वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

यमन में युद्ध बना 'स्थाई आपदा', करोड़ों लोगों को मदद की दरकार

यमन के ताइज़ इलाक़े में, तीन बहनें अपने स्कूल की तरफ़ जाते हुए (फ़रवरी 2021).
© UNICEF/Ahmed Al-Basha
यमन के ताइज़ इलाक़े में, तीन बहनें अपने स्कूल की तरफ़ जाते हुए (फ़रवरी 2021).

यमन में युद्ध बना 'स्थाई आपदा', करोड़ों लोगों को मदद की दरकार

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के राहत मामलों के प्रमुख मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि यमन, युद्ध के सात साल से अधिक समय के बाद, आपातकाल की एक लगातार जारी स्थिति में रह रहा है, जिसमें भूख, बीमारी और अन्य तकलीफ़ें जारी हैं और जो सहायता एजेंसियों के प्रयासों की रफ़्तार की तुलना में कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहे हैं. यमन के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने भी हिंसा के उलझे हुए चक्र को तोड़ने के लिये, यमन के लोगों और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों का आहवान किया है.

आपातकालीन राहत समन्वयक मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने यमन में गम्भीर परिस्थितियों को कम करने में जड़ता और थकान के लिये गम्भीर जोखिमों का हवाला दिया, क्योंकि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से नए झटके और अन्तरराष्ट्रीय आक्रोश भड़के हैं.

Tweet URL

उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें उन ताक़तों के आगे नहीं झुकना चाहिये." 

उन्होंने यमन के लोगों की पीड़ा को कम करने के लिये, बुधवार को आयोजित होने वाले एक उच्च स्तरीय सहायता अपील कार्यक्रम की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिसमें सहायता एजेंसियों ने केवल वर्ष 2022 के दौरान लगभग एक करोड़ 70 लाख लोगों की मदद करने के लिये, लगभग 4 अरब 30 करोड़ डॉलर धनराशि की मांग की है.

नए राष्ट्रव्यापी आकलन के अनुसार, इस समय देश में लगभग दो करोड़ 34 लाख लोगों को सहायता की आवश्यकता है, यानि हर चार लोगों में से लगभग तीन लोगों को. 

उनमें से एक करोड़ 90 लाख ऐसे लोग भी हैं जो आने वाले महीनों में भूखे पेट रहने को मजबूर होंगे. इस संख्या में वर्ष 2021 की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि होगी - जबकि उनमें से लगभग एक करोड़ 60 हज़ार लोग अकाल जैसी स्थितियों का सामना करेंगे.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि यमन अपनी 90 प्रतिशत भोजन खपत और ईंधन की लगभग 100 प्रतिशत ज़रूरत के लिये वाणिज्यिक आयात पर निर्भर करता है, और देश की ज़रूरत का एक तिहाई गेहूँ रूस और यूक्रेन से आता है, जहाँ 24 फरवरी को छिड़े संघर्ष के कारण, खाद्य क़ीमतें बढ़ सकती हैं जो पिछले साल पहले ही बढ़कर दोगुनी हो चुकी हैं.

'भूखों से खाना लेकर तड़पने वालों को खाना खिलाना'

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली सहायता राशि की अपील के सन्दर्भ में ज़ोर देकर कहा, "अगर हम अभी क़दम नहीं उठाते हैं तो हम एक भूकम्पीय भूख संकट की तरफ़ देख रहे हैं."

एक ताज़ा आकलन के अनुसार, तत्काल धन उपलब्ध कराए बिना, भूखे लोगों से मदद ठीक उसी समय छिन जाएगा, जब उन्हें सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता. इस वर्गीकरण के अनुसार, नई धन प्राप्ति के बिना, वर्ष की दूसरी छमाही में भोजन की आवश्यकता वाले लोगों की संख्या एक करोड़ 90 लाख तक पहुँचने का अनुमान है.

उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा, "यमन के लिये वित्त आवश्यकता इस बिन्दु तक कभी नहीं पहुँची है, हमारे पास भुखमरी से मृत्यु के कगार पर पहुँचे लोगों लोगों को खाना खिलाने के लिये, ख़ाली पेट तड़पने वाले लोगों का निवाला छीनने के अलावा अलावा कोई चारा नहीं है."

धन की कमी के कारण कटौतियाँ

डेविड बीज़ली ने कहा कि विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को धन की कमी के कारण वर्ष 2022 की शुरुआत में 80 लाख लोगों के लिये खाद्य सामग्री कम करने के लिये मजबूर होना पड़ा. फ़िलहाल, 50 लाख लोगों को पूर्ण भोजन राशन मुहैया कराना जारी रखा गया है जो अकाल के मुहाने पर हैं. 

यूएन खाद्य सहायता एजेंसी के पास ज़रूरत के हिसाब से केवल 11 प्रतिशत धन उपलब्ध है जबकि आने वाले छह महीनों के दौरान, लगभग एक करोड़ 30 लाख लोगों को खाद्य सहायता प्रदान करने के लिये, 88 करोड़ 79 लाख डॉलर से अधिक धनराशि की आवश्यकता है.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की अपीलों द्वारा एकत्र की गई 14 अरब डॉलर धनराशि का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा, केवल छह दानदाताओं से मिला है जिनके नाम हैं - संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी और योरोपीय आयोग. इस योगदान की बदौलत, यमन में एक बड़े अकाल को टालने में मदद मिली है जोकि एक बहुत बड़ी कामयाबी है.

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स का कहना था कि अगर उनका पास दुनिया के लिये कोई एक सन्देश है, तो वह यह है: अभी सहायता हाथ ना रोकें. सदस्य देशों को यह दिखाना होगा कि "सुर्ख़ियों से बाहर निकलने का मतलब पीछे छूटना नहीं है".

तोपख़ाने की गोलाबारी, हवाई हमले जारी

यमन की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की बैठक को ताज़ा जानकारी से अवगत कराते हुए हैन्स ग्रण्डबर्ग.
© UN Photo/Eskinder Debebe
यमन की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की बैठक को ताज़ा जानकारी से अवगत कराते हुए हैन्स ग्रण्डबर्ग.

यमन के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैन्स ग्रण्डबर्ग ने हिंसा का विवरण देते हुए कहा कि पिछले महीने, ताइज़ में तोपख़ाने की गोलाबारी में फिर से बहुत से आम लोग हताहत हुए हैं और आवासीय भवनों को नुक़सान पहुँचा है, जबकि सादाहा और अल डाली प्रशासनिक क्षेत्रों में लड़ाई होने की सूचना मिली है.

उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से मारिब और हज्जाह में अग्रिम मोर्चे पर हवाई हमले जारी हैं. इस बीच हुदायदाह समझौते का समर्थन करने के लिये संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMHA), पार्टियों के बीच सम्पर्क बहाल करने, तनाव कम करने के रास्ते तनाव कम करने और बन्दरगाहों की निगरानी बढ़ाने के लिये सक्रियता के साथ काम कर रहा है.

उन्होंने कहा कि लड़ाई में उतार-चढ़ाव को देखते हुए भी यह सच्चाई ही है कि किसी सैन्य विकल्प से, इस संकट का कोई स्थाई समाधान नहीं निकलने वाला है. 

राजनैतिक प्रगति की झलक

विशेष दूत ने कहा कि वह तनाव कम करने के उपायों के लिये, तत्काल विभिन्न पक्षों के साथ विकल्प तलाश रहे हैं जो हिंसा को कम कर सकते हैं, ईंधन संकट को कम कर सकते हैं और आवागमन की स्वतंत्रता में सुधार कर सकते हैं.

उन्होंने यमन के राजनैतिक दलों, घटकों, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से जुड़ाव द्वारा प्रोत्साहित, फ़रवरी में शुरू की गई परामर्श श्रृंखला पर भी ताज़ा जानकारी उपलब्ध कराई, और यमन के राष्ट्रपति मन्सूर हादी के साथ उनकी हालिया चर्चा को "बहुत रचनात्मक" बताया.