भारत में कोविड-19 की रोकथाम के लिये हरसम्भव कोशिश

3 मई 2021

भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर ने भीषण तबाही मचा दी है. महामारी के संक्रमण के, हर रोज़ तीन से चार लाख के बीच मामले सामने आ रहे हैं और भारी संख्या में लोग उचित समय पर इलाज और संसाधनों की कमी के कारण मौत का शिकार बन रहे हैं. इस भयावह स्थिति को समझने और इससे निपटने के उपायों को लेकर, भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि, डॉक्टर रॉड्रिको एच ऑफ्रिन ने, यूएन न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत में कहा कि कोविड-उपयुक्त व्यवहार ही इस महामारी के रोकथाम की कुंजी है...

इस साक्षात्कार को, प्रकाशन ज़रूरतों के लिये सम्पादित किया गया है...

यूएन न्यूज़: भारत के कोविड संकट ने दुनिया को हैरान कर दिया है. भारत में लोगों की दम घुटने से मौतें हो रही हैं. संक्रमण के, तीन से चार लाख मामले प्रतिदिन आ रहे हैं. ऑक्सीजन की कमी, अस्पताल में जगह न मिलना, दवाओं की कमी. ऐसे हालात किस तरह पैदा होगए? आपके ख़याल से, कोविड-19 के संक्रमण मामलों में इस आकस्मिक बढ़ोत्तरी का कारण क्या है?

डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ्रिन: यह जानना महत्वपूर्ण है कि फ़रवरी के शुरू में, कुछ समय के लिये आर्थिक और सामाजिक गतिविधियाँ फिर से शुरू हो गई थीं. हमने यह भी देखा कि कोविड उपयुक्त व्यवहार का पूर्ण रूप से पालन नहीं हो रहा था और इसने वायरस को फैलने का मौक़ा दे दिया.

इसलिये मुझे लगता है कि इसी वजह से स्थिति उत्पन्न हुई है. इसके कई कारण हैं, मगर मूल वजह यही है कि वायरस को फैलने का मौक़ा दे दिया गया.

यूएन न्यूज़: क्या 'डबल म्यूटेंट' ही वो वजह है, जिससे भारत में कोविड-19 का संक्रमण इस बार, इतनी तेज़ी से फैला है?

डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ्रिन: वैरियेण्ट्स (वायरस के नए प्रकार) के कुछ सबूत ज़रूर हैं, जैसे कि B.1.17 अधिक संक्रामक होने के कारण, अधिक फैलता है. फिर B.1.617 है, जिसमें दोहरे उत्परिवर्तन हैं.

लेकिन यह कहना उचित नहीं होगा कि मामलों में तेज़ी से वृद्धि होने का अकेला कारण यही है. जैसा कि मैंने कहा कि अन्य कारक भी थे, जो वायरस के फैलाव के लिये ज़िम्मेदार रहे, जिससे लोगों के संक्रमित होने का सिलसिला जारी रहा, और ऐसा इसलिये क्योंकि कोविड- उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया जा रहा था.

मुझे लगता है कि यह एक महत्वपूर्ण सन्देश देता है कि संचारण पर अंकुश लगाना हमारी ज़िम्मेदारी है और वैरियेण्ट से भी ज़्यादा,  मूल वायरस अब भी प्रमुख वायरस है. तो इस मायने में, ये सभी उपाय अब भी बहुत प्रभावी हैं व रहेंगे, इसलिये इनका पालन करना बेहद ज़रूरी है. 

यूएन न्यूज़: तेज़ी से फैलते वायरस से अनेक शहरों की स्वास्थ्य सेवा प्रणालियाँ चरमरा गई हैं और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो गई है. कोविड-19 से जूझने के दौरान योरोप, अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी अस्पतालों और चिकित्सा आपूर्ति की इसी तरह की कमी देखी गई थी. क्या भारत की समस्याएँ भी इन देशों के समान हैं या पूरी तरह अलग हैं?

डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ्रिन: मुझे लगता है कि अन्तर पैमाने का है. यह कैसे फैल रहा है -  उसकी लहरों का पैटर्न चाहे वो योरोप में हो या अमेरिका में, काफ़ी समान था - लेकिन पैमाना बहुत अलग है.

जनसंख्या का घनत्व भी शायद इसका एक कारक है और इसीलिये जैसा कि आपने कहा कि मामलों में ज़्यादा बढ़ोत्तरी महानगरों में है.

आपने देखा होगा कि मामलों के बढ़ने के शुरूआती हफ्तों में, स्वास्थ्य प्रणाली इसे सम्भालने में पूर्ण सक्षम थी, चाहे वो परीक्षण की बात हो या इलाज की, क्योंकि पिछले साल इसमें वृद्धि की गई थी.

पिछले साल भी अतिरिक्त बिस्तर लगाए जा रहे थे, जो निश्चित रूप से आपने भी देखे होंगे. तो फ़र्क़ पैमाने का है - वृद्धि और जवाबी कार्रवाई का स्तर.

मुझे लगता है कि इन देशों के बीच एक बड़ा अन्तर पैमाने का ही है. लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि इसे रोकने के लिये एक उपाय हमारे पास है और वो है टीकाकरण. इसलिये भारत ने अभी तक, साढ़े 16 करोड़ लोगों को वैक्सीन की ख़ुराकें देने में सफलता हासिल की है.

यूएन न्यूज़: भारत में यह दूसरी लहर कब तक चलेगी? क्या आपको लगता है कि भारत को अभी से तीसरी लहर की तैयारी शुरू कर देनी चाहिये?

डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ्रिन: मैं वास्तव में कोई भविष्यवाणी नहीं करना चाहूंगा. सभी मॉडलों, सभी सिद्धान्तों पर इस वायरस ने पानी फेर दिया है.

यह वायरस इतनी आसानी से ख़ुद को परिस्थिति के अनुरूप ढाल लेता है, इतनी तेज़ी से फैलता है कि कोई भी मॉडल इसकी भविष्यवाणी करने में सक्षम नहीं है.

इसलिये तैयारी जारी रखनी होगी. यह एक चक्र है. यह तैयारी, तत्परता, प्रतिक्रिया और पुनर्बहाली का एक पूरा चक्र है. इसे रोकना नहीं है.

वायरस से आगे रहने के लिये यह बेहद ज़रूरी है. मुझे लगता है कि महत्वपूर्ण यह है कि हम जानते हैं कि इससे कैसे निपटना है.

औज़ार व उपाय वही हैं - लगातार परीक्षण, सम्पर्क खोज,  सक्रिय मामलों का पता लगाना, प्रारम्भिक उपचार, उचित उपचार. क्योंकि यदि आप समय पर परीक्षण करते हैं और आपको हल्का संक्रमण हुआ है, तो आप मध्यम या गम्भीर मामले की ओर नहीं बढ़ते हैं.

आपके पास वायरस से लड़ने के लिये सारे अस्त्र मौजूद हैं. कोविड- उपयुक्त व्यवहार, मास्क पहनना, अपने हाथ धोना, शारीरिक दूरी बनाए रखना और टीकाकरण करवाना.

जिस तरह से यह बढ़ रहा है, उसे रोकने के लिये ये सारे उपाय बहुत ज़रूरी हैं. 

यूएन न्यूज़: हाल ही हुए एक अध्ययन के अनुसार मई के पहले या दूसरे सप्ताह में, भारत में दूसरी लहर चरम पर होगी. इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन का आकलन क्या है?

डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ्रिन: जैसा कि मैंने कहा, मैं भविष्यवाणी करने की कोशिश भी नहीं  करूंगा. हम अभी भी मामलों में बढ़ोत्तरी देख रहे हैं और अभी हमारा ध्यान केवल इस पर लगा है कि लोगों तक उचित सन्देश पहुँच सके.

हमें जनता की हिस्सेदारी की ज़रूरत है. लक्ष्य है: जनता को जवाबी कार्रