कोविड-19: मौतें एक साल में सबसे कम, मगर वैक्सीन विषमता बरक़रार

13 अक्टूबर 2021

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुखिया डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि वैसे को कोविड-19 महामारी से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आ रही है, मगर वैक्सीन के टीकाकरण में विषमता अब भी बरक़रार है. उन्होंने विकासशील देशों को और ज़्यादा सहायता व समर्थन की पुकार लगाई है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुखिया ने बताया है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण होने वाली मौतों की संख्या इस समय, लगभग एक साल के दौरान सबसे कम स्तर पर है.

लेकिन उन्होंने बुधवार को, जिनीवा में संगठन की नियमित प्रैस वार्ता में ये भी कहा कि अब भी ये संख्या, अस्वीकार्य स्तर तक बहुत ज़्यादा है – यानि दुनिया भर में, हर सप्ताह लगभग 50 हज़ार लोगों की मौतें हो रही हैं, जबकि वास्तविक संख्या, निश्चित रूप से इससे कहीं ज़्यादा होगी.

उन्होंने कहा, “योरोप के अलावा, अन्य सभी क्षेत्रों में, मौतों की संख्या में कमी हो रही है. जबकि योरोप के अनेक देशों में कोविड-19 के संक्रमण और उसके कारण होने वाली मौतों की संख्या में बढ़ोत्तरी की फिर से नई लहर देखी गई है.”

“और स्वभाविक रूप से ऐसे देशों में संक्रमण व मौतों के मामले सबसे ज़्यादा देखे जा रहे हैं जहाँ बहुत कम जनसंख्या को वैक्सीन के टीके लग सके हैं.”

डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने वैश्विक सहयोग की अपील करते हुए कहा, “जिन देशों में वैक्सीन के दो टीके लगाए जाने के बाद अब तीसरे टीके यानि बूस्टर लगाने की बात चल रही है, उसके कारण, दरअसल बहुत से अन्य देशों में, जोखिम का सामना कर रही आबादियों को भी टीके नहीं मिल पा रहे हैं.”

अभी लक्ष्य से दूर

दुनिया भर में, बुधवार, 13 अक्टूबर तक, कोविड-19 के संक्रमण के कुल मामले लगभग 23 करोड़, 80 लाख थे, और 48 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

ध्यान रहे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, कुछ समय पहले, तमाम देशों की सरकारों से, सितम्बर तक, अपनी कुल जनसंख्या के लगभग 10 प्रतिशत हिस्से का टीकाकरण किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था. मगर, 56 देशों में ये लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है, और उनमें से ज़्यादातर देश अफ़्रीका में हैं.

डॉक्टर टैड्रॉस ने कहा कि बहुत से देश अब भी, इस वर्ष के अन्त तक, अपनी 40 प्रतिशत आबादियों को टीके लगवाने का लक्ष्य हासिल करने से पीछे छूट जाने की आशंका के दायरे में हैं. बुरूण्डी, इरिट्री और उत्तर कोरिया में तो अभी टीकाकरण शुरू भी नहीं हुआ है. 

उन्होंने कहा, “जिन देशों में टीकाकरण अभी लक्ष्य से पीछे चल रहा है, उनमें से लगभग आधे देशों में वैक्सीन ख़ुराकें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो सकी हैं.

उन देशों में टीकाकरण कार्यक्रम तो जारी हैं, मगर उन्हें लक्ष्य हासिल करने के लिये ज़रूरी रफ़्तार से टीकाकरण करने के लिये, पर्याप्त मात्रा में टीके ही उपलब्ध नहीं हैं.”

डॉक्टर टैड्रॉस ने वैश्विक स्तर पर वैक्सीन टीकों की आपूर्ति नियंत्रित करने वाले तमाम देशों व कम्पनियों से आग्रह किया कि वो कोवैक्स एकजुटता पहल और अफ़्रीकी वैक्सीन अधिग्रहण ट्रस्ट (AVAT) के लिये, प्राथमिकता के आधार पर टीके मुहैया कराएँ.

इस बीच, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी (WHO) और उसके साझीदार संगठन, नाज़ुक हालात व संघर्षों से प्रभावित देशों में, टीकाकरण शुरू करने के लिये, तकनीकी व बुनियादी ढाँचा क्षमता मज़बूत करने के लिये काम कर रहे हैं.

स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है, “अगर बहुत तेज़ी व महत्वाकांक्षा के साथ टीकाकरण किया जाए तो इनमें से ज़्यादातर देश अब भी इस वर्ष के अन्त तक, अपनी 40 प्रतिशत आबादी को टीके लगाने में कामयाबी हासिल कर सकते हैं, या फिर इस लक्ष्य के स्पष्ट रास्ते पर नज़र आ सकते हैं.”

 

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