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कोविड-19: महामारी पर क़ाबू पाने के रास्ते पर अफ़्रीका, सतर्कता पर बल

कोविड-19 से बचाव के लिये काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एक महिला का टीकाकरण किया जा रहा है.
© UNICEF/Zoe Mangwinda
कोविड-19 से बचाव के लिये काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में एक महिला का टीकाकरण किया जा रहा है.

कोविड-19: महामारी पर क़ाबू पाने के रास्ते पर अफ़्रीका, सतर्कता पर बल

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ़्रीका में कोविड-19 संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि होने के लगभग दो वर्ष बाद, मौजूदा रुझानों के आधार पर कहा है कि यदि यही हालात रहे, तो वर्ष 2022 में वैश्विक महामारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है. मगर, संगठन ने चेतावनी दी है कि इसे सुनिश्चित करने के लिये सतर्कता बनाई रखनी होगी.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी वैश्विक महामारी पर क़ाबू पाने के इरादे से, कोविड-19 टीकाकरण की रफ़्तार तेज़ करने पर भी ध्यान केन्द्रित कर रही है, जिससे नए वैरिएण्ट के उभरने की रोकथाम हो सकेगी,

साथ ही, जीनोम जाँच के लिये प्रयोगशालाओं की संख्या व क्षमता बढ़ाई जा रही है, और संक्रमण मामलों का जल्द पता लगाने के लिये टैस्टिंग की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है.

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इसके समानान्तर, महामारी पर क़ाबू पाने तक सार्वजनिक स्वास्थ्य व सामाजिक उपायों के पालन में देशों को समर्थन जारी है.

अफ़्रीका के लिये यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर मात्शिदिसो मोएती ने गुरूवार को बताया कि, “वैसे तो कोविड-19 हमारे साथ लम्बे समय तक रहेगा, मगर सुरंग के अन्तिम छोर पर प्रकाश दिखाई दे रहा है.” 

“इस वर्ष, हम उन व्यवधानों और तबाहियों पर विराम लगा सकते हैं, जो वायरस ने हमारे रास्ते में छोड़े हैं और अपनी ज़िन्दगियों पर नियंत्रण वापिस अपने हाथों में ले सकते हैं.”

अफ़्रीका महाद्वीप ने पिछले दो वर्षों में कोविड-19 की चार लहरों का सामना किया है, और हर नई लहर में पिछली की तुलना में ज़्यादा संक्रमण मामल देखे गए हैं.

संक्रमण मामलों में बढ़ोत्तरी कोविड-19 के नए रूपों व प्रकारों की वजह से देखी गई है, जोकि अतीत के वैरिएण्ट की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से फैलता तो ज़रूर है, मगर अपेक्षाकृत कम घातक है.

डॉक्टर मात्शिदिसो मोएती ने कहा, “पिछले दो वर्षों में, अफ़्रीका महाद्वीप कोविड-19 संक्रमण के मामलों में हर नई उछाल से निपटने में स्मार्ट, तेज़ और बेहतर हुआ है.” 

उन्होंने बताया कि टीकाकरण में व्याप्त विषमताओं के बावजूद, अफ़्रीकी क्षेत्र ने कोविड-19 रूपी तूफ़ान का संकल्प व दृढ़ता के साथ सामना किया है.

“लेकिन कोविड-19 की एक बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी है, दो लाख 42 हज़ार से अधिक लोगों की जान गई है और अर्थव्यवस्थाओं को भीषण क्षति पहुँची है.”

महामारी से उपजी चुनौतियाँ

विश्व बैंक के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कारण महाद्वीप पर चार करोड़ लोग अत्यधिक निर्धनता के गर्त में धँस गए हैं. 

संक्रमण बचाव के लिये लागू किये गए ऐहतियाती उपायों को हटाने में हर महीने की देरी से, सकल घरेलू उत्पाद में 13 अरब 80 करोड़ डॉलर का नुक़सान हुआ है. 

अफ़्रीका द्वारा पहली संक्रमण लहर के दौरान, संक्रमित होने वाले लोगों में मृत्यु दर औसतन 2.5 प्रतिशत थी.

बीटा वैरिएण्ट के कारण आई दूसरी लहर में यह बढ़कर 2.7 प्रतिशत पहुँच गई, जबकि डेल्टा वैरिएण्ट की वजह से संक्रमण मामलों में दर्ज किये गए उछाल के दौरान इसे 2.4 प्रतिशत आँका गया.

चौथी लहर के दौरान यह घटकर 0.8 प्रतिशत ही रह गई, और पहली बार ऐसा हुआ कि संक्रमण मामलों में उछाल के बावजूद अस्पतालों में भर्ती संक्रमितों या मृतकों की संख्या उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ी है.

वैश्विक महामारी के शुरू होने के बाद से, कोविड-19 महामारी की चुनौती से निपटने की अफ़्रीकी महाद्वीप की क्षमता बेहतर हुई है.

मज़बूत हुई क्षमता

इस क्रम में प्रशिक्षण प्राप्त स्वास्थ्यकर्मियों, ऑक्सीजन और अन्य मेडिकल आपूर्ति की उपलब्धता बढ़ी है. 

डॉक्टर मोएती ने कहा कि महामारी के इस नए चरण में, पिछले दो वर्षों में लिये गए सबक़ का इस्तेमाल करते हुए, स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत बनाना होगा, ताकि भविष्य में आने वाली लहरों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके. 

अफ़्रीका में अब तक, कोविड-19 वैक्सीन की 67 करोड़ से अधिक ख़ुराकें प्राप्त हो चुकी हैं.

इनमें से कोवैक्स पहल के तहत 65 प्रतिशत की व्यवस्था की गई है, 29 फ़ीसदी के लिये द्विपक्षीय समझौते हुए हैं और छह प्रतिशत टीकों का प्रबन्ध, अफ़्रीकी संघ के वैक्सीन ट्रस्ट हुआ है.

महाद्वीप पर टीकाकरण की रफ़्तार फ़िलहाल धीमी है और केवल 11 प्रतिशत आबादी का ही पूर्ण रूप से टीकाकरण सम्भव हो पाया है.

अफ़्रीका में कोविड-19 के फैलाव पर नियंत्रण पाने के लिये परीक्षणों की व्यवस्था पर बल दिया गया है.

अब तक साढ़े नौ करोड़ टैस्ट किये जा चुके हैं, और 47 में से 21 देशों में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मानदण्ड के अनुरूप, हर सप्ताह प्रति 10 हज़ार व्यक्तियों पर 10 परीक्षण हो रहे हैं.