सड़क हादसों में होने वाली मौतें, एआई (AI) की मदद से की जा सकती हैं आधी

7 अक्टूबर 2021

संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष दूतों ने गुरूवार को, “सड़क सुरक्षा के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता” (AI) नामक एक नई पहल शुरू करते हुए कहा है कि देशों व निवेशकों को, सड़कें हर किसी के लिये सुरक्षित बनाने की ख़ातिर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास व प्रयोग बढाना होगा.

टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDGs) में भी ऐसी कार्रवाई किये जाने की पुकार लगाई गई है जिसके ज़रिये दुनिया भर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या कम से कम आधी की जा सके और सभी को, वर्ष 2030 तक, सुरक्षित, सुलभ और टिकाऊ परिवहन साधन मुहैया कराए जा सकें.

इस नए कार्यक्रम के अनुसार, ये लक्ष्य प्राप्ति सम्भव बनाने के लिये, कृत्रिम गुणवत्ता (AI) में तीव्र प्रगति बहुत अहम है, विशेष रूप में, निम्न व मध्य आय वाले देशों में, जहाँ सड़क दुर्घटनाओं में, हर साल ज़्यादा मौतें होती हैं.

यूएन एजेंसियों के अनुसार, हर साल दुनिया भर में, सड़क दुर्घटनाओं के कारण, लगभग 14 लाख लोगों की मौत हो जाती है. 

इनके अतिरिक्त, दो से पाँच करोड़ लोग घायल भी होते हैं, जिनसे बहुत से लोग विकलांग भी हो जाते हैं.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनेक तरह से मदद कर सकती है, जिसमें दुर्घटनाओं सम्बन्धी आँकड़ों का बेहतर एकत्रीकरण, विश्लेषण, सड़क ढाँचे में वृद्धि, दुर्घटनाओं के बाद के हालात में सुविधा, मदद और कार्रवाई को बेहतर बनाया जाना, और नियम व क़ानून ढाँचे में नवाचार को प्रेरित करना शामिल है. 

अभी बहुत से देशों के पास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावशाली प्रयोग के लिये आधारभूत ढाँचा उपलब्ध नहीं है, इसलिये वो सड़क सुरक्षा के समाधानों की पहचान करने सक्षम नहीं हैं.

असीम अवसर

“सड़क सुरक्षा के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता” नामक ये पहल, सड़क सुरक्षा, प्रोद्योगिकी और अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) को एक मंच पर लाती है.

आईटीयू के महासचिव हॉलीन झाओ ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि विकासशील देशों में, सड़क दुर्घटनाओं में बहुत ज़्यादा मौतें होना, इस दलील का एक अन्य उदाहरण है कि नई प्रोद्योगिकियों के लाभ, हर जगह, हर किसी को क्यों नहीं पहुँचने चाहिये.

सड़क सुरक्षा के लिये विशेष दूत ज्याँ टोश्ट का कहना है, “दुनिया भर में, सड़क सुरक्षा और डिजिटल टैक्नॉलॉजी के लाभों के बीच की खाई को पाटने के लिये, कृत्रिम बुद्धिमत्ता असीम अवसर मुहैया कराती है.” 

अभी ये काम करना है

अर्द्ध स्वचालित कारों के बाज़ार में आने के साथ ही, स्वचालित वाहनों का भविष्य, एक बार फिर चर्चा में है. 

इसके साथ ही, कोविड-19 महामारी ने परिवहन और यातायात के रुझान बदल दिये हैं और निजी स्वामित्व वाले वाहनों की पसन्द का रुझान बढ़ा दिया है.

ब्राज़ील में सड़क पार करते हुए एक महिला
PAHO
ब्राज़ील में सड़क पार करते हुए एक महिला

हालाँकि विशेष दूत ने, मार्च 2021 में कहा था कि वर्ष 2030 तक, सड़क दुर्घटनाओं में हताहत होने वाले लोगों की संख्या कम से कम आधी करने का लक्ष्य हासिल करने के लिये, अभी बहुत काम किये जाने की ज़रूरत है.

उनका कहना है, “संचार के ज़रिये विभिन्न चैनलों से जुड़ने वाले वाहन, ऐसे समुदायों की पहुँच से अभी बहुत दूर हैं जो समुदाय, सड़क दुर्घटनाओं से सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं. ऐसा नज़र नहीं आता कि बहुत से देशों में बुनियादी ढाँचा, निकट भविष्य में, स्वचालित वाहनों की ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता हासिल कर सकेगा.”

उन्होंने कहा, “प्रोद्योगिकी की क़ीमत अब भी बहुत ज़्यादा है.”

इस नए कार्यक्रम के तहत, वैश्विक स्तर पर, सड़क का इस्तेमाल करने वाले तमाम लोगों की सुरक्षा बेहतर बनाने की ख़ातिर, सार्वजनिक व निजी दोनों ही सैक्टरों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयास मज़बूत किये जाएंगे. चाहे वो लोग, ऑटोमोबाइल, मोटरसायकिल, सायकिल, पैदल या अन्य परिवहन तरीक़ों से यात्रा करते हों.

टैक्नॉलॉजी पर संयुक्त राष्ट्र की दूत मारिया-फ़्रांसेस्का स्पैटोलिसानो की नज़र में, ये पहल, “वास्तव में, ऐसे ज़मीनी और वास्तविक जीवन के टैक्नॉलॉजी मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करने का एक प्रयास है, जो लोगों की ज़िन्दगियों पर व्यापक असर डालते हैं”.

 

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