भारत: 'विषाक्त मर्दानगी मानसिकता को ख़त्म करना ज़रूरी'

14 दिसम्बर 2021

भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के प्रतिनिधि और भूटान के लिये डायरेक्टर, श्रीराम हरिदास का मानना है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को समाप्त करने के कार्यक्रमों में, पुरुषों और लड़कों को शामिल करना बेहद महत्वपूर्ण है.

श्रीराम हरिदास का कहना है कि 25 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक, 'महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को समाप्त करें' विषय पर "लिंग आधारित हिंसा के ख़िलाफ़ सक्रियता के 16 दिन" मनाए जाते हैं.

इस आयोजन के पीछे नवीनतम वैश्विक अनुमानों की एक गम्भीर पृष्ठभूमि है. इन अनुमानों के मुताबिक़ हर तीन में से एक महिला, यानि दुनियाभर में लगभग 73 करोड़ 60 लाख महिलाएँ, अपने जीवनकाल में हिंसा का अनुभव करती हैं. वैश्विक और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद, पिछले एक दशक में इस संख्या में कुछ ख़ास बदलाव नहीं आया है. 

कोविड-19 महामारी ने महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा (VAWG) का जोखिम बढ़ा दिया है. हालाँकि इन मामलों पर महामारी के पूर्ण प्रभावों का बारीक़ी से अध्ययन करने की ज़रूरत है. लेकिन इन मामलों में, दुनिया के सामने, सार्वजनिक, निजी और डिजिटल स्थानों में इसके फैलाव की वास्तविकता और अपराधियों के रूप में, पुरुषों की भूमिका मुँह बाएँ खड़े हुई है.

महिलाओं का पुरूषों द्वारा हिंसा का शिकार होने की ख़बरें आना जारी हैं, फिर चाहे वो उनके अंतरंग साथी (आईपीवी), पति या साथी से हो, या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई शारीरिक या यौन हिंसा.

भारत के नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS -5) के आँकड़ों से पता चलता है कि 29 प्रतिशत अविवाहित महिलाएँ वैवाहिक हिंसा का शिकार हो चुकी हैं. हालाँकि यह NFHS-4 में रिपोर्ट में दर्ज किये गए 31 प्रतिशत मामलों के मुक़ाबले में मामूली कमी ही है, लेकिन अब भी इसकी बड़ी संख्या, चिन्ता का एक प्रमुख कारण बनी हुई है.

पुरुष और लड़के समस्या का एक अहम हिस्सा हैं. इसलिये, महिलाओं व लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा से निपटने के लिये, इसकी स्पष्ट रूप से, पुरुषों द्वारा महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के रूप में पहचान करनी होगी.

इसके लिये यह स्वीकार करना बेहद ज़रूरी है कि किस तरह मर्दानगी बनाए रखने की मानसिकता, व्यक्तिगत और सामूहिक स्तरों पर, महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देती है. इसके लिये, पुरुषों और लड़कों की भागेदारी सुनिश्चित करने के प्रयास ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेंगे.

संगी साथी द्वारा हिंसा

"यूएन जनसंख्या एजेंसी द्वारा, वर्ष 2014 में, भारत में पुरुषत्व, पुत्र वरीयता और अंतरंग साथी द्वारा हिंसा “Masculinity, Son preference and Intimate Partner Violence (IPV) in India” (आईपीवी)" पर कराए गए एक अध्ययन में संकेत मिलता है कि रूढ़िवादी पुरुषत्व आईपीवी का मज़बूत सूचक है, और व्यवहार में अधिक न्यायसंगत पुरूषों की तुलना में, पुरुषत्व का प्रदर्शन करने वाले पुरुषों में आईपीवी यानि हिंसा करने की मानसिकता होने की सम्भावना 1.35 गुना अधिक थी.

कोरोनावायरस संकट के दौरान, महिलाओं व लड़कियों के लिये लैंगिक हिंसा का जोखिम बढ़ा है.
©UNHCR/Ruben Salgado Escudero
कोरोनावायरस संकट के दौरान, महिलाओं व लड़कियों के लिये लैंगिक हिंसा का जोखिम बढ़ा है.

इस अध्ययन में हिंसा और आईपीवी के लिये, बचपन के अनुभव का भी विश्लेषण किया गया: अपने बचपन में नियमित रूप से भेदभाव और हिंसा का अनुभव करने वाले 44 प्रतिशत पुरुषों ने अपनी संगिनियों के ख़िलाफ़ हिंसात्मक व्यवहार करने की बात स्वीकार की, जबकि जिन पुरूषों का बचपन में हिंसा और भेदभाव का अनुभव कम रहा, उनमें यह प्रवृत्ति केवल 14 प्रतिशत थी.

इस साक्ष्य के मद्देनजर, हमें ऐसे हस्तक्षेप करने व कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है जो महिलाओं के आन्दोलन के साथ एकजुटता से खड़े होकर, महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा का मुक़ाबला करने के लिये पुरुषों को अधिक ज़िम्मेदारी और जवाबदेही की ओर ले जाएँ; और मर्दानगी के ज़हरीले रूपों को बढ़ावा देने वाले साथियों के दबाव से निपट सके.

