म्याँमार: आन्तरिक विस्थापितों की संख्या दो गुनी बढ़कर हुई आठ लाख

11 फ़रवरी 2022

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी – UNHCR ने शुक्रवार को बताया कि म्याँमार में, फ़रवरी 2021 में सैन्य तख़्तापलट होने के बाद से, देश के भीतर ही विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या लगभग दो गुनी होकर आठ लाख तक पहुँच गई है.

यूएन शरणार्थी एजेंसी के प्रवक्ता मैथ्यू साल्टमार्श ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि एजेंसी, संघर्ष गहराने के बीच ही, विस्थापित लोगों के लिये सहायता में बढ़ोत्तरी कर रही है.

प्रवक्ता ने कहा, “लड़ाई और सशस्त्र संघर्ष गहराने के साथ ही, पूरे देश में सुरक्षा स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है क्योंकि उसके थमने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे हैं.”

फ़रवरी 2021 के बाद से, कुल लगभग चार लाख 40 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं, जब सेना ने क्रूर तख़्तापलट किया था, जिसमें लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी हुई सरकार को बेदख़ल कर दिया गया था.
उससे पहले भी, लगभग तीन लाख 70 हज़ार लोग, देश के भीतर ही विस्थापित थे.

एजेंसी का मानना है कि विस्थापन का ये सिलसिला और बढ़ेगा, क्योंकि आने वाले सप्ताहों और महीनों में और ज़्यादा लोग देश के भीतर ही विस्थापित होंगे.

सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र

म्याँमार में, देश के भीतर ही विस्थापित हुए लोगों के लिये बनाए गए एक शिविर में, कुछ लड़कियाँ पानी भरते हुए.
UNOCHA/Z. Nurmukhambetova
म्याँमार में, देश के भीतर ही विस्थापित हुए लोगों के लिये बनाए गए एक शिविर में, कुछ लड़कियाँ पानी भरते हुए.

चार लाख, 40 हज़ार विस्थापितों में से लगभग आधी संख्या, देश के दक्षिण पूर्वी हिस्से में स्थित कायीन, कायाह, मॉन और शान (दक्षिण) प्रान्तों और बागो (पूर्वी) व तानिन्थारयी क्षेत्रों में है.

कायीन और कायाह प्रान्त, सर्वाधिक प्रभावित हैं क्योंकि विभिन्न सशस्त्र गुटों के दरम्यान लड़ाई ने लोगों को, बड़े पैमाने पर विस्थापन के लिये मजबूर किया है.

संघर्ष प्रभावित एक अन्य इलाक़ा पश्चिमोत्तर में है जहाँ मानवीय सहायता की तत्काल ज़रूरत है. वहाँ चिन प्रान्त, मैगवाय क्षेत्र और सागैंग क्षेत्र में, लगभग एक लाख 90 हज़ार लोग विस्थापित हैं.

एजेंसी के प्रवक्ता के अनुसार, असुरक्षा, सड़क मार्गों के बन्द होने और पहुँच के लिये अनुमति हासिल करने में चुनौतियों के कारण, बहुत से हिस्सों में मानवीय सहायता पहुँचाने में मुश्किलें पैदा हो रही हैं.

प्रवक्ता ने बताया कि परिणामस्वरूप, मेज़बान समुदाय और स्थानीय कार्यकर्ता, सहायता में अहम योगदान करते हुए, एक दूसरे के साथ एकजुटता व्यक्त कर रहे हैं और उनके पास जो कुछ भी सामान उपलब्ध है, वो दान कर रहे हैं.

मानवीय स्थिति

म्याँमार के राखीन प्रांत में आन्तरिक विस्थापन का शिकार एक मुस्लिम परिवार के बच्चे खेलते हुए (जनवरी 2019)
© UNICEF/Nyan Zay Htet
म्याँमार के राखीन प्रांत में आन्तरिक विस्थापन का शिकार एक मुस्लिम परिवार के बच्चे खेलते हुए (जनवरी 2019)

यूएन शरणार्थी एजेंसी, प्रभावित लोगों की मदद करने के लिये, अन्य यूएन एजेंसियों और स्थानीय साझीदारों व समुदायों के साथ मिलकर काम कर रही है. 

एजेंसी ने वर्ष 2021 के दौरान, नौ प्रान्तों और क्षेत्रों में लगभग एक लाख 70 हज़ार लोगों तक मदद पहुँचाई थी.

देश में मानवीय स्थिति बेहद ख़तरनाक बनी हुई है और रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम आसमान छू रहे हैं, रोज़गार व आमदनियाँ ख़त्म हो रहे हैं, बुनियादी सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न हो रहे हैं और असुरक्षा के हालात लम्बे खिंच रहे हैं.

इन हालात के कारण ही, देश के भीतर विस्थापित ज़्यादातर लोग, जीवित रहने के लिये, मानवीय सहायता पर निर्भर हैं.

राख़ीन प्रान्त में लगभग छह लाख, राष्ट्रीयता विहीन रोहिंज्या लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत है जिनमें से लगभग एक लाख 48 हज़ार लोग, विस्थापितों के लिये बनाए हुए शिविरों, गाँवों और विस्थापन स्थलों में रह रहे हैं.

यूएन शरणार्थी एजेंसी ने नाज़ुक हालात वाले समुदायों की मदद के लिये, वर्ष 2022 के लिये, पाँच करोड़ 67 लाख डॉलर की सहायता रक़म की अपील की है.

 

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