इसराइल व फ़लस्तीन के बीच टकराव की बुनियादी वजहों से निपटने पर बल

पश्चिमी तट के रामल्लाह में एक क्षतिग्रस्त घर.
UNOCHA
पश्चिमी तट के रामल्लाह में एक क्षतिग्रस्त घर.

इसराइल व फ़लस्तीन के बीच टकराव की बुनियादी वजहों से निपटने पर बल

शांति और सुरक्षा

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत टॉर वैनेसलैण्ड ने कहा है कि इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में, आर्थिक, सुरक्षा और राजनैतिक हालात को बदतर होने से रोकने के लिये, तत्काल क़दम उठाए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, फ़लस्तीनियों और इसराइलियों में सम्पर्क व बातचीत जारी रहने और प्रक्रिया में राजनैतिक मुद्दों को समाहित करने की अहमियत को रेखांकित किया है.  

मध्य पूर्व के लिये विशेष दूत ने बताया कि फ़लस्तीनी प्रशासन की राजकोषीय हालत बेहद चुनौतीपूर्ण है, जिससे वहाँ स्थिरता को ख़तरा है और अहम सेवाओं की उपलब्धता पर भी जोखिम मंडरा रहा है.

इस बीच, फ़लस्तीनियों और इसराइलियों के बीच हिंसा, और यहूदी बस्तियाँ बसाने के लिये घरों को ध्वस्त और लोगों को बेदख़ल किये जाने की गतिविधियाँ जारी हैं. 

Tweet URL

मौजूदा हालात में दोनों पक्षों के बीच आपसी वार्ता के ज़रिये, समस्या का समाधान निकालने की सम्भावनाओं को ठेस पहुँची है.

यूएन दूत ने आगाह किया कि आधे-अधूरे उपायों पर निर्भर रहने से, टकराव को हवा देने वाली बुनियादी वजहों से निपटे जाने में और लम्बा समय लगेगा.

“एकतरफ़ा क़दमों और टकराव की मुख्य वजहों को रोकना होगा.”

“फ़लस्तीनी प्रशासन को प्रभावी ढंग से कामकाज के लिये सक्षम बनाने हेतु, राजनैतिक और आर्थिक सुधार करने होंगे, और दानदाताओं के भरोसे व समर्थन को मज़बूती देनी होगी.”

इसके समानान्तर, उन्होंने सभी पक्षों और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से ज़मीनी हालात में बेहतरी व स्थिरता सुनिश्चित करने के इरादे से, सभी प्रयासों को राजनैतिक फ़्रेमवर्क के तहत उठाए जाने का आग्रह किया है.

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये यूएन के विशेष समन्वयक टॉर वैनेसलैण्ड ने, हाल के दिनों में इसराइली और फ़लस्तीनी अधिकारियों के बीच, उच्चस्तरीय सम्पर्क व बातचीत का स्वागत किया है.

सम्वाद को प्रोत्साहन

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इसराइली रक्षा मंत्री बेनी गान्ट्ज़ के बीच दिसम्बर 2021 में मुलाक़ात के बाद, इसराइल ने अनेक क़दमों की घोषणा की है.

इसके तहत, पश्चिमी तट और ग़ाज़ा में क़रीब साढ़े नौ हज़ार फ़लस्तीनियों के पंजीकरण में ज़रूरी बदलाव किये जाएंगे. 

साथ ही, इसराइल ने कर राजस्व (tax revenue) के अग्रिम भुगतान के तौर पर तीन करोड़ 20 लाख डॉलर की रक़म प्रदान करने की भी बात कही है. इसराइल यह राजस्व, फ़लस्तीन की ओर से एकत्र करता रहा है.

फ़लस्तीनी अधिकारियों और व्यवसायियों के लिये अतिरिक्त प्रवेश परमिट भी जारी किये जाने की घोषणा की गई है. 

यूएन दूत ने दोनों पक्षों से इस सम्पर्क व बातचीत को जारी रखने और इसका दायरा बढ़ाते हुए, राजनैतिक संकटों को भी समाहित किये जाने का आग्रह किया है.

टॉर वैनेसलैण्ड ने ग़ाज़ा का उल्लेख किया, जहाँ इसराइल ने व्यापारियों के लिये, 12 हज़ार स्वीकृत दस्तावेज़ों में से, 10 हज़ार परमिट जारी किये हैं. पिछले अनेक वर्षों में यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. 

विशेष समन्वयक ने ग़ाज़ा पट्टी से सामान और लोगों की आवाजाही बढ़ाने के क़दमों का स्वागत करते हुए, दोनों पक्षों को संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर, सुलभता व व्यापार बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित किया है.

अवरोधों पर पार पाना

टॉर वैनेसलैण्ड ने ज़ोर देकर कहा कि क्षेत्र में अर्थपूर्ण शान्ति प्रक्रिया की दिशा में बढ़ने के मार्ग में राजनैतिक, आर्थिक और संस्थागत अवरोध हैं.

उन्होंने इन बाधाओं से निपटने के लिये समन्वित ढंग से प्रयास किये जाने की अहमियत को रेखांकित किया है.

उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को तनाव में कमी लाने और अहम सुधार लागू करने के साथ-साथ, राजनैतिक सन्दर्भ का ध्यान रखते हुए आपसी सम्पर्क व बातचीत को आगे बढ़ाना होगा, ताकि हाल के महीनों में सकारात्मक प्रगति को व्यर्थ होने से रोका जा सके.

उन्होंने कहा कि राजनैतिक आम सहमति और ग़ाज़ा व पश्चिमी तट को एक जायज़, लोकतांत्रिक फ़लस्तीनी प्राधिकरण के तहत लाने के लिये, सभी फ़लस्तीनी धड़ों को प्रोत्साहित किया जाना होगा.

यूएन दूत के मुताबिक़, अल्पकालिक चुनौतियों व संकटों से निपटा जाना होगा, और यह सुनिश्चित करना होगा कि इसराइली क़ब्ज़े का अन्त हो, और यूएन प्रस्तावों, अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों व अतीत के समझौतों के आधार पर दो-राष्ट्र समाधान हासिल किया जा सके.