इसके लिये, सामाजिक-पारिस्थितिक, सभी स्तरों पर पुरुषों और लड़कों को शामिल करने के लिये, एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

उदाहरणस्वरूप: 

पहला, उन्हें प्रारम्भिक वर्षों में ही इसमें शामिल करना होगा: लैंगिक समानता पर प्रारम्भिक वर्षों के दौरान बच्चों के साथ काम करना, जब उनका दृष्टिकोण और व्यवहार आकार ले रहा होता है, मर्दानगी और हिंसा को नकारने का एक महत्वपूर्ण तरीक़ा है. स्कूल और समुदाय-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से, ऐसी जीवन-कौशल शिक्षा देना, जो समानता, सहमति, सम्मान और गरिमा पर ध्यान केन्द्रित करती हो, इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है.

दूसरा, समुदायों को संगठित करना: इसमें सामूहिक स्तर पर संलग्न होना महत्वपूर्ण है, जो कई तरह से सम्भव है - जैसेकि अन्तर-व्यक्तिगत सम्वाद, स्थानीय और वैचारिक नेताओं की भागीदारी, आत्मविश्लेषण को बढ़ावा देने के लिये कला का रचनात्मक उपयोग और बड़े पैमाने के ऐसे अभियान शामिल हैं, जो लैंगिक रूढ़ियों व भेदभावपूर्ण मानदण्डों को चुनौती दें.

तीसरा, मीडिया के माध्यम से जन चेतना को प्रभावित करना: मीडिया के माध्यम से रूढ़ियों से निपटने में लिंग सम्वेदनशीलता सुनिश्चित करना, साथ ही मीडिया उद्योग के भीतर पुरुषों को तेज़ी से शामिल करना एक महत्वपूर्ण तरीक़ा है. उदाहरण के लिये; रॉयल नॉर्वेजियन दूतावास एवं UNFPA द्वारा समर्थित संगठन, 'पॉपुलेशन फर्स्ट' की पहल, लैंगिक सम्वेदनशीलता के लिये 2021 के क्षेत्रीय लाडली मीडिया अवार्ड्स के विजेताओं में से एक तिहाई पुरुष हैं. 2021 राष्ट्रीय लाडली मीडिया अवार्ड्स के विजेताओं में से लगभग 40 प्रतिशत पुरुष हैं, जिन्होंने मीडिया और संचार के विविध पहलुओं में अपने काम के माध्यम से, कमज़ोर समूहों की ज़रूरतों की ओर ध्यान आकर्षित किया है.

चौथा, प्रणालियों और सेवाओं को शामिल करना: सभी क्षेत्रों (स्वास्थ्य, सामाजिक सेवाओं, क़ानून व्यवस्था सहित) में पुरुषों को शामिल करने और पुरुषत्व को फिर से परिभाषित करने की सख्त आवश्यकता है. यह अन्तर्निहित लिंग पूर्वाग्रहों का सामना कर सकता है जो प्रदाता स्तर पर मौजूद हो सकते हैं और साथ ही महिलाओं के लिये सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने के संरचनात्मक मुद्दों से निपट सकते हैं. यह अग्रिम पंक्ति में सेवा प्रदान करने वाले कर्मियों के लिये, समस्याओं को दूर करने की ख़ातिर ख़ासतौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ मुख्य रूप से महिलाएँ हैं.

पाँचवा, संस्थागत शक्ति और प्रभाव वाले पुरुषों को शामिल करें: विशेषज्ञों ने महिलाओं व लड़कियों के ख़िलाफ़ हिंसा की रोकथाम और प्रतिक्रिया प्रयासों में संस्थागत व संरचनात्मक शक्ति, जैसेकि राजनैतिक और व्यावसायिक नेताओं के साथ सम्वाद में, पुरुषों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया है. इसमें नीतिगत और क़ानूनी बदलावों के माध्यम से संरचनात्मक विषमताओं को बदलने के साथ-साथ, विविधता व समानता का समर्थन करने वाले व्यवसाय और सन्तुलित व सम्मानजनक मानसिकता वाली कार्यस्थल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिये, समर्थन सुनिश्चित करने में पुरुषों की अधिक भागीदारी अहम है.

पुरुषों और लड़कों को शामिल करने की महत्ता को कम करके नहीं आँका जा सकता.

यूएन जनसंख्या एजेंसी लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने और हिंसा को समाप्त करने के लिये, मर्दानगी के मुद्दे पर रणनैतिक और समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ काम करती है.

एजेंसी के कार्यक्रम, पुरुषों और लड़कों को हानिकारक रूढ़ियों को त्यागने, सम्मानजनक, स्वस्थ सम्बन्ध अपनाने और हर जगह, हर एक के मानवाधिकारों का समर्थन करने के लिये प्रोत्साहित करते हैं.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड