हिरोशिमा: परमाणु शस्त्र उन्मूलन के लिये, धीमी प्रगति पर गहरा क्षोभ

परमाणु बम गिराए जाने के बाद झुलसा देने वाली आग से बचने का प्रयास करते घायल लोग.
UN Photo/Yoshito Matsushige
परमाणु बम गिराए जाने के बाद झुलसा देने वाली आग से बचने का प्रयास करते घायल लोग.

हिरोशिमा: परमाणु शस्त्र उन्मूलन के लिये, धीमी प्रगति पर गहरा क्षोभ

शांति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने, एक परमाणु मुक्त विश्व की प्राप्ति में, इस विश्व संगठन के संकल्प को रेखांकित करते हुए, तमाम देशों की सरकारों से, इस लक्ष्य को एक वास्तविकता बनाने की ख़ातिर, प्रयास मज़बूत करने का आग्रह किया है. 

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यूएन महासचिव ने जापान में हिरोशिमा शान्ति स्मारक को दिए एक वीडियो सन्देश में कहा, “परमाणु शस्त्रों का इस्तेमाल नहीं होने देने की पूर्ण गारण्टी, परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन कर दिये जाने में ही निहित है.”

इस वार्षिक स्मृति बैठक में, 6 अगस्त 1945 को, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा पर, अमेरिका द्वारा किये गए परमाणु हमले को याद किया जाता है. यूएन प्रमुख ने भी उस परमाणु बम हमले के प्रभावों को फिर याद किया.

उन्होंने कहा, “76 वर्ष पहले, इस दिन, केवल एक परमाणु शस्त्र ने, शहर के लोगों के लिये अकल्पनीय तकलीफ़ें उत्पन्न कर दी थीं, हज़ारों-लाखों लोगों को पल भर में मौत के मुँह में धकेल दिया था, और लाखों अन्य, बाद के समय में, काल के मुँह में समा गए, और आने वाले वर्षों में भी ये सिलसिला चलता रहा.”

एक साझा दृष्टिकोण

यूएन प्रमुख ने कहा कि इसके बावजूद, हिरोशिमा, केवल, अपने ऊपर टूटी उस तबाही से परिभाषित नहीं होता है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि हिरोशिमा परमाणु बम हमले में जीवित बचे लोगों द्वारा परमाणु निरस्त्रीकरण के लिये शुरू किये गए अभियान – हिबाकुशा, मानव हौसले और आत्मबल का जीता-जागता उदाहरण और सबूत है.”

“उन्होंने अपने अनुभव बाँटने और ये सुनिश्चित करने के लिये, अपने जीवन समर्पित कर दिये हैं कि किसी अन्य इनसान को, उन्हीं की तरह तकलीफ़ों का सामना नहीं करना पड़े.”

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, दुनिया को परमाणु मुक्त बनाने के मामले में, हिबाकुशा के दृष्टिकोण से पूर्ण रूप से सहमत है. यही विषय, संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रथम पारित प्रस्ताव था जो, हिरोशिमा पर परमाणु  बम हमले के पाँच महीने बाद पारित किया गया था.

ध्यान रहे कि परमाणु शस्त्रों पर प्रतिबन्ध लगाने की हिमायत करने वाली सन्धि, जनवरी 2021 में ही लागू हुई है.

यूएन महासचिव ने अलबत्ता, एक परमाणु मुक्त विश्व का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में, ठोस प्रगति नहीं होने पर, गहरी चिन्ता भी व्यक्त की.

स्वागत योग्य क़दम

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “परमाणु हथियार सम्पन्न देश, हाल के वर्षों में, अपने शस्त्रों को आधुनिक बनाते रहे हैं, जिससे एक नई परमाणु दौड़ शुरू हो गई है.” 

“मगर, रूसी महासंघ और अमेरिका द्वारा एक नई START सन्धि को आगे बढ़ाने का फ़ैसला करना व शस्त्र नियंत्रण पर सम्वाद को आगे बढ़ाया जाना, परमाणु आपदा के जोखिम को कम करने की दिशा में स्वागत योग्य पहले क़दम हैं.”

यूएन महासचिव ने परमाणु सम्पन्न तमाम देशों, से जोखिम कम किये जाने के उपाय सुनिश्चित किये जाने का आहवान किया... हम परमाणु शस्त्रों के प्रयोग के ख़िलाफ़ बनाए गए नियमों की अनदेखी को कभी हल्के में नहीं ले सकते.

उन्होंने तमाम देशों की सरकारों से, एक परमाणु मुक्त विश्व के लिये अपने संकल्प मज़बूत करने की ख़ातिर, परमाणु अप्रसार सन्धि पर, दसवें समीक्षा सम्मेलन का इस्तेमाल करने के भी आग्रह किया.

यह सम्मेलन, मूल रूप में अप्रैल 2020 में होना था, मगर कोविड-19 महामारी शुरू हो जाने के कारण स्थगित कर दिया गया. अब ये सम्मेलन, फ़रवरी 2020 तक हो जाना प्रस्तावित है.