नगरीय इलाक़ों में हिंसक संघर्षों से, 5 करोड़ से भी ज़्यादा प्रभावित

25 जनवरी 2022

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शहरी इलाक़ों में हिंसक संघर्ष से आमजन व नागरिक प्रतिष्ठानों को होने वाली त्रासदीपूर्ण हानि की रोकथाम के लिये, हरसम्भव उपाय किये जाने का आग्रह किया है. यूएन के मुताबिक़, आबादी वाले इलाक़ों में भारी विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से, हर संसाधन और बुनियादी ढाँचे को क्षति पहुँचती है और आम नागरिक हताहत होते हैं.

यूएन प्रमुख ने सशस्त्र संघर्ष के दौरान आम नागरिकों की रक्षा के मुद्दे पर, मंगलवार को सुरक्षा परिषद में आयोजित एक चर्चा को सम्बोधित किया.   

महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि फ़िलहाल, शहरी इलाक़ो में हिंसक संघर्ष के कारण पाँच करोड़ से अधिक लोग त्रस्त हैं और उन्हें अनेक ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है.

“जब शहरों में टकराव होता है, तो आम नागरिकों की मौत होने या उनके घायल होने का जोखिम कहीं अधिक होता है.”

“कुछ मामलों में, उन्हें ग़लती से योद्धा भी माना जा सकता है.”

यूएन प्रमुख ने क्षोभ जताया कि अक्सर युद्धरत पक्ष, आमजन की सुरक्षा या उनके हिंसक संघर्ष की चपेट में आने से बचाव के लिये, क़दम नहीं उठाते हैं. 

“जब आबादी वाले इलाक़ो में विस्फोटक हथियार इस्तेमाल किये जाते हैं, तो लगभग 90 प्रतिशत मृतक और घायल, आम लोग ही होते हैं.”

यूएन प्रमुख के मुताबिक़, आम लोगों को हिंसा के कारण तुरन्त उपजे हालात या फिर दीर्घकाल में भी विनाशकारी नतीजों का सामना करना पड़ सकता है. 

“अनेक पीड़ित जीवन-पर्यन्त विकलांगता और गम्भीर मनोवैज्ञानिक सदमे का सामना करते हैं. अक्सर जल, बिजली और साफ-सफ़ाई ढाँचे को क्षति पहुँचती है. स्वास्थ्य सेवाओं में गम्भीर व्यवधान आता है.”

महासचिव ने बताया कि ग़ाज़ा में 2021 में, हिंसा के कारण अनेक स्कूलों और स्वास्थ्य केन्द्रों को नुक़सान पहुँचा, और आठ लाख से अधिक लोगों के लिये जल आपूर्ति ठप हो गई. 

अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2021 में, काबुल में एक हाई स्कूल के बाहर हुए विस्फोटक हमले में कम से कम 90 छात्रों की मौत हुई और 240 घायल हुए, जिनमें अधिकतर लड़कियाँ थीं. 

इथियोपिया के उत्तरी हिस्से में हिंसक संघर्ष के कारण लाखों लोगों के लिये सहायता व संरक्षण ज़रूरतें पैदा हुई हैं.
© UNICEF/Christine Nesbitt
इथियोपिया के उत्तरी हिस्से में हिंसक संघर्ष के कारण लाखों लोगों के लिये सहायता व संरक्षण ज़रूरतें पैदा हुई हैं.

मानवीय क़ीमत

यूएन प्रमुख ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से लेकर लीबिया, सीरिया, यमन और अन्य देशों में, जब युद्धरत पक्ष रिहायशी इलाक़ों में घूमते हैं और नागरिक प्रतिष्ठानों के नज़दीक अपने सैन्य ठिकाने बनाते हैं, तो आमजन की सुरक्षा के लिये जोखिम बढ़ जाता है.

शहरी इलाक़ों में लड़ाई से लाखों लोगों को अपने घर छोड़कर जाने के लिये मजबूर होना पड़ता है, जिससे शरणार्थी और घरेलू विस्थापितों की संख्या बढ़ती है.

इराक़ के मोसुल में 80 फ़ीसदी आवासों के ध्वस्त होने के चार वर्ष बाद, अब भी, क़रीब तीन लाख लोग विस्थापित बताए गए हैं.  

यूएन प्रमुख ने कहा कि, “शहरों में लड़ाई से लाखों टन मलबा पैदा होता है, जोकि पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिये एक जोखिम है.”

