अफ़्रीकी मूल के लोगों का नया स्थाई फ़ोरम - जनरल असेम्बली में प्रस्ताव पारित
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सदियों से नस्लवाद, नस्लभेद और दासता से पीड़ित रहे अफ़्रीकी मूल के लोगों के जीवन में बेहतरी लाने पर केन्द्रित एक नए मंच की स्थापना की है.
193 सदस्य देशों वाली यूएन महासभा में वर्षों तक चली मंत्रणाओं के बाद,सोमवार को एकमत से प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत अफ़्रीकी मूल के लोगों का संयुक्त राष्ट्र स्थाई फ़ोरम स्थापित किया गया है.
यह 10 सदस्यों वाला एक परामर्शदाता निकाय है, जो कि जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद के साथ नज़दीकी तौर पर कार्य करेगा. नए फ़ोरम को अफ़्रीकी मूल के लोगों व अन्य पक्षकारों के लिये सलाह-मशविरे की एक व्यवस्था क़रार दिया गया है.
बताया गया है कि इसके ज़रिये अफ़्रीकी मूल के लोगों के अधिकारों के पूर्ण सम्मान व उन्हें बढ़ावा दिये जाने के लिये, क़ानूनी रूप से बाध्यकारी एक औज़ार की दिशा में पहला क़दम उठाया गया है.
स्थाई फ़ोरम के ढाँचे पर, नवम्बर 2014 से विचार-विमर्श हो रहा था, जब यूएन महासभा ने आधिकारिक रूप से ‘अफ़्रीकी मूल के लोगों के अन्तरराष्ट्रीय दशक’ (2015-2024) की शुरुआत की थी.
सोमवार को पारित प्रस्ताव में नए निकाय के शासनादेश (Mandate) का विवरण दिया गया है. इसके ज़रिये, यूएन महासभा ने दुनिया भर में नस्लवादी चरमपंथी अभियानों के फैलाव पर गहरी चिन्ता जताई है.
साथ ही, मौजूदा दौर में जारी व उभार लेते नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, विदेशियों के प्रति नापसन्दगी व डर और उससे उपजने वाली असहिष्णुता की भर्त्सना की है.
मानवाधिकार परिषद ने कुछ ही दिन पहले, अफ़्रीकी मूल के लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस के कामकाज में व्यवस्थागत नस्लभेद के मामलों की जाँच के लिये विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया था.
वर्ष 2020 में अमेरिका में एक पुलिस अधिकारी के हाथों, एक काले व्यक्ति जियॉर्ज फ़्लॉयड की हत्या हो जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने एक रिपोर्ट पेश की थी जिसके बाद यह क़दम उठाया गया है.

मानवाधिकार मामलों की यूएन प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने इस रिपोर्ट में और अन्य सार्वजनिक वक्तव्यों में, अफ़्रीकी मूल के लोगों के लिये गहराती विषमताओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया है.
इस क्रम में, उन्होंने अनेक देशों में सामाजिक-आर्थिक व राजनैतिक क्षेत्र में अफ़्रीकी व अफ़्रीकी मूल के लोगों के हाशिये पर रहने पर चिन्ता जताई थी.
रिपोर्ट बताती है कि किसी भी सदस्य देश ने अतीत के दौर में या व्यवस्थागत नस्लवाद के मौजूदा असर का व्यापक रूप से आकलन नहीं किया है.
इसके मद्देनज़र, अफ़्रीकी मूल के लोगों के विरुद्ध हिंसा का मुक़ाबला करने के लिये एक रूपान्तरकारी एजेण्डा की पुकार लगाई गई है.
विशेषज्ञ परामर्श
अफ़्रीकी मूल के लोगों के स्थाई फ़ोरम में, सरकारों द्वारा नामित और फिर जनरल असेम्बली द्वारा निर्वाचित पाँच सदस्य होंगे,
पाँच अन्य सदस्यों की नियुक्ति मानवाधिकार परिषद करेगी.
यह फ़ोरम, अफ़्रीकी मूल के लोगों के लिये, आर्थिक, राजनैतिक व सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिये प्रयास करेगा. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनके साथ समान नागरिकों जैसा बर्ताव हो और उनके मानवाधिकारों का पूर्ण रूप से ख़याल रखा जाए.
यह फ़ोरम, मानवाधिकार परिषद, महासभा की मुख्य समितियों और उन विभिन्न यूएन संस्थाओं को विशेषज्ञ परामर्श व अनुशंसाएँ पेश करेगा, जो कि नस्लीय भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर कार्य कर रही हैं.
इसके अतिरिक्त, अन्तरराष्ट्रीय दशक के तहत आयोजित गतिविधियों की प्रगति पर नज़र रखी जाएगी और सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीक़े जुटाए जाएंगे.
स्थाई फ़ोरम का पहला सत्र वर्ष 2022 में होगा, जिसके बाद वार्षिक सत्र बारी-बारी से जिनीवा और न्यूयॉर्क में आयोजित कराए जाने की योजना है.