कोविड-19 के दौरान तालाबन्दियों के बावजूद, वैश्विक विस्थापन में वृद्धि - IOM

1 दिसम्बर 2021

कोविड-19 महामारी के कारण लागू की गई यात्रा पाबन्दियों, तालाबन्दियों और वैश्विक गतिशीलता के लगभग थम जाने के बावजूद, आपदाओं, हिंसक संघर्ष व टकराव के कारण घरेलू विस्थापन में नाटकीय बढ़ोत्तरी हुई है. अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) द्वारा बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है. 

 

कोरोनावायरस संकट की वजह से, वर्ष 2020 में हवाई यात्रियों की संख्या में 60 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वर्ष 2019 में यह आँकड़ा साढ़े चार अरब था, जोकि 2020 में घटकर एक अरब 80 करोड़ रह गया. 

मगर, प्राकृतिक आपदाओं, हिंसक संघर्ष व टकराव के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की संख्या में वृद्धि देखी गई – वर्ष 2019 में उनकी संख्या तीन करोड़ 15 लाख थी, जोकि 2020 में बढ़कर चार करोड़ पाँच लाख पहुँच गई.  

यूएन एजेंसी के महानिदेशक एंतोनियो वितोरिनो ने कहा कि मानव इतिहास में ऐसा विरोधाभास पहले नहीं देखा गया है.

“जहाँ अरबों लोग कोविड-19 के कारण एक तरह से क़ैद हो गये, वहीं करोड़ों लोगों को उनके अपने देशों में विस्थापन के लिये मजबूर होना पड़ा.”

रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1970 में अन्तरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या आठ करोड़ 40 लाख थी, जोकि 2020 में बढ़कर 28 करोड़ 10 लाख तक पहुँच गई है.   

हालांकि वैश्विक आबादी में हुई वृद्धि को ध्यान में रखकर किया गया विश्लेषण दर्शाता है कि अन्तरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या का अनुपात, विश्व आबादी का 2.3 प्रतिशत था, जो अब 3.6 प्रतिशत हो गया है.   

दुनिया भर में अधिकाँश लोग (96.4 फ़ीसदी) उसी देश में रहते हैं जहाँ उनका जन्म हुआ है. हर तीस में से केवल एक व्यक्ति ही प्रवासी है. 

विश्व में प्रवासन सम्बन्धी रुझानों को पेश करने वाली रिपोर्टों की श्रृंखला में यह 11वीं कड़ी है, जिसमें मौजूदा हालात के प्रति समझ बढ़ाने और प्रवासन नीतियों के क्षितिज पर उभरते मुद्दों पर जानकारी साझा करने के लिये नवीनतम आँकड़ों का सहारा लिया गया है.

रिपोर्ट की सम्पादक मैरी मैकऑलिफ़ ने बताया कि, “यह रिपोर्ट, विश्व प्रवासन रिपोर्ट के किसी अन्य संस्करण से बिलकुल अलग है.”

“पिछले दो वर्षों में प्रवासन और गतिशीलता पर बहुत कुछ हुआ है, और इस रिपोर्ट में हमने अहम डेटा, शोध व विश्लेषण को एक साथ प्रस्तुत किया है, ताकि यह दर्शाया जा सके कि कोविड-19 के कारण किस तरह दीर्घकालीन रुझान प्रभावित हुए हैं, और किस तरह दुनिया भर में प्रवासी प्रभावित हुए हैं.”

वैश्विक महामारी का असर

एक अनुमान के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या में कोविड-19 के कारण, वर्ष 2020 में 20 लाख तक की कमी दर्ज की गई.

वायरस के तेज़ी से फैलने की आशंका, नए वैरिएण्ट के उभरने के प्रति चिन्ता और बीमारी की गम्भीरता के कारण, नीतिनिर्धारकों को कठिन निर्णय लेने के लिये मजबूर किया है. 

रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक मुख्य ज़ोर, वैश्विक स्वास्थ्य संकट के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई पर ही केंद्रित रहा है, और परीक्षण, उपचार, व टीकाकरण की दिशा में प्रयास किये गए हैं. 

मगर, ऐहतियाती उपायों के तहत लागू की गई पाबन्दियों से दुनिया भर में लोगों की स्वच्छंद आवाजाही में बदलाव आया है, जिससे मानव गतिशीलता प्रभावित हुई है. 

वायरस के फैलाव पर क़ाबू पाने के लिये, देशों की सरकारों ने वर्ष 2020 के शुरुआती महीनों से ही अनेक क़दम उठाये हैं.  

इनमें घर तक ही सीमित किये जाने, कार्यस्थलों व स्कूलों में तालाबन्दी, सामाजिक रूप से एकत्र होने की मनाही, देश के भीतर आने जाने पर सख़्ती, और अन्तरराष्ट्रीय यात्रा पर नियंत्रण समेत अन्य उपाय शामिल हैं.

धन प्रेषण (remittances)

रिपोर्ट में हाल के दशकों में धन प्रेषण रुझान का भी उल्लेख किया गया है – यह 2007 में 126 अरब डॉलर से बढ़कर 2020 में 702 अरब डॉलर तक पहुँच गया है.

वैश्विक महामारी के कारण प्रवासियों द्वारा अपने मूल देशों में, परिवारों व समुदायों को भेजे जानी धनराशि में बड़ी गिरावट की आशंका जताई गई थी.

लेकिन वर्ष 2020 में, उससे पहले के साल की तुलना में 2.4 प्रतिशत की मामूली कमी ही देखी गई है. 

धन प्रेषण में भारत, चीन, मैक्सिको, फ़िलिपीन्स और मिस्र, पाँच अग्रणी देश हैं. इनमें भी भारत और चीन अन्य देशों से कहीं आगे हैं, जिन्हें क्रमश: 83 अरब डॉलर और 59 अरब डॉलर की प्राप्ति हुई है. 

धन प्रेषण का मुख्य स्रोत, आमतौर पर उच्च-आय वाले देश ही हैं. दशकों से, अमेरिका इस सूची में सबसे ऊपर रहा है, जिसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, स्विट्ज़रलैण्ड और जर्मनी का स्थान है.

 

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