साथ ही, ना फटने वाली विस्फोटक सामग्री, प्रभावित इलाक़ों में लोगों की घर वापसी होने से रोकती है. 

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि शहरों में लड़ाई की भयावह मानवीय क़ीमत को रोका नहीं जा सकता है, इसका विकल्प मौजूद है. 

अहम उपाय

उन्होंने इस क्रम में कुछ उपाय प्रस्तुत किये, ताकि शहरी इलाक़ों में हिंसक संघर्ष की रोकथाम की जा सके और उसके असर को कम किया जा सके.

पहला, सभी पक्षों को पूर्ण रूप से अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का सम्मान करना होगा.

इसके तहत, नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध हमले, और आम लोगों का एक मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल वर्जित है. पिछले कुछ वर्षों में, इन क़ानूनों के अनुपालन के सम्बन्ध में चिन्ताएँ व्यक्त की गई है. 

यमन से साअदा में एक स्कूल, अप्रैल 2016 में हिंसा के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.
© UNICEF/UN026956/Madhok
यमन से साअदा में एक स्कूल, अप्रैल 2016 में हिंसा के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.

साथ ही, युद्धरत पक्षों को नागरिकों की रक्षा के लिये क़दम उठाने होंगे, और हनन के गम्भीर मामलों में जवाबदेही तय की जानी होगी. 

दूसरा, हिंसक संघर्ष में शामिल पक्षों के पास विकल्प हैं – शहरी इलाक़ों में लड़ाई के दौरान अपने हथियार और तौर-तरीक़े चुनने पर. 

महासचिव ने कहा कि यह समझा जाना होगा कि रिहायशी इलाक़ों में वैसे लड़ाई सम्भव नहीं है, जैसेकि खुले रणक्षेत्रों में होती है.

उन्होंने कहा कि जब विस्फोटक हथियार युद्ध क़ानूनों के अनुरूप इस्तेमाल किये जाते हैं, तो भी आम नागरिक उनकी चपेट में आ सकते हैं.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने सभी देशों से इन हथियारों के मानवीय असर को कम करने के लिये, बेहतर इस्तेमाल पर बल दिया है. 

एंतोनियो गुटेरेश ने ऐसे हथियारों के कारण होने वाले नुक़सान से निपटने की दिशा में, राजनैतिक घोषणापत्र की दिशा में किये जा रहे प्रयासों का स्वागत किया. 

उन्होंने सभी सदस्य देशों से आग्रह किया कि आबादी वाले इलाक़ों में, बड़े इलाक़े को अपनी चपेट में लेने वाले विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से बचा जाना होगा, और इसके लिये संकल्प लेना होगा.

तीसरा, शहरी इलाक़ों में हिंसा के दौरान नागरिकों की कारगर ढंग से रक्षा के लिये, सर्वोत्तम उपाय अपनाए जाने होंगे.

इसके लिये, युद्धरत पक्षों को नागरिकों व घरों को पहुँचने वाली क्षति के आरोपों का पता लगाना होगा और सबक़ सीखे जाने होंगे, ताकि उनके असर को कम करने के रास्ते ढूंढे जा सकें. 

उन्होंने बताया कि इस विश्लेषण के ज़रिये हथियारों की बिक्री के सम्बन्ध में अधिक ज़िम्मेदार ढंग से आगे बढ़ा जा सकता है.

लीबिया की राजधानी त्रिपोली के बाब अल अज़ीज़ियाह के मलबे में खेलता-कूदता एक लड़का.
© UNICEF/Giovanni Diffidenti
लीबिया की राजधानी त्रिपोली के बाब अल अज़ीज़ियाह के मलबे में खेलता-कूदता एक लड़का.

हताहतों के सम्बन्ध में सटीक सूचना से लापता लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है, नागरिकों को पहुँचने वाला नुक़सान कम किया जा सकता है और जवाबदेही, पुनर्बहाली व मेल-मिलाप को सम्भव बनाया जा सकता है.

महासचिव गुटेरेश ने सभी सदस्य देशों से अपने प्रभाव का इस्तेमाल, साझीदारों के साथ किये जाने का आग्रह किया, ताकि अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के प्रति आदर और सर्वोत्तम तौर-तरीक़े अपनाए जा सकें.

उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में सुरक्षा परिषद की एक अहम भूमिका है, और सर्वोत्तम उपाय, शहरी इलाक़ों में हिंसा होने से रोकना है.

 

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