अगस्त में आए भूकम्प से, सड़कों और पुलों सहित आवश्यक बुनियादी ढाँचे नष्ट हो गए थे.

आपबीती: आपदा की घड़ी में, हेती में नज़र आई 'दिल छू लेने वाली सहनक्षमता'

IOM/Monica Chiriac
अगस्त में आए भूकम्प से, सड़कों और पुलों सहित आवश्यक बुनियादी ढाँचे नष्ट हो गए थे.

आपबीती: आपदा की घड़ी में, हेती में नज़र आई 'दिल छू लेने वाली सहनक्षमता'

शांति और सुरक्षा

हेती में इस साल अगस्त महीने में आए भीषण भूकम्प के बाद, पुनर्बहाली प्रयासों में सहयोग कर रहे, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन  (आईओएम) के एक कर्मचारी का कहना है कि आपदा से प्रभावित हुए लोगों ने दिल छू लेने वाली सहनक्षमता का प्रदर्शन किया है. उन्होंने हेती के अपने अनुभव को यूएन न्यूज़ के साथ साझा किया है... 

 

IOM में आपात मामलों के समन्वयक, जोसेफ चलेला, लेबनान से हैं, और भूकम्प प्रभावित क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

“मैं हेती में भूकम्प आने से ठीक दो सप्ताह पहले ही बांग्लादेश से आया था. चूँकि मुझे संकट की परिस्थितियों में काम करने अनुभव रहा है, इसलिये मैं भूकम्प आने के तुरन्त बाद आपातकालीन कार्रवाई में मदद कर पाया.

सबसे महत्वपूर्ण पहला क़दम था, आपात स्थिति को नियंत्रण में लाना.

मैंने जवाबी कार्रवाई के लिये तुरन्त एक टीम का गठन किया, ताकि सरकारी निकायों और स्थानीय साझीदारों के साथ मिलकर काम किया जा सके.

इसके बाद इन सहयोगियों को तेज़ी से सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में तैनात किया गया, जिससे वे नुक़सान और ज़रूरतों का आकलन करके, गैर-खाद्य किट व तिरपाल, टैण्ट, सौर लालटेन जैसी ज़रूरी सामग्री और स्वच्छता किट एवं रसोई सेट वितरित करना शुरू कर दें.

नुक़सान और हताहतों की संख्या को सीमित करने और बेघर लोगों को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिये एक त्वरित प्रतिक्रिया बहुत अहम होती है.

जोसेफ चलेला, IOM में आपातकालीन समन्वयक के रूप में कार्य करते हैं.
IOM/Monica Chiriac
जोसेफ चलेला, IOM में आपातकालीन समन्वयक के रूप में कार्य करते हैं.

अस्थिर सुरक्षा स्थिति

इस काम में मुख्य चुनौतियाँ तंत्र सम्बन्धी रही हैं और बहुत हद तक हेती की अस्थिर सुरक्षा स्थिति से जुड़ी हुई हैं. इससे ज़रूरतमन्द लोगों तक पहुँचना अधिक कठिन हो गया. साथ ही, कोविड-19 महामारी के कारण राहत कार्य अधिक जटिल हो गया.

कई समुदाय दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं जहाँ पहले से ही पहुँच सीमित है और अब भूकम्प से क्षतिग्रस्त पुलों और सड़कों के कारण लगभग असम्भव हो गई है.

यदि लोगों को कोई सहायता और स्वच्छता किट जैसी वस्तुएँ नहीं मिलतीं, तो संक्रामक और पानी से पैदा होने वाली बीमारियों में भारी वृद्धि होती. 

आश्रय के अभाव से लिंग आधारित हिंसा के बढ़ने जोखिम भी रहता है. 

अन्य सरकारी और स्थानीय भागीदारों के साथ-साथ, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष और विश्व खाद्य कार्यक्रम समेत कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने भी इस जवाबी कार्रवाई में योगदान दिया है.

मैं सभी, स्थानीय और अन्तरराष्ट्रीय भागीदारों को, असंख्य चुनौतियों के बावजूद प्रभावित लोगों की मदद के लिये मिलकर काम करते देखकर बेहद प्रभावित हूँ.

साथ ही, हेती के लोगों की सहनक्षमता और अपने घरों में रहने व बेहतर निर्माण करने का उनका दृढ़ संकल्प, दिल को छू लेता है. 

IOM ने आश्रय और गैर-खाद्य पदार्थों की मदद के ज़रिये, डेढ़ लाख से भी अधिक लोगों की सहायता की है और मुझे लगता है कि जिन लोगों की हमने मदद की है, विशेष रूप से बहुत दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोग, वो IOM की तात्कालिक प्रतिक्रिया के लिये आभारी तो थे ही, शायद हैरान भी थे.

महत्वपूर्ण बात यह है कि मदद के लिये सबसे पहले पहुँचकर, आईओएम ने लोगों को यह उम्मीद दी है कि उन्हें उस समय भुलाया नहीं गया, जब उन्हें उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी."