बाल कुपोषण के उन्मूलन के लिये स्तनपान है बेहद अहम – यूएन

2 अगस्त 2021

संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने देशों की सरकारों से स्तनपान को बढ़ावा देने के लिये ज़रूरी माहौल बनाने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि कुपोषण के विरुद्ध वैश्विक प्रगति में तेज़ी लाने के लिये इस वर्ष के लिये गए संकल्पों के अनुरूप कार्रवाई की जानी होगी. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक हैनरीएटा फ़ोर और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने 7 अगस्त तक चलने वाले ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ के अवसर पर सोमवार को एक साझा बयान जारी किया है.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि सरकारें, दानदाता, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र ने एक साथ आकर,  ‘Nutrition for Growth Year of Action’ नामक पहल शुरू की थी. 

इसका उद्देश्य बच्चों के समुचित विकास के लिये कार्रवाई वर्ष को आगे ले जाना है.

इस पहल को एक ऐसा ऐतिहासिक अवसर क़रार दिया गया है जिससे बाल कुपोषण के उन्मूलन के लिये वैश्विक संकल्प को पूरा किया जा सकता है. 

यूएन एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने कहा, “स्तनपान, इस संकल्प को साकार करने के केन्द्र में है.”

“जन्म के पहले ही घण्टे में स्तनपान शुरू कराना, उसके बाद छह महीनों तक सिर्फ़ स्तनपान कराना, और दो सालों या उससे भी ज़्यादा समय तक स्तनपान कराना, नाटेपन और मोटापे सहित बाल कुपोषण के सभी रूपों के विरुद्ध शक्तिशाली रक्षा कवच है.”

“स्तनपान बच्चों की पहली वैक्सीन के रूप में भी कार्य करता है, और उन्हें बचपन की अनेक आम बीमारियों से बचाता है.”

महामारी से प्रगति पर जोखिम

यूएन एजेंसियों के मुताबिक़ महज़ स्तनपान कराए जाने में, पिछले चार दशकों में 50 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है, कोविड महामारी से इस क्षेत्र में हुई प्रगति पर ख़तरा मण्डरा रहा है. 

अनेक देशों में, मौजूदा स्वास्थ्य संकट के कारण स्तनपान समर्थन सेवाओं में व्यवधान आया है, और खाद्य असुरक्षा व कुपोषण का जोखिम बढ़ा है.

बहुत से देशों में बच्चों के लिये भोजन बनाने वाली कम्पनियों की वजह से ये जोखिम और बढ़े हैं.

ऐसे निराधार दावे किये गए हैं कि स्तनपान से कोविड-19 का फैलाव हो सकता है, और इसलिये कम्पनियों के उत्पाद एक सुरक्षित विकल्प हैं.

यूएन एजेंसियों के संयुक्त बयान में रेखांकित किया गया है कि ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ इस वर्ष की शुरुआत में लिये गए संकल्पों की समीक्षा करने का एक अवसर है. 

साथ ही, इस क्रम में महिलाओं व शिशुओं के लिये स्तनपान-अनुकूल माहौल के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी होगी. 

इस सम्बन्ध में कार्रवाई के तहत, स्तनपान के एवज़ में दिये जाने वाले उत्पादों की मार्केटिंग के लिये अन्तरराष्ट्रीय कोड, पूर्ण रूप से लागू किया जाना होगा. 

इस कोड का उद्देश्य, शिशुओं के लिये भोजन तैयार करने वाली कम्पनियों के आक्रामक प्रचार तरीक़ों से, माताओं का बचाव करना है.  

स्मार्ट निवेश व संकल्प

बताया गया है कि स्वास्थ्यकर्मियों के पास भी संसाधनों व सूचनाओं का होना अहम है, ताकि माताओं को स्तनपान के लिये ज़रूरी समर्थन मुहैया कराया जा सके.

इस बीच, नियोक्ताओं (Employers) को यह सुनिश्चित करना होगा कि माताओं के पास अपने शिशुओं को स्तनपान कराने के लिये पर्याप्त समय व स्थान हैं. 

इसके तहत, वैतनिक अभिभावक अवकाश, दीर्घकालीन मातृत्व अवकाश, स्तनपान के लिये कार्यस्थल पर सुरक्षित स्थान, गुणवत्तापरक बाल देखभाल व्यवस्था और सार्वभौमिक बाल लाभ योजनाओं सहित अन्य उपाय हैं.

यूएन अधिकारियों ने न्यूयॉर्क में सितम्बर में होने वाली खाद्य प्रणाली शिखर बैठक से पहले, स्मार्ट निवेशों व संकल्पों की पुकार लगाई है ताकि वैश्विक कुपोषण के संकट का मुक़ाबला किया जा सके. 

मज़बूत नीतियों, कार्यक्रमों व कार्रवाई के ज़रिये स्तनपान की रक्षा, उसे बढ़ावा व समर्थन देना इन्हीं प्रयासों का हिस्सा है. 

यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि यह समय महत्वाकांक्षाओं में कमी लाने का नहीं है, बल्कि यह समय ऊँचे लक्ष्य स्थापित करने का है. 

 

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