भावी महामारियों से रक्षा के लिये वैश्विक समझौते की दिशा में प्रगति, 'आशा का स्रोत'

एक शरणार्थी महिला को सिनोफार्म कोविड-19 वैक्सीन का पहला टीका लगाया जा रहा है.
UNHCR Indonesia
एक शरणार्थी महिला को सिनोफार्म कोविड-19 वैक्सीन का पहला टीका लगाया जा रहा है.

भावी महामारियों से रक्षा के लिये वैश्विक समझौते की दिशा में प्रगति, 'आशा का स्रोत'

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली ने भविष्य में वैश्विक महामारियों व स्वास्थ्य संकटों की रोकथाम करने, उनसे निपटने की तैयारियों और जवाबी कार्रवाई को पुख़्ता बनाये जाने के इरादे से, एक वैश्विक प्रक्रिया शुरू किये जाने पर सहमति व्यक्त की है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने ऐसेम्बली के निर्णय को आशाजनक बताते हुए इसका स्वागत किया है.

सर्वमत से लिये गए इस निर्णय के तहत, एक सन्धि, समझौते या किसी अन्य अन्तरराष्ट्रीय उपाय के मसौदे को तैयार करके, उसे पारित करने के लिये वार्ता को आगे बढ़ाया जाएगा.  

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली के फ़ैसले को ऐतिहासिक व बेहद अहम बताया है.

संगठन प्रमुख के मुताबिक़ ताज़ा सहमति के ज़रिये भावी पीढ़ियों की वैश्विक महामारियों से रक्षा करने में मदद मिलेगी, और उन कमियों से बचा जा सकेगा, जिन्हें कोविड-19 के दौरान देखा गया है. 

उन्होंने कहा कि यह एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाले ऐसे अवसर को प्रदर्शित करता है, जिससे सर्वजन के स्वास्थ्य-कल्याण की रक्षा व उसे बढ़ावा देने के लिये वैश्विक स्वास्थ्य ढाँचे को मज़बूती प्रदान की जा सकती है.

Tweet URL

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा, “कोविड-19 महामारी ने महामारियों से लोगों की रक्षा के लिये बनी वैश्विक प्रणाली में अनेक कमज़ोरियों को उजागर किया है.”

“सर्वाधिक निर्बलों के लिये टीकों की अनुपबलब्धता; स्वास्थ्यकर्मियों के पास जीवनरक्षक काम करने के लिये ज़रूरी उपकरण का अभाव; और एक वैश्विक ख़तरे का सामना करने के लिये ज़रूरी वैश्विक एकजुटता को धक्का पहुँचाने वाले ‘पहले मैं’ जैसे तौर-तरीक़े.”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि इसी दौरान, वैज्ञानिक व राजनैतिक स्तर पर सहयोगपूर्ण कार्रवाई के प्रेरणास्पद उदाहरण भी देखने को मिले हैं. 

तेज़ी से विकसित की गई वैक्सीन्स से लेकर देशों द्वारा एक वैश्विक समझौते पर वार्ता के लिये संकल्प तक.

विशेष बैठक

भावी महामारियों की रोकथाम, तैयारियों व जवाबी कार्रवाई के लिये सन्धि के मुद्दे पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रशासनिक संस्था की तीन दिवसीय विशेष बैठक हुई थी.

वर्ष 1948 में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की स्थापना के बाद से यह दूसरी बार है जब विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली की एक विशेष सत्र के तहत बैठक आयोजित की गई है.  

इस बैठक के दौरान एकमात्र निर्णय को पारित किया गया, जिसका शीर्षक था: “एकजुट दुनिया”

इससे पहले, महानिदेशक घेबरेयेसस ने सोमवार को बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा, “बिल्कुल अभी-अभी ओमिक्रॉन ने दिखाया है कि दुनिया को, महामारियों पर एक नई सन्धि की क्यों ज़रूरत है: हमारी मौजूदा व्यवस्था, देशों को ऐसे जोखिमों के बारे में अन्य देशों को सतर्क करने के लिये, कोई प्रोत्साहन नहीं मुहैया कराती, जो अन्ततः उनकी सीमाओं तक भी पहुँचेंगे.”

डॉक्टर टैड्रॉस ने चिन्ता जताई थी कि विश्व ने, कोविड-19 की चुनौती का सामना करने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग व एकजुटता के साथ काम नहीं किया है, और अन्य चुनौतियों के साथ-साथ वैक्सीन विषमता के कारण, ओमिक्रॉन जैसे नए ख़तरनाक वैरिएण्ट उभरने में कामयाब होते रहे हैं.

प्रक्रिया की शुरुआत

ऐसेम्बली के निर्णय के ज़रिये, वार्ता के लिये एक अन्तरसरकारी निकाय (intergovernmental negotiating body / INB) को स्थापित किया जाएगा.

इसका दायित्व WHO सन्धि, समझौते और महामारी की रोकथाम, तैयारी व जवाबी कार्रवाई पर अन्य अन्तरराष्ट्रीय उपायों का मसौदा तैयार करना और उस सिलसिले में बातचीत को आगे बढ़ाना है. 

समझौते के इस मसौदे को विश्व स्वास्थ्य संगठन के संविधान के अनुच्छेद 19 या अन्य सम्बन्धित प्रावधानों के अन्तर्गत पारित किये जाने की योजना है.

अन्तरसरकारी संस्था की पहली बैठक 1 मार्च 2022 को आयोजित की जाएगी, जिसमें कामकाज के तरीक़ों व समयावधि पर चर्चा होगी.

इसके बाद, 1 अगस्त 2022 को दूसरी बैठक में समझौते के मसौदे की दिशा में हुई प्रगति का जायज़ा लिया जाएगा.

बताया गया है कि विचार-विमर्श की प्रक्रिया को समृद्ध बनाने के लिये सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित किये जाने का कार्यक्रम है. वर्ष 2023 में विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली के 76वें सत्र में प्रगति रिपोर्ट सौंपी जाएगी.