बेरूत विस्फोट का एक वर्ष - सहायता का संकल्प लिये जाने का अवसर

लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन की टीम विस्फोट से हुई तबाही का आकलन करते हुए.
UN/Pasqual Gorriz
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन की टीम विस्फोट से हुई तबाही का आकलन करते हुए.

बेरूत विस्फोट का एक वर्ष - सहायता का संकल्प लिये जाने का अवसर

मानवीय सहायता

लेबनान की राजधानी बेरूत में भीषण धमाकों से हुई व्यापक बर्बादी के एक वर्ष पूरा होने के बाद, पीड़ितों के लिये समर्थन जुटाने के इरादे से, बुधवार को एक सम्मेलन आयोजित किया गया. संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने अपने सम्बोधन में, इस आयोजन को देश की बेहतरी के लिये नए सिरे से संकल्प लिये जाने और मानवीय तबाही की रोकथाम करने का अवसर बताया है.

संयुक्त राष्ट्र और फ़्रांस ने मिलकर बुधवार को लेबनान की जनता के समर्थन में 35 करोड़ डॉलर जुटाने के उद्देश्य से एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया.

4 अगस्त 2020 को लेबनान की राजधानी बेरूत के बन्दरगाह पर हुए भीषण धमाके में, 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और हज़ारों अन्य के घायल होने के अलावा, हज़ारों ही लोग बेघर हो गए.

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इस घटना के एक वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में लोग ज़रूरतमन्द हैं, जिन तक सहायता पहुँचाने के लिये, यह सम्मेलन आयोजित किया गया है. 

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना मोहम्मद ने वर्चुअल बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा, “12 महीने बाद, हमारी सम्वेदनाएँ पीड़ितों के परिवारजनों, जीवित बच गए लोगों और सभी प्रभावितों के साथ हैं.”  

यूएन की वरिष्ठ अधिकारी ने घटना की एक निष्पक्ष, विस्तृत और पारदर्शी जाँच कराए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

बताया गया है कि लेबनान अपने हाल के इतिहास में सबसे ख़राब संकटों में से एक का सामना कर रहा है.

राजनैतिक अस्थिरता और बदहाल अर्थव्यवस्था के बीच गम्भीर रूप से ज़रूरतमन्द लोगों की संख्या बढ़ रही है, और लेबनान के आधे से अधिक लोग अब निर्धनता में जीवन गुज़ार रहे हैं. 

लेबनान में बड़ी संख्या में सीरियाई और फ़लस्तीनी शरणार्थी भी रहते हैं, और स्थानीय परिवारों व अन्य प्रवासियों के साथ-साथ, उनकी ज़रूरतें पूरा किये जाने के लिये आपात सहायता की आवश्यकता है.

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण देश की स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ और भी बढ़ गया है और स्वास्थ्य संकट की वजह से अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है. 

यूएन की उप प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि लेबनान में पिछले एक साल से कोई सरकार नहीं है. उन्होंने प्रधानमंत्री के लिये नामित नजीब मिकाती के नेतृत्व में प्रशासन के जल्द गठन की उम्मीद जताई है. 

“लेबनान के लोग मज़बूत संस्थाओं के हक़दार हैं, जिनके ज़रिये उन्हें राहत व न्याय मिल सके और उनके कष्टों का निवारण हो सके – एक राष्ट्रीय हित वाली सरकार जो सुधारों के महत्वाकांक्षी मार्ग पर बढ़ सके और स्थिरता, प्रगति व एक लोकतांत्रिक भविष्य की सम्भावनाओं को बहाल कर सके, जिसमें लेबनान की युवा महिलाओं व पुरुषों की पूर्ण सम्भावनाओं को साकार किया जा सके.”

राहत प्रयासों पर ज़ोर 

यूएन की वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक़, संयुक्त राष्ट्र व साझीदार सगंठनों ने, विस्फोटों के बाद की परिस्थितियों में लेबनान को समर्थन दिया है. 

इन प्रयासों के तहत, आपात राहत को संगठित करना, जल आपूर्ति को स्थापित करना, और अस्पतालों व स्कूलों में अति आवश्यक मरम्मत के काम को पूरा करना है. 

लेबनान में जल आपूर्ति प्रणाली ध्वस्त होने के कगार पर है.
© UNICEF/Fouad Choufany
लेबनान में जल आपूर्ति प्रणाली ध्वस्त होने के कगार पर है.

आमिना जे मोहम्मद ने बताया कि दानदाताओं के समर्थन से और बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि केवल आपात राहत प्रयासों से ही यह संकट नहीं सुलझाया जा सकता. 

इसके लिये दीर्घकालीन पुनर्बहाली की आवश्यकता है और इस प्रक्रिया के दौरान टिकाऊ विकास पर ज़ोर देना होगा. 

यूएन उप प्रमुख ने लेबनान में एक मज़बूत, समावेशी व व्यापक सामाजिक संरक्षा व्यवस्था पर बल दिया है, जिसके ज़रिये सबसे निर्बलों को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है.

उन्होंने कहा कि देश को समावेशी आर्थिक प्रगति, शिष्ट व उपयुक्त रोज़गार और सामाजिक स्थिरता के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा. 

उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह सम्मेलन, लेबनान की जनता के लिये मज़बूत वैश्विक समर्थन को प्रदर्शित करता है, और संयुक्त राष्ट्र, भविष्य में भी देश के साथ खड़ा रहेगा व पुनर्बहाली प्रक्रिया को समर्थन देता रहेगा.