एक अरब विकलांगजन के लिये, कोविड-19 ने बढ़ाई मुश्किलें

3 दिसम्बर 2021

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार, 3 दिसम्बर, को ‘अन्तरराष्ट्रीय विकलांगजन दिवस’ के अवसर पर जारी अपने सन्देश में, वैश्विक महामारी पर जवाबी कार्रवाई और उससे पुनर्बहाली की प्रक्रिया को विकलांगों के लिये समावेशी बनाने पर बल दिया है.

यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि विकलांगजन, कोविड-19 महामारी से सर्वाधिक प्रभावितों में हैं. 

“कोविड-19 ने ऐसे व्याप्त अवरोध व विषमताएँ उजागर कर दिये हैं, जिनका सामना दुनिया के एक अरब से अधिक विकलांगजन को करना पड़ता है.”

महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि कोरोनावायरस संकट से निपटने की कार्रवाई और पुनर्बहाली के दौरान, विकलांगजन का भी ध्यान रखा जाना होगा और समावेश सुनिश्चित करना होगा. 

इस क्रम में, साझीदारियाँ गढ़ने, अन्यायों व भेदभावों से निपटने, टैक्नॉलॉजी सुलभता बढ़ाने और संस्थाओं को मज़बूत बनाने की पुकार लगाई गई है, ताकि कोविड-19 के बाद एक ज़्यादा समावेशी, सुलभ और टिकाऊ विश्व का निर्माण किया जा सके.  

यूएन के एक अनुमान के अनुसार, विकलांगजन की कुल संख्या का क़रीब 80 प्रतिशत हिस्सा, विकासशील देशों में रहता है. 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 46 फ़ीसदी लोग, विकलांगता के साथ जीवन जी रहे हैं. 

हर पाँच में एक महिला को अपने जीवन में विकलांगता का अनुभव करने की सम्भावना होती है, जबकि बच्चों के लिये यह आँकड़ा हर 10 में से एक है.

अधिकारों पर बल

महासचिव गुटेरेश ने विकलांगजन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये, सभी देशों से, विकलांगजन अधिकार सन्धि को पूर्ण रूप से लागू किये जाने का आग्रह किया है. 

उन्होंने कहा कि देशों की सरकारों को सुलभता बढ़ाने के साथ-साथ, क़ानूनी, सामाजिक, आर्थिक व अन्य अवरोध हटाने के लिये, सक्रिय प्रयास करने होंगे.

इसे सम्भव बनाने के लिये विकलांगजन और उन्हें प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले संगठनों के साथ मिलकर प्रयास करने पर बल दिया गया है. 

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि विकलांगजन के अधिकारों, अपने जीवन के लिये निर्णय लेने के अधिकार और नेतृत्व प्रदान करके, साझा भविष्य को आगे बढ़ाया जा सकता है.

“टिकाऊ विकास लक्ष्य प्राप्ति के लिये, हमें विकलांगजन सहित हर किसी का साथ चाहिये.” 

महासचिव गुटेरेश के मुताबिक़, दुनिया भर में विकलांगजन और उनके प्रतिनिधि संगठनों की एक अहम मांग - हमारे बारे में कुछ भी, हमारे बिना नहीं (Nothing about us, without us) – को पूरा करवाने के लिये प्रयासरत हैं.  

डिजिटल जगत में विषमता

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की महानिदेशक ऑड्री अज़ूले ने अपने सन्देश में आगाह किया कि विकलांगजन, वैश्विक महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. 

“जिस तरह हमारे जीवन का कुछ हिस्सा ऑनलाइन हुआ है, पाबन्दी उपायों ने विकलांगजन को प्रभावित करने वाली विषमताओं की एक अन्य श्रृंखला को सामने ला दिया है: टैक्नॉलॉजी व डिजिटल जगत से जुड़ी विषमताएँ.”

उन्होंने कहा कि नवीनतम शिक्षा निगरानी रिपोर्ट दर्शाती है कि महज़ 68 प्रतिशत देशों के पास ही समावेशी शिक्षा की परिभाषा है, और केवल 57 प्रतिशत देश ही, हाशिये पर रहने वाले विविध समूहों का उल्लेख करते हैं.

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि इनमें से कुछ मुद्दों पर अगली वैश्विक विकलांगता बैठक के दौरान चर्चा की जानी होगी. 

घाना और नॉर्वे, फ़रवरी में होने वाली इस संयुक्त राष्ट्र समर्थित बैठक की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं.  

कुछ अहम तथ्य:

- विश्व भर में क़रीब एक अरब लोग विकलांगता की अवस्था में रहते हैं, जोकि विश्व आबादी का 15 प्रतिशत है

- इनमें से 80 फ़ीसदी विकलांगजन, विकासशील देशों में रहते हैं

- लगभग 80 करोड़ विकलांगजन कामकाजी उम्र के हैं, मगर उन्हें रोज़गार पाने में अनेक अवरोधों का सामना करना पड़ता है

- हर पाँच में से तीन विकलांगजन, महिलाएँ हैं और निर्धनता में रह रहे व्यक्तियों के इससे पीड़ित होने की सम्भावना अधिक होती है 

- एक अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में विकलांग बच्चों की संख्या 24 करोड़, यानि हर 10 में से एक बच्चा

- विकलांगता की अवस्था में रहने के कारण बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा पर असर होता है, और उनके शोषण व हिंसा का शिकार होने का ख़तरा बढ़ जाता है

- विकासशील देशों में 90 फ़ीसदी विकलांग बच्चे, स्कूली शिक्षा से वंचित हैं. 

 

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