यूएन प्रमुख की, मध्य पूर्व में लड़ाई व हिंसा तत्काल रोके जाने की पुकार

16 मई 2021

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने रविवार को सुरक्षा परिषद की एक बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा है कि मध्य पूर्व में इसराइल और फ़लस्तीन के बीच मौजूदा हिंसा तत्काल रोकी जानी होगी. 

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच ग़ाज़ा में लड़ाई को अत्यन्त दर्दनाक और क्रूर क़रार देते हुए आगाह करने के सुर में कहा कि फ़लस्तीनियों और इसराइलियों के बीच सहअस्तित्व व शान्ति क़ायम होने की उम्मीदें, क्षितिज से और भी परे धकेली जा रही हैं. 

उन्होंने सुरक्षा परिषद को सन्देश में कहा, “लड़ाई तुरन्त बन्द करनी होगी. इसे तत्काल रोका जाना होगा.

एक तरफ़ से रॉकेट और मोर्टार हमले, और दूसरी तरफ़ से हवाई हमले और तोपख़ानों की बमबारी तुरन्त रोकने होंगे. मैं सभी पक्षों से, ये पुकार सुने जाने की अपील करता हूँ.”

इसराइल और ग़ाज़ा के बीच हाल के वर्षों में बेहद गम्भीर तनाव और हिंसा भड़कने के मौजूदा संकट पर विचार करने के लिये बुलाई गई, सुरक्षा परिषद की इस विशेष बैठक में, अनेक देशों के विदेश मंत्रियों और राजदूतों ने शिरकत की. 

इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किये हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों – पश्चिमी तट और पूर्वी येरूशेलम में भी लडाई भड़कने की ख़बरें हैं.

पूरे क्षेत्र पर जोखिम

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भय व्यक्त करते हुए कहा कि इस हिंसा के दूरगामी और विनाशकारी परिणाम होने की आशंका है.

उन्होंने कहा, “इस लड़ाई के परिणामस्वरूप, इसराइली और फ़लस्तीनी – दोनों ही पक्षों के, हिंसा के एक कुचक्र में फँसने का अन्देशा है जिसके दोनों पक्षों और सम्पूर्ण क्षेत्र के लिये बहुत विनाशकारी परिणाम होंगे.”

“इस लड़ाई में, एक ऐसा सुरक्षा व मानवीय संकट भड़काने की सम्भावना मौजूद है जिसे रोकना बहुत मुश्किल होगा और जिससे अतिवाद को और भी बढ़ावा मिल सकता है, ना केवल इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किये हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों और इसराइल में, बल्कि सम्पूर्ण मध्य पूर्व क्षेत्र में. इस सबसे एक ख़तरनाक अस्थिरता का नया काल शुरू हो सकता है.”

यूएन प्रमुख ने ज़ोर दिया कि आगे बढ़ने का एक मात्रा रास्ता, दो राष्ट्रों पर केन्द्रित समाधान के लिये बातचीत की तरफ़ लौटना ही है, मगर मौजूदा लड़ाई, इस लक्ष्य को और भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण बना रही है.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र का ये संकल्प दोहराया कि ये विश्व संगठन, दीर्घकालीन और न्यायसंगत शान्ति स्थापना के लिये, इसराइल और फ़लस्तीनियों, और अन्तरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय साझीदारों के साथ मिलकर काम करता रहेगा.

उन्होंने कहा, “रक्तपात, आतंक व और विनाश का ये निर्मम व मूर्खतापूर्ण चक्र तत्काल बन्द करना होगा.”

मृत्यु, विस्थापन और विनाश

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत टॉर वैनेसलैण्ड ने, इसराइली रक्षा सेनाओं और ग़ाज़ा में फ़लस्तीनी सशस्त्र गुटों के बीच घातक तनाव वृद्धि की मानवीय क़ीमत का ख़ाका पेश किया.

