प्रकृति-आधारित समाधानों में निवेश बढ़ाएँ जी20 देश, नई रिपोर्ट

27 जनवरी 2022

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और उसके साझीदार संगठनों की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु, जैवविविधता और भूमि-क्षरण संकटों से निपटने के लिये, जी20 समूह के देशों को प्रकृति-आधारित समाधानों में निवेश, 2050 तक प्रतिवर्ष 285 अरब डॉलर तक ले जाना होगा. 

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि कोविड-19 महामारी से उबरते समय, पुराने ढर्रों पर पुनर्निर्माण के बजाय, बेहतर ढंग से पुनर्निर्माण किये जाने की आवश्यकता है. 

कोविड-19 संकट के दौरान वर्ष 2020 में, 50 अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं ने, 14 हज़ार अरब डॉलर से अधिक धनराशि ख़र्च की, मगर इसमें से केवल 368 अरब डॉलर (2 प्रतिशत) ही हरित मद में व्यय हुआ.

गुरूवार को जारी ‘State of Finance for Nature in the G20’ नामक रिपोर्ट बताती है कि आपस में जुड़े इन तिहरे ख़तरों का मुक़ाबला करने के लिये, प्रकृति-आधारित समाधानों में जी20 समूह फ़िलहाल प्रतिवर्ष 120 अरब डॉलर ही ख़र्च कर रहा है. 

वहीं, ग़ैर-जी20 देशों द्वारा किये जाना वाला निवेश और भी कम है, जिसे बढ़ाना जी20 समूह की तुलना में कहीं ज़्यादा मुश्किल हो सकता है.  

निजी सैक्टर द्वारा प्रकृति-आधारित समाधानों में निवेश का आकार भी छोटा है, और यह प्रतिवर्ष केवल 14 अरब डॉलर है, जबकि अधिकतर जी20 देशों के राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उनका योगदान क़रीब 60 प्रतिशत है.

इसके मद्देनज़र, रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा गया है कि इन समाधानों में निवेश को मज़बूती दिये जाने की आवश्यकता है.

प्रकृति-आधारित समाधान

यह रिपोर्ट यूएन पर्यावरण कार्यक्रम, विश्व आर्थिक मंच, भूमि-क्षरण के अर्थशास्त्र पर पहल समेत अन्य साझीदार संगठनों ने मिलकर तैयार की है.

वर्ष 2021 में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में, 2030 तक प्रकृति-आधारित समाधानों में निवेश को तीन गुना किये जाने, और 2020 व 2050 के बीच ऐसे समाधानों में चार हज़ार अरब डॉलर के वित्त पोषण की खाई को पाटने पर बल दिया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में प्रकृति-आधारित समाधानों में कुल वैश्विक निवेश में जी20 समूह का प्रतिनिधित्व 92 प्रतिशत है.

इसका अधिकाँश हिस्सा, लगभग 105 अरब डॉलर, घरेलू स्तर पर सरकारी कार्यक्रमों के तहत आबण्टित किया गया है. 

वार्षिक निवेश में वृद्धि ज़रूरी

जैवविविधता के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (कॉप15) के 19वें लक्ष्य और जलवायु परिवर्तन पर यूएन के वार्षिक सम्मेलन (कॉप26) के दौरान ग्लासगो समझौते में, वित्त पोषण की कमी को दूर करने के लिये, नैट-शून्य उत्सर्जन और प्रकृति के लिये लाभकारी निवेश का आकार तत्काल बढ़ाने का आग्रह किया गया है.

साथ ही, दुनिया भर में भूमि पुनर्बहाली की गति तेज़ किये जाने की बात कही गई है, जैसाकि पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्बहाली के यूएन दशक (2021-2030) में उल्लिखित है.

जी20 समूह द्वारा प्रकृति-आधारित समाधानों में वार्षिक निवेश को कम से कम 140 प्रतिशत बढ़ाए जाने की आवश्यकता है, ताकि सहमति प्राप्त जैवविविधता, भूमि पुनर्बहाली और जलवायु लक्ष्य 2050 तक पूरे किये जा सकें. 

वैश्विक निवेश के स्तर पर, प्रकृति-आधारित समाधानों में भावी निवेश को 2050 तक चार गुना बढ़ाया जाना होगा, जिससे मंतव्य वार्षिक निवेश को प्रतिवर्ष 536 अरब डॉलर तक ले जाना है.

संयुक्त राष्ट्र शहरी इलाक़ों में जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबले के लिये  प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा दे रहा है.
UNFCCC
संयुक्त राष्ट्र शहरी इलाक़ों में जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबले के लिये प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा दे रहा है.

जी20 की अग्रणी भूमिका

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जी20 समूह देशों को, बदलाव के वाहक तौर पर अपनी भूमिका समझनी होगी, और विकास व आर्थिक पुनर्बहाली को अन्तरराष्ट्रीय प्रकृति व जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप बनाना होगा.

साथ ही, जी20 सदस्य देशों से, ग़ैर-जी20 देशों में निवेश बढ़ाने के अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू तौर पर प्रकृति-आधारित समाधानों में निवेश की तुलना में, अन्य ग़ैर-जी20 देशों में निवेश ज़्यादा किफ़ायती और दक्ष साबित हो सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार, कॉरपोरेशन और वित्तीय संस्था के स्तर पर कामकाज की पद्धतियों में बदलाव की तत्काल आवश्यकता है, ताकि आपस में जुड़े, प्रकृति, जलवायु और भूमि क्षरण संकटों का सामना किया जा सके.

अनेक विकसित देशों सस्ती दरों पर अन्तरराष्ट्रीय पूँजी बाज़ार से उधार ले सकते हैं. इसलिये उन्हें अपनी अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय स्फूर्ति प्रदान करने वाले पैकेजों प्रकृति और जलवायु परिस्थितियों का भी ध्यान रखना होगा, और उदाहरण पेश करते हुए नेतृत्व करना होगा.

 

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