सीरिया के डेराआ में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये जोखिम बढ़ा, यूएन एजेंसी

सीरिया संकट का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर ही पड़ा है.
UNICEF/Al-Faqir
सीरिया संकट का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर ही पड़ा है.

सीरिया के डेराआ में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये जोखिम बढ़ा, यूएन एजेंसी

प्रवासी और शरणार्थी

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये संयुक्त राष्ट्र की राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) ने रविवार को आगाह करते हुए कहा है कि सीरिया के दक्षिणी इलाक़े में, एजेंसी के साथ पंजीकृत लगभग 30 हज़ार फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये, हाल के समय में हुई लड़ाई के कारण, बहुत कमज़ोर हालात बन रहे हैं. ये हालात, डेराआ गवर्रनरेट और उसके आसपास हाल के समय में हुई लड़ाई के कारण उत्पन्न हुए हैं.

यूएन एजेंसी के अनुसार, 29 जुलाई के बाद से, भारी गोलाबारी और लड़ाई के कारण, अनेक लोग हताहत हुए हैं और सैकड़ों परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है.

संयुक्त राष्ट्र की ये एजेंसी (UNRWA), 1948 में हुए अरब-इसराइली संघर्ष के बाद स्थापित की गई थी. सीरिया में मौजूदा संघर्ष शुरू होने से पहले, लगभग एक तिहाई फ़लस्तीनी शरणार्थी, डेराआ शिविर इलाक़े में रहा करते थे.

यूएन एजेंसी ने कहा है कि हाल के समय में, कुछ फ़लस्तीनी शरणार्थी, कोई अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण, डेराआ शिविर में वापिस लौट आए हैं. अलबत्ता, मौजूदा लड़ाई और अशान्त हालात ने, बहुत कमज़ोर हालात में रहने वाले समुदायों तक, एजेंसी द्वारा अति महत्वपूर्ण सहायता पहुँचाने की क्षमता बड़े पैमाने पर घटाई है. 

ख़तरनाक मानवीय परिस्थितियाँ

एजेंसी ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि 600 से ज़्यादा फ़लस्तीनी शरणार्थी परिवार (लगभग 3000 हज़ार लोग), इस समय शिविर इलाक़े में रह रहे हैं, जिनमें लगभग आधे परिवार शिविर के भीतर हैं जो हाल की लड़ाई के कारण विस्थापित हुए हैं. शिविर के भीतर बचे शरणार्थी परिवारों के लिये हालात बहुत ख़तरनाक हो गए हैं.

दवाइयाँ और खाद्य पदार्थों के भण्डारों पर, 2 अगस्त के बाद से बहुत भारी बोझ है क्योंकि उससे पहले 30 जुलाई को, सराया सीमा चौकी को बन्द कर दिया गया था जहाँ से मानवीय सहायता सामग्री देश के भीतर दाख़िल हो रही थी. 

शिविर के अन्दर, पानी और बिजली आपूर्ति भी पूरी तरह से ठप हो गई बताई गई है.

बढ़ती मानवीय ज़रूरतें

यूएन एजेंसी के अनुसार, इन हालात में, खाद्य पदार्थों और अन्य सामान की आपात मांग में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है. साथ ही, विस्थापित परिवारों के लिये, विस्फोटक सामग्री के अवशेषों की मौजूदगी से दूषण के बढ़ते जोखिम के कारण, मानवीय सहायता की ज़रूरतें बहुत ज़्यादा बढ़ गई हैं.

यूएन एजेंसी ने ध्यान दिलाया है कि इन परिवारों को अक्सर अपने सम्बन्धियों के साथ, सचल रहना पड़ता है जिससे उनकी तकलीफ़ें और मुश्किलें बढ़ने के साथ-साथ, कोविड-19 के फैलाव का ख़तरा भी जुड़ा हुआ है. 

बहुत से परिवारों को अपने घरों का किराया अदा करने में कठिनाई हो रही है और बहुत से परिवारों को ऐसे घरों में रहने में मुश्किलें पेश आ रही हैं जो, एक दशक के गृहयुद्ध के दौरान, ध्वस्त हो गए हैं.

यूएन एजेंसी ने कहा है कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों को, डेराआ शिविर से बाहर निकालने और उन्हें एजेंसी की सेवाओं का फ़ायदा पहुँचाने की क्षमता गम्भीर रूप से प्रभावित हुई है, डेराआ शहर में, खाद्य सामग्री और नक़दी जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सीमित हुई हैं. 

हाल के समय में हुई लड़ाई के कारण, बच्चों को स्कूली शिक्षा के लिये भेजे जाने की तैयारी करने के काम में भी देरी हुई है. 

एजेंसी ने डेराआ गवर्नरेट में काम कर रहे उसके स्टाफ़ की सुरक्षा के बारे में भी चिन्ता व्यक्त की है.

निर्बाध सहायता उपलब्धता की पुकार

यूएन एजेंसी ने संघर्ष से सम्बद्ध तमाम पक्षों का आहवान किया है कि वो इलाक़े में मानवीय सहायता निर्बाध रूप से पहुँचाने के लिये अनुकूल माहाल बनाएँ. जिसमें एजेंसी की सेवाओं तक, फ़लस्तीनी शरणार्थियों की पहुँच आसान बनाया जाना भी शामिल है.

एजेंसी ने कहा है कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिये बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिये, सराया सीमा चौकी को खुला रखा जाना बहुत ज़रूरी है, जहाँ से लोग व ज़रूरी सामान गुज़रते हैं.

एजेंसी के अनुसार, सभी पक्षों को, आम लोगों और सिविल बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी जिसमें डेराआ गवर्नरेट में यूएन एजेंसी की संस्थाएँ और ढाँचा भी शामिल हैं.