वैश्विक जल संकट पर पार पाने के लिये, भूजल की अहमियत पर बल

चीन के दक्षिणी पर्वतीय इलाक़े में धान की सीढ़ीदार खेती.
© FAO/ Zhongshan Luo
चीन के दक्षिणी पर्वतीय इलाक़े में धान की सीढ़ीदार खेती.

वैश्विक जल संकट पर पार पाने के लिये, भूजल की अहमियत पर बल

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की एक नई रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि एक अति महत्वपूर्ण संसाधन होने के बावजूद, भूजल (groundwater) अनदेखी, कुप्रबन्धन व अत्यधिक दोहन का शिकार है.

मंगलवार, 22 मार्च, को ‘विश्व जल दिवस’ से ठीक पहले, यूनेस्को द्वारा जारी रिपोर्ट बताती है कि पृथ्वी पर ताज़ा पानी के सभी बहते स्रोतों में भूजल का हिस्सा 99 फ़ीसदी है.

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने यूएन विश्व जल विकास रिपोर्ट के नवीनतम संस्करण, Making the invisible visible, की प्रस्तावना में कहा, “भूजल एक बेहद अहम प्राकृतिक संसाधन है, अदृश्य, मगर हमारे ग्रह पर जीवन के लिये अपरिहार्य है.” 

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रिपोर्ट के मुताबिक़, विश्व की क़रीब 50 फ़ीसदी शहरी आबादी भूमिगत जल संसाधनों पर निर्भर है. 

धरातल की सतह के नीचे एकत्र और चट्टानों में से प्रवाहित जल (aquifers) प्रदूषित हो रहा है, इन स्रोतों का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है और ये सूख रहे हैं, जिसके गम्भीर नतीजे हो सकते हैं. 

जल संरक्षण 

सेनेगल के डाकार में, नौंवे विश्व जल मंच के उदघाटन समारोह के दौरान, विशेषज्ञों ने भूजल में निहित असीम सम्भावनाओं और उसके सतत प्रबन्धन की अहमियत को रेखांकित किया.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विश्व भर में मौजूदा और भावी जल संकटों से निपटने के लिये देशों को और अधिक उपाय करने होंगे.

पेयजल व घरेलू इस्तेमाल के लिये जल मुहैया कराये जाने के साथ-साथ, फ़सलों की सिंचाई के लिये भी 25 प्रतिशत जल ज़रूरी है.

बताया गया है कि अगले 30 वर्षों के लिये जल का इस्तेमाल, प्रति वर्ष क़रीब एक फ़ीसदी बढ़ने की सम्भावना है. 

वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी की पृष्ठभूमि में, भूजल पर निर्भरता भी बढ़ने की सम्भावना व्यक्त की गई है. 

रिपोर्ट के अनुसार, भूजल का अधिक टिकाऊ इस्तेमाल, निरन्तर बढ़ती वैश्विक आबादी की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने और जलवायु व ऊर्जा संकटों से निपटने के लिये अहम है.

विशाल लाभ

रिपोर्ट बताती है कि भूजल की गुणवत्ता इसे सुरक्षित व पहुँच के भीतर बनाती है, और इसके लिये बहुत अधिक शोधन की भी आवश्यकता नहीं है.

इसके अलावा, ग्रामीण इलाक़ों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का यह अक्सर सबसे किफ़ायती उपाय होता है और आर्थिक प्रगति में भी सहायक हो सकता है.

उदाहरणस्वरूप, सिंचाई वाले इलाक़ो का आकार बढ़ाकर उत्पादन व फ़सलों की विविधता को भी बढ़ाया जा सकता है. 

जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के विषय में, जलभरा प्रणाली का उपयोग, पूरे साल ताज़ा पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाने में किया जा सकता है, चूँकि जलाशयों की तुलना में उनका वाष्पीकरण काफ़ी हद तक कम होता है. 

जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल प्रणालियों पर होने वाले प्रत्यक्ष व परोक्ष प्रभाव.
UNESCO
जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल प्रणालियों पर होने वाले प्रत्यक्ष व परोक्ष प्रभाव.

सम्भावनाओं को साकार करना

आँकड़ों को एकत्र करने से लेकर पर्यावरणीय नियामकों को मज़बूती प्रदान करने और मानवीय व वित्तीय संसाधनों को प्रभावी ढँग से अमल में लाने तक, रिपोर्ट में भूजल की सम्भावनाओं का लाभ उठाने के लिये ठोस अनुशन्साएँ भी पेश की गई हैं. 

रिपोर्ट के अनुसार, धरातल के नीचे एकत्र व प्रवाहित जल पर डेटा व सूचना को एकत्र किया जाना राष्ट्रीय और स्थानीय भूजल एजेंसियों की ज़िम्मेदार है, और निजी सैक्टर भी इसमें योगदान दे सकता है.

कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत, निजी कम्पनियों से इस सम्बन्ध में डेटा व जानकारी को सार्वजनिक सैक्टर के पेशेवरों के साथ साझा किये जाने पर ज़ोर दिया है. 

विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल को प्रदूषण से मुक्त करना सरल नहीं है, इसलिये इसकी रोकथाम के लिये हरसम्भव प्रयास किये जाने चाहिए. 

UN Water की वार्षिक रिपोर्ट में हर साल एक नए विषय पर ध्यान केंद्रित किया जाता है और इसका प्रकाशन, यूनेस्को द्वारा UN Water की ओर से किया जाता है.