मरुस्थलीकरण और सूखा – मानव कल्याण के लिये ख़तरा

वर्ष 2021 में ‘पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्बहाली के लिये यूएन दशक’ की शुरुआत हुई है.
© FAO/Giulio Napolitano
वर्ष 2021 में ‘पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्बहाली के लिये यूएन दशक’ की शुरुआत हुई है.

मरुस्थलीकरण और सूखा – मानव कल्याण के लिये ख़तरा

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चिन्ता जताई है कि मानवता ने प्रकृति के विरुद्ध एक आत्मघाती, निर्मम युद्ध छेड़ा हुआ है जिसे रोका जाना होगा. उन्होंने गुरुवार, 17 जून, को मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण हुए भूमि क्षरण और कृषि, शहरों व बुनियादी ढाँचे के विस्तार से, तीन अरब से अधिक लोगों के जीवन व आजीविका के लिये चुनौती खड़ी हो गई है. 

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महासचिव ने इस दिवस पर जारी अपने सन्देश में कहा, “जैवविविधता घट रही है, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ रहे हैं, और दूरदराज़ के द्वीपों से लेकर उच्चतम चोटियों पर प्रदूषण को देखा जा सकता है.”

“हमें प्रकृति के साथ शान्ति स्थापित करनी होगी.”

संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी ने कहा कि भूमि हमारी सबसे बड़ी साथी हो सकती है, मगर फ़िलहाल यह पीड़ा में है.   

“भूमि क्षरण से जैवविविधता को नुक़सान हो रहा है और कोविड-19 जैसी संक्रामक बीमारियों को उभरने के लिये बल मिल रहा है.”

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि क्षरित भूमि को फिर से बहाल करने से, वातावरण से कार्बन को दूर करने में मदद मिलेगी, और निर्बल समुदायों के लिये जलवायु सहनक्षमता का निर्माण किया जा सकेगा.

इससे हर वर्ष कृषि उत्पादन में 1.4 ट्रिलियन डॉलर की कमाई की जा सकती है. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि भूमि की बहाली, एक सरल, सस्ता और सर्वजन के लिये सुलभ उपाय होगा.

साथ ही, टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा की दिशा में प्रगति को तेज़ करने का सबसे लोकतांत्रिक और निर्धन समुदायों के हितों को ध्यान में रखने वाले तरीक़ा भी.  

पारिस्थितिकी तंत्रो की सुरक्षा

विश्व आबादी बढ़ने के साथ-साथ भोजन, कच्चे माल, सड़कों, घरों सहित अन्य ज़रूरतें लगातार बढ़ रही हैं.

इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये मानवता ने हमेशा जमी रहने वाली भूमि से इतर, पृथ्वी की सतह के लगभग तीन चौथाई हिस्से को बदल कर रख दिया है.

उपजाऊ भूमि व पारिस्थितिकी तंत्रों की हानि को रोकने, उसकी रफ़्तार धीमी करने और सुधार के उपायों को तात्कालिक रूप से अपनाया जाना बेहद महत्वपूर्ण है.  

साथ ही, यह कोविड-19 महामारी से त्वरित ढँग से उबरने के लिये भी अहम है ताकि आमजन व पृथ्वी की दीर्घकाल में रक्षा सुनिश्चित की जा सके.   

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक क्षरित भूमि को बहाल करने से आर्थिक सहनक्षमता हासिल होगी, रोज़गारो का सृजन होगा, आय में इज़ाफ़ा होगा, और खाद्य सुरक्षा भी मज़बूत होगी. 

इसके अलावा, जैवविविधता को फिर से फलने-फूलने में भी मदद मिलेगी, कार्बन सोखे जाने की क्षमता विकसित होगी, जलवायु परिवर्तन के असर को कम करते हुए, कोविड-19 महामारी से हरित पुनर्बहाली को एक मज़बूत आधार प्रदान किया जा सकेगा. 

यूएन प्रमुख ने कहा कि इस वर्ष, ‘पारिस्थितिकी तंत्रों की पुनर्बहाली के लिये यूएन दशक’ की शुरुआत हुई है, और इसे ध्यान में रखते हुए, स्वस्थ भूमि को हमारी सभी योजनाओं के केन्द्र में रखना होगा.