कम कुछ भी अपेक्षा नहीं रखते हैं.”

उन्होंने सचेत किया कि युद्धरत पक्षों को इससे कम पर ठहरना भी नहीं चाहिए.

युद्धविराम समझौता

युद्धविराम समझौते के तहत, युद्धरत पक्षों ने यमन और उसकी सीमाओं के इर्दगिर्द सभी सैन्य अभियानों व हमलों पर विराम लगाने के लिये रज़ामन्दी दे दी है.

इसके अलावा, हुदायदाह क्षेत्र के बन्दरगाहों में ईंधन लदे जहाज़ों को प्रवेश दिये जाने की अनुमति दी गई है, राजधानी सना से, पहले से तय गंतव्यों के लिये वाणिज्यिक विमानों को उडान भरने की अनुमति दी जाएगी.

समझौते के अन्तर्गत युद्धरत पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत के तत्वाधान में मुलाक़ात करने पर भी सहमति जताई है, ताकि ताइज़ और अन्य गवर्नरेट में सड़कों को खोला जा सके.

नवीनीकरण की सम्भावना

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बताया कि युद्धविराम समझौते की अवधि को आगे बढ़ाये जाने की सम्भावना है, और इससे देश की तात्कालिक मानवीय व आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने का दरवाज़ा खुलता है.

उन्होंने कहा कि इसके ज़रिये राजनैतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का एक वास्तविक असर भी उत्पन्न हुआ है.

महासचिव के मुताबिक़, लड़ाई रुकने, ईंधन लदे जहाज़ों का प्रवेश होने, और देश के भीतर व बाहर व्यक्तियों व सामानों की आवाजाही पर पाबन्दी हटने से भरोसा पैदा करने में मदद मिलेगी.

इससे हिंसक संघर्ष के शान्तिपूर्ण निपटारे के लिये वार्ताओं की शुरुआत करने का सहायक माहौल उत्पन्न होगा. 

यमन के मारिब शहर के पास विस्थापितों के लिये बनाए गए एक शिविर में कुछ बच्चियाँ.
© WFP/Annabel Symington
यमन के मारिब शहर के पास विस्थापितों के लिये बनाए गए एक शिविर में कुछ बच्चियाँ.

विशेष दूत ग्रुण्डबर्ग ने कहा कि उनकी योजना, अगले दो महीनों के दौरान युद्धरत पक्षों के साथ, स्थाई युद्धविराम पर पहुँचने के लिये गहन प्रयासों को आगे बढ़ाने की है.

इसके समानान्तर, आर्थिक व मानवीय राहत उपायों को लागू करने और राजनैतिक प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाने पर बल दिया जाएगा.

मानवीय संकट

युद्ध के दंश से पीड़ित यमन में मानवीय राहत प्रयासों को मज़बूती प्रदान करने के इरादे से 16 मार्च को आयोजित एक उच्चस्तरीय संकल्प सम्मेलन में चार अरब 27 करोड़ डॉलर की सहायता धनराशि की पुकार लगाई गई थी.

हर तीन में से दो यमनी नागरिक – दो करोड़ पुरुष, महिलाएँ और बच्चे – अत्यधिक निर्धनता में रहने के लिये मजबूर हैं.

लाखों घरेलू विस्थापितों के लिये, जीवन एक दैनिक संघर्ष है जबकि अर्थव्यवस्था निराशा की नई गहराइयों को छू रही है.

लाखों की संख्या में लोग चरम स्तर पर भूख की मार झेल रहे हैं, और विश्व खाद्य कार्यक्रम को सहायता धनराशि के अभाव में अपने राशन में पचास फ़ीसदी की कटौती करनी पड़ी है.

यूएन प्रमुख ने अनेक मर्तबा ज़ोर देकर कहा है कि यमन संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और सभी पक्षों को शान्ति का मार्ग चुनने का अधिकार है.