गाज़ा पट्टी में इसराइली हमले में क्षतिग्रस्त घर से सामान निकालता एक फ़लस्तीनी किशोर.(फ़ाइल फ़ोटो)
UN Photo/Shareef Sarhan
गाज़ा पट्टी में इसराइली हमले में क्षतिग्रस्त घर से सामान निकालता एक फ़लस्तीनी किशोर.(फ़ाइल फ़ोटो)

आरम्भिक ख़बरों से मालूम होता है कि लगभग 181 फ़लस्तीनियों व 9 इसराइलियों की मौत हुई है, जबकि ग़ाज़ा में स्वास्थ्य अधिकारियों की ख़बरों के अनुसार, लगभग 1200 लोग घायल हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने कहा कि घनी आबादी वाले ग़ाज़ा इलाक़े में, मानवीय और सुरक्षा स्थिति, दिन ब दिन और भी ज़्यादी घातक होती जा रही है. 

कमज़ोर स्वास्थ्य व्यवस्था, पहले से ही दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की क़िल्लत और कोविड-19 महामारी के कारण, बहुत बोझ का सामना कर रही हैं.

इसके अतिरिक्त, तक़रीबन 34 हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, और संयुक्त राष्ट्र की पुनरवास कार्य एजेंसी - UNRWA द्वारा संचालित 40 ज़्यादा स्कूलों को अब आश्रय स्थलों के रूप में प्रयोग किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, “सैन्य अभियानों के परिणामस्वरूप, 7 फ़ैक्टरियाँ, 40 स्कूल और कम से कम चार अस्पताल, आंशिक या पूर्ण रूप से तबाह हो गए हैं.”

“कम से कम 18 इमारतें ध्वस्त कर दी गई हैं जिनमें 4 बहुमंज़िला इमारतें भी हैं. इनमें से एक बहुमंज़िला इमारत में अन्तरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के कार्यालय थे. इनके अलावा 350 इमारतों को भी नुक़सान पहुँचा. है. इसराइली रक्षा सेनाओं के अनुसार, इन इमारतों से हमास की सैन्य गतिविधियाँ संचालित होती थीं.”

विशेष दूत ने यूएन प्रमुख की आवाज़ से आवाज़ मिलाते हुए, तत्काल हिंसा बन्द करने की पुकार दोहराई. उन्होंने ये भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र शान्ति बहाल करने के लिये सभी पक्षों के साथ मिलकर अथक काम कर रहा है.

“इसराइलियों और फ़लस्तीनियों को, आत्मरक्षा और सुरक्षा का वैध अधिकार हासिल है. हम अब जो हिंसा देख रहे हैं, वो अस्वीकार्य और बिल्कुल ग़लत है.”

फ़लस्तीन

पर्यवेक्षक देश का दर्जा प्राप्त फ़लस्तीन के विदेश मामलों के मंत्री रियाद अल मलकी ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “जिस अन्तरराष्ट्रीय सहमति को आकार देने और उसकी हिमायत करने में आपने मदद की है, वो आपकी आँखों के सामने तबाह की जा रही है. इसराइल ने जो रास्ता चुना है वो है अपार्थाइड यानि रंगभेद. जी हाँ रंगभेद. और जल्द ही, एक दिन, ये परिषद भी, इस वास्तविकता को नहीं नकार सकेगी. हमारे लोगों, हमारे घरों और हमारी ज़मीन पर आक्रमण व हमले रोकने के लिये, अभी कार्रवाई करें. रंगभेद के बजाय, स्वतंत्रता क़ायम रखने के लिये, अभी कार्रवाई करें.”

फ़लस्तीनी विदेश मंत्री ने कहा, “हमार लोग, अपने अधिकार छिनवाने के लिये कभी भी समर्पण नहीं करेंगे. शान्ति के लिये, एक मात्र रास्ता फ़लस्तीनी स्वतंत्रता है. शान्ति स्थापना, इस परिषद की ज़िम्मेदारी है, आपकी परिषद की. फ़लस्तीनी स्वतंत्रता हासिल करने में मदद करना, इस परिषद का क़ानूनी और नैतिक कर्तव्य है.”

इसराइल

संयुक्त राष्ट्र के लिये इसराइल के स्थाई प्रतिनिधि गिलाद ऐर्दान ने सुरक्षा परिषद की इस बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा, “आप हमास के अंधाधुंध और इकतरफ़ा हमलों की, बिना किसी झिझक निन्दा कर सकते हैं जिनसे इसराइलियों और फ़लस्तीनियों दोनों को ही समान रूप से जोखिम है. आप आत्मरक्षा के साहसिक प्रयासों के लिये और हमास के आतंकी ढाँचे को तहस-नहस करने के लिये, इसराइल का समर्थन करने का रास्ता चुन सकते हैं. जबकि इसराइल दोनों तरफ़ हताहतों की संख्या कम से कम रखने के लिये यथासम्भव ऐहतियात बरत रहा है.”

इसराइली स्थाई प्रतिनिधि ने कहा, “आप, ग़ाज़ा पट्टी का विसैन्यीकरण करने की माँग करके एक अधिक शान्तिपूर्ण भविष्य को समर्थन देने और ग़ाज़ा में एक ऐसे प्रशासन पर ज़ोर देने का रास्ता अपना सकते हैं जो ग़ाज़ा के लोगों के कल्याण के लिये संसाधन निवेश करे, नाकि इसराइल देश की तबाही पर ध्यान दे. इसराइल ने पहले ही अपना विकल्प चुन लिया है. हम अपने लोगों की सुरक्षा के लिये सभी आवश्यक उपाय करेंगे. अब पसन्द आपकी है. दुनिया देख रही है.”

भारत

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरूमूर्ति ने सुरक्षा परिषद की इस बैठक में, एक न्यायसंगत फ़लस्तीनी मुद्दे और इसराइल व फ़लस्तीन के रूप में दो राष्ट्रों के समाधन को, भारत का मज़बूत और अटूट संकल्प दोहराया.

ध्यान रहे कि भारत, वर्ष 2021 और 2022 के लिये, सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य है.

भारतीय स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरूमूर्ति ने कहा, “भारत, इसी सप्ताह सुरक्षा परिषद की दो बैठकों में, येरूशेलम में हुई हिंसा पर गहरी चिन्ता व्यक्त कर चुका है, विशेष रूप से रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान हरम अल शरीफ़ / टैम्पल माउण्ट में हुई हिंसा पर.” 

“हमारी चिन्ता, पूर्वी येरूशेलम की शेख़ जर्राह और सिल्वान बस्तियों में, सम्भावित जबरन बेदख़ली के बारे में भी रही है. पूर्वी येरूशेलम, संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित व्यवस्था का एक हिस्सा है. हम पश्चिमी तट और ग़ाज़ा के अन्य इलाक़ों में भी हिंसा फैलने की आशंकाओं पर चिन्ता व्यक्त कर चुके हैं.”

उन्होंने कहा कि भारत ग़ाज़ा में से, इसराइल में सिविल आबादी को निशाना बनाने वाले अंधाधुंध रॉकेट हमलों की निन्दा करता है, और इसराइल द्वारा बदले में ग़ाज़ा में किये जाने वाले हवाई हमलों ने भारी तबाही की है और अनेक लोग मारे गए हैं जिनमें महिलाएँ और बच्चे हैं.

“हम तमाम तरह की हिंसक कार्रवाई, उकसावे, उत्तेजना और तबाही की कठोर निन्दा करते हैं.”

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि तनाव कम किया जाना, समय की तत्काल ज़रूरत है और भारत, दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने व किसी भी तरह की भड़काऊ कार्रवाई से बचने का आग्रह करता है.

 

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