यूक्रेन: जैविक हथियार प्रयोगशाला के कोई संकेत नहीं, निरस्त्रीकरण मामलों की प्रमुख

यूक्रेन के चेरनॉबिल में क्षतिग्रस्त यूनिट 4 रिएक्टर.
© IAEA/Dana Sacchetti
यूक्रेन के चेरनॉबिल में क्षतिग्रस्त यूनिट 4 रिएक्टर.

यूक्रेन: जैविक हथियार प्रयोगशाला के कोई संकेत नहीं, निरस्त्रीकरण मामलों की प्रमुख

शांति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण मामलों की प्रमुख ने कहा है कि यूक्रेन में जैविक हथियार कार्यक्रम के संचालन के सम्बन्ध में यूएन को कोई जानकारी नहीं है. रूसी महासंघ ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान फिर से ऐसे आरोप लगाते हुए दावा किया कि ऐसे कार्यक्रम के दस्तावेज़ मौजूद हैं. 

निरस्त्रीकरण मामलों के लिये उच्च प्रतिनिधि इज़ूमी नाकामित्सु ने रूस द्वारा बुलाई गई आपात बैठक के दौरान, सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों को इस सिलसिले में जानकारी दी. 

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सुरक्षा परिषद ने इससे पहले यूक्रेन में कथित जैविक सामग्री के मुद्दे पर 11 मार्च को चर्चा की थी. 

यूक्रेन के शहरों पर रूसी बमबारी जारी है, जिसमें बड़े पैमाने पर लोग हताहत व विस्थापित हुए हैं.

रूसी राजदूत वैसीली नेबनेज़िया ने परिषद को बताया कि उनके प्रतिनिधिमण्डल को नए तथ्य मिले हैं, जोकि अमेरिका और यूक्रेन के बीच, जैविक हथियारों पर शोध के लिये समझौते को दर्शाते हैं. 

उनका कहना है कि वर्ष 2005 तक के दस्तावेज़ उपलब्ध हैं. 

उन्होंने सुरक्षा परिषद में उस समझौते के तथ्य को साझा करते हुए कहा कि इसमें अमेरिका की ओर से, यूक्रेन के लिये सीधे तौर पर तीन करोड़ 20 लाख डॉलर की धनराशि दिया जाना भी शामिल है.

अमेरिका ने यूक्रन में किसी भी प्रकार की जैविक प्रयोगशाला के संचालन से इनकार किया है, मगर रूसी राजदूत ने कहा कि तथ्य कुछ और ही दर्शाते हैं.

उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन सरकार ने अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मुफ़्त यात्राओं के बदले, अमेरिका को ख़तरनाक प्रयोग करने की अनुमति प्रदान की थी.

रूसी प्रतिनिधि का कहना है कि आज के तथ्यों के अनुसार, क्राइमियाई-कॉंगो बुख़ार, लेपटॉसपाइरोसिस और अन्य प्रकार के ख़तरनाक वायरस का अध्ययन किया गया.

'अजीब दावे'

अमेरिका की राजदूत लिण्डा थॉमस-ग्रीनफ़ील्ड ने इन आरोपों के जवाब में ध्यान दिलाया कि जैविक हथियारों के मुद्दे पर, एक सप्ताह पहले हुई बैठक के दौरान भी सुरक्षा परिषद में भी ऐसे अजीब दावे किये गए थे. 

“ऐसी कोई लैब नहीं है, रूसी सीमा के नज़दीक नहीं, कहीं भी नहीं.”

इसके बजाय, यूक्रेन अनेक सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों की मेज़बानी करता है, जिसके लिये अमेरिका, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य देशों की सरकारों व अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से समर्थन प्राप्त है. 

अमेरिकी राजदूत ने गम्भीर चिन्ता जताई कि शुक्रवार की बैठक एक झूठ को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है.

साथ ही आगाह भी किया कि मॉस्को के, यूक्रेनी नागरिकों के विरुद्ध रासायनिक या जैविक हथियार का इस्तेमाल करने की योजना पर काम करने की आशंका है.

लिण्डा थॉमस-ग्रीनफ़ील्ड ने कहा कि नए आरोपों को हताशा का एक संकेत क़रार देते हुए कहा है कि, “यह बैठक, परिषद और विश्व मंच पर रूस के अलग-थलग पड़ जाने का नतीजा है.”

जैविक हथियार सन्धि

संयुक्त राष्ट्र की उच्च प्रतिनिधि नाकामित्सु ने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पास ऐसे दावों की जाँच पड़ताल के लिये ना तो शासनादेश (mandate) है और ना ही क्षमता है. 

ये मुद्दा वर्ष 1972 की जैविक हथियार सन्धि के तहत आता है, जिसमें जैविक हथियारों के विकास, उत्पादन, ख़रीद, हस्तान्तरण, भण्डारण और इस्तेमाल पर पाबन्दी लगाई गई है.

रूसी महासंघ और यूक्रेन, दोनों ही इस सन्धि का हिस्सा हैं.

इस पृष्ठभूमि में उन्होंने अनेक ऐसे क़दमों का उल्लेख किया, जिनके ज़रिये सन्धि के तहत, देशों के बीच विवादों का निपटारा किया जा सकता है. 

उन्होंने कहा कि इन उपायों में सलाहकारी बैठक भी है, और इन सभी प्रक्रियाओं के लिये संयुक्त राष्ट्र का निरस्त्रीकरण कार्यालय समर्थन के लिये तैयार है.

परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा

इज़ूमी नाकामित्सु ने यूक्रेन के परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के मुद्दे पर बताया कि झैपरोज़िया प्लांट पर सभी सुरक्षा प्रणाली 17 मार्च तक पूर्ण रूप से काम कर रही हैं. 

इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने यूक्रेन सरकार के हवाले से यह जानकारी दी है.

उन्होंने बताया कि चेरनॉबिल परमाणु संयंत्र, 14 मार्च को फिर से कनेक्ट किये जाने के बाद, राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड से जुड़ा हुआ है.

मगर, यूक्रेनी संचालकों और सुरक्षाकर्मियों की पिछले तीन सप्ताह से अदलाबदली नहीं हो पाई है, जोकि चिन्ताजनक है. 

साथ ही, यूएन परमाणु ऊर्जा एजेंसी के लिये, चेरनॉबिल में स्थापित निगरानी प्रणालियों से डेटा ट्रांसमिशन नहीं हो पा रहा है.