फ़लस्तीनी लोगों के अधिकार हनन से, दो राष्ट्र समाधान पर जोखिम, यूएन प्रमुख

29 नवंबर 2021

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को कहा है कि इसराइल द्वारा क़ाबिज़ फलस्तीनी इलाक़ों (येरूशेलम सहित) में जारी स्थिति से, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा के लिये महत्वपूर्ण चुनौती जारी है.

यूएन महासचिव ने सोमवार को “फ़लस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता के अन्तरराष्ट्रीय दिवस” के अवसर अपने सन्देश में आगाह किया है कि फ़लस्तीनी लोगों के अधिकारों का लगातार हनन होते रहने से, दो राष्ट्रों के सिद्धान्त की सम्भावनाएँ क्षीण होने का जोखिम है, हनन के इन मामलों में इसराइली बस्तियों का विस्तार भी शामिल है.

यूएन प्रमुख अलबत्ता, वरिष्ठ इसराइली और फ़लस्तीनी अधिकारियों के बी

च हाल के समय में हुए सम्पर्कों से उत्साहित भी हैं, मगर साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि मौजूदा हालात का जारी रहना पर्याप्त नहीं है.

दो राष्ट्र रूपी समाधान

एंतोनियो गुटेरेश ने दोहराते हुए कहा कि उस क्षेत्र में शान्ति व सुरक्षा के साथ दो राष्ट्रों का सहअस्तित्व ही व्यापक लक्ष्य है.

इसमें, दोनों तरफ़ के लोगों की वैध और वाजिब राष्ट्रीय आकांक्षाओं की पूर्ति करना भी शामिल है. इस लक्ष्य में, दोनों देशों की सीमाएँ 1967 में मौजूद रही सीमा रेखा पर आधारित हों, और येरूशेलम दोनों देशों की राजधानी बने.

यूएन महासचिव ने दोनों पक्षों से ऐसी कोई भी कार्रवाई करने या क़दम उठाने से बचने को कहा जिनसे इस संघर्ष का शान्तिपूर्ण समाधान तलाश करने के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़े. 

उन्होंने सभी पक्षों से, ग़ाज़ा पट्टी की नाकेबन्दी ख़त्म करने के लिये और क़ब्ज़े में ज़िन्दगी गुज़ार रहे तमाम फ़लस्तीनी लोगों के हालात बेहतर बनाने के लिये, रचनात्मक बातचीत में शामिल होने का आग्रह भी किया है.

एकजुटता

यूएन प्रमुख का सन्देश ऐसे समय में आया है जब फ़लस्तीन के अनसुलझे मुद्दे और फ़लस्तीनी लोगों के अपरिहार्य अधिकारों पर विचार करने के लिये, सोमवार को न्यूयॉर्क में एक विशेष बैठक भी हुई है.

ये घटनाक्रम, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के लिये, इन तथ्यों पर ध्यान केन्द्रित करने के लिये भी एक अवसर होगा कि यूएन महासभा कमेटी (CEIRPP) द्वारा 1975 में परिभाषित किये गए, फ़लस्तीनी लोगों के अधिकार अभी हासिल किये जाने हैं.

इनमें – आत्म निर्णय, राष्ट्रीय स्वाधीनता और सम्प्रभुता का अधिकार, और उनके अपने घरों व सम्पत्तियों को वापिस लौटने का अधिकार भी शामिल हैं जिनसे उन्हें बेदख़ल किया गया.

इन कार्यक्रमों के साथ ही, “फ़लस्तीन व संयुक्त राष्ट्र के प्रश्न” पर न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में एक स्थाई प्रदर्शनी भी लगी हुई है. 

 

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