अफ़ग़ानिस्तान: पाँच वर्ष से कम उम्र के आधे बच्चे गम्भीर कुपोषण की चपेट में

5 अक्टूबर 2021

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने मंगलवार को आगाह करते हुए कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष के अन्त तक, पाँच वर्ष से कम उम्र के लगभग 32 लाख बच्चों के, अत्यन्त गम्भीर कुपोषण की चपेट में आने की सम्भावना है. एजेंसियों ने ये भी कहा है कि अगर तुरन्त इस समस्या का उपयुक्त समाधान नहीं मुहैया कराया गया तो कम से कम 10 लाख बच्चों की मौत भी हो सकती है.

देश में लगभग एक करोड़ 40 लाख लोग अत्यन्त गम्भीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में हैं और उनके पास पानी, भोजन व बुनियादी स्वास्थ्य व पोषण सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं. ये हालात, देश में वर्षों के संघर्ष व आर्थिक संकटों के कारण उत्पन्न हुए हैं और अगस्त में, तालेबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद, ये हालात और भी बदतर हो गए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में यूनीसेफ़ के प्रतिनिधि हर्वे ल्यूडोविक डी लिस और देश में, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की प्रतिनिधि व डायरेक्टर मैरी ऐलेन मक्ग्रोआर्टी ने हाल ही में, हेरात का दो दिन का दौरा करने के बाद ये चेतावनी जारी की है.

स्तनपान कराने में माताओं की जद्दोजेहद

यूएन एजेंसियों के इन पदाधिकारियों ने अपनी इस यात्रा के दौरान एक ऐसी महिला से भी बातचीत की जो, अपनी बेटी को स्तनपान नहीं करा सकती. उसकी 18 महीनों की बेटी का, हेरात के क्षेत्रीय अस्पताल में, अत्यन्त गम्भीर कुपोषण के लिये इलाज हो रहा है.

यूएन पदाधिकारियों के अनुसार, जहाँ बीबी नामक इस महिला ने बताया, “हमारे घर में बिल्कुल भी भोजन नहीं है. हम खाने-पीने का सामान ख़रीदने के लिये, अपना सबकुछ बेच रहे हैं, उसके बावजूद मुझे मुश्किल से ही कुछ खाने-पीने के लिये मिलता है. मैं बहुत कमज़ोर हूँ और मेरे भीतर, मेरी बेटी के लिये बिल्कुल भी दूध नहीं बन पा रहा है.”

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि हर्वे ल्यूडोविक डी लिस का कहना था “चूँकि अपने लिये भरपेट भोजन का इन्तेज़ाम नहीं कर पाने वाले परिवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो माताओं व उनके बच्चों का पोषण स्वास्थ्य दिन ब दिन और ज़्यादा ख़राब होता जा रहा है.”

“ज़्यादा बच्चे बीमार हो रहे हैं और उनके परिवार, उनके लिये ज़रूरी इलाज का प्रबन्ध कर पाने में नाकाम हैं. खसरा और गम्भीर डायरिया जैसी बीमारियाँ फैलने से, स्थिति और ज़्यादा गम्भीर ही होगी.”

परिवारों के सामने निराशा भरी बेताबी

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) द्वारा कराए गए सर्वेक्षणों के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में, लगभग 95 प्रतिशत घरों व परिवारों को, पर्याप्त मात्रा में भोजन-पानी नहीं मिल पा रहा है, वयस्कों को ज़रूरत से कम मात्रा में भोजन खाकर काम चलाना पड़ रहा है, वो अपनी ख़ुराकें इसलिये बचा रहे हैं ताकि उनके बच्चों को भोजन मिल सके.

यूएन खाद्य एजेंसी की प्रतिनिधि का कहना था, “परिवारों के सामने दरपेश कठिन व हताशा वाले विकल्पों के बारे में हम बहुत चिन्तित हैं. अगर हम अभी सहायता मुहैया नहीं कराते हैं तो कुपोषण और ज़्यादा गम्भीर ही होगा. अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को वो धनराशि बहुत जल्द जारी करनी होगी, जिसके लिये उन्होंने कुछ सप्ताह पहले वादा किया था, नहीं तो मौजूदा स्थिति के प्रभावों के नतीजे पलटे नहीं जा सकेंगे.”

सूखा और कामकाज व रोज़गार

दोनों यूएन एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने हेरात में एक खाद्य वितरण केन्द्र का दौरा किया जहाँ उन्होंने ऐसे परिवारों से भी मुलाक़ात की जिन्हें, सूखा पड़ने और आमदनी वाले कामकाज व रोज़गार के अभाव में, भरपेट भोजन का इन्तेज़ाम करने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है.

उन्होंने देश के भीतर ही विस्थापित लोगों के लिये बनाई गई एक बस्ती का भी दौरा किया जहाँ सचल स्वास्थ्य केन्द्र और पोषण टीमें गठित की गई हैं जो महिलाओं व बच्चों को जीवनरक्षक सेवाएँ मुहैया करा रही हैं. इन सचल सुविधाओं को यूनीसेफ़ और विश्व खाद्य कार्यक्रम का समर्थन व सहायता मिल रहे हैं.

ये दो यूएन एजेंसियाँ इस तरह की 100 सचल स्वास्थ्य और पोषण टीमें और जोड़ रही हैं. पहले ही 168 ऐसी सचल टीमें, दुर्लभ इलाक़ों में महिलाओं व बच्चों को जीवनरक्षक सहायता मुहैया करा रही हैं.

जीवनरक्षक सहायता

वर्ष 2021 शुरू होने के बाद से, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने क़रीब 87 लाख लोगों को जीवनरक्षक खाद्य और पोषण सहायता मुहैया कराई है. इनमें लगभग चार लाख गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं में कुपोषण की रोकथाम व उपचार भी शामिल था.

साथ ही पाँच वर्ष से कम उम्र के सात लाख 90 हज़ार बच्चों को भी कुपोषण से बचाने वाली मदद मुहैया कराई गई है.

केवल सितम्बर महीने में ही लगभग 40 लाख लोगों तक पहुँच क़ायम की गई है. इनके अतिरिक्त, अत्यन्त गम्भीर कुपोषण के शिकार लगभग 2 लाख 10 हज़ार बच्चों को भी, यूनीसेफ़ समर्थित सेवाओं के ज़रिये जीवनरक्षक उपचार मुहैया कराया गया है.

पिछले आठ सप्ताहों के दौरान, यूनीसेफ़ के साझीदार संगठनों को, 42 हज़ार बच्चों के लिये तैयारशुदा व पोषण मुहैया कराने वाला भोजन, और पाँच हज़ार 200 बच्चों को, पौष्टिक दूध मुहैया कराया गया है.

 

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