कोविड-19: स्कूलों में तालाबन्दी यथासम्भव टालने की पुकार

17 दिसम्बर 2021

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक हैनरीएटा फ़ोर ने आगाह किया है कि कोरोनावायरस के बेहद संक्रामक वैरीएण्ट, ओमिक्रॉन, के फैलाव के बावजूद, स्कूलों में तालाबन्दी टाले जाने के लिये हरसम्भव प्रयास किये जाने होंगे. 

दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के मामलों में फिर से उछाल दर्ज किया गया है, और कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वैरीएण्ट ने चिन्ता बढ़ा दी है. 

हैनरीएटा फ़ोर ने कहा, “जब कोविड-19 का सामुदायिक फैलाव बढ़ता है और सख़्त सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय एक ज़रूरत बन जाते हैं, तो स्कूल, बन्द होने वाले अन्तिम स्थल होने चाहिये, और फिर से खुलने वाले पहले.” 

बताया गया है कि कोरोनावायस संक्रमण मामलों में उछाल, ओमिक्रॉन नामक नए चिन्ताजनक वैरीएण्ट के कारण दर्ज किया गया है.

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और वैज्ञानिक, कोरोनावायरस के इस नए रूप व प्रकार के सम्बन्ध में ज़्यादा जानकारी जुटाने के प्रयासों में लगे हैं.

बढ़ती अनिश्चितता के बीच, अनेक देशों की सरकारें स्कूलों कों खुला रखने या बन्द करने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं. 

यूनीसेफ़ प्रमुख के मुताबिक़, एक बात स्पष्ट है: व्यापक स्तर पर स्कूलों में तालाबन्दी की एक और लहर, बच्चों के लिये विनाशकारी होगी.

संक्रमण मामलों में उछाल

यूएन एजेंसी की कार्यकारी निदेशक ने कहा कि साक्ष्य स्पष्ट हैं.

स्कूलों में लम्बे समय तक खिंचने वाली, राष्ट्रव्यापी तालाबन्दी से छात्रों, शिक्षकों व अभिभावकों के लिये संसाधन सीमित हो जाएंगे और बहुत से बच्चों के पास, घर बैठकर पढ़ाई करने के साधनों तक पहुँच नहीं होगी, जिसके गम्भीर दुष्परिणाम होंगे. 

उन्होंने कहा कि इन तालाबन्दियों ने, शिक्षा क्षेत्र में दशकों से दर्ज की गई प्रगति पर पानी फेर दिया है और बचपन को पहचाना जाना भी मुश्किल हो गया है. 

“बाल श्रम, बाल विवाह और मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर, महामारी की परछाई ने अपने पैर जमा लिये हैं.”

पढ़ाई-लिखाई में हुए नुक़सान से इतर, स्कूली माहौल से बाहर रह जाने, रोज़मर्रा के जीवन में अपने दोस्तों से सम्पर्क व बातचीत ना हो पाने, स्वास्थ्य देखभाल सुलभता और पोषक आहार से वंचित रह जाने से बच्चों के लिये जोखिम बढ़ा है. 

यूएन एजेंसी के एक अनुमान के मुताबिक़, स्कूलों में तालाबन्दी होने की वजह से, छात्रों की मौजूदा पीढ़ी को अपनी आजीवन कमाई में 17 हज़ार अरब डॉलर के नुक़सान का सामना करना पड़ सकता है.

समाधान 

हैनरीएटा फ़ोर ने बताया कि इस चुनौती के समाधान के लिये यह आवश्यक है कि संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिये स्कूलों में अपनाये जाने वाले उपाय कारगर हों. 

साथ ही, स्थानीय प्रशासन को स्कूल खुले रखने के लिये हरसम्भव प्रयास करने होंगे. 

सदस्य देशों को भी डिजिटल कनेक्टिविटी में निवेश करने होंगे, ताकि किसी को भी पीछे ना छूटने दिया जाए. 

यूनीसेफ़ की शीर्ष अधिकारी ने ज़ोर देकर कहा है कि वर्ष 2020 को, शिक्षा में व्यवधान का एक और साल नहीं बनने दिया जा सकता है.

“इसे एक साल बनाने की आवश्यकता है, जिसमें शिक्षा और बच्चों के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता मिले.”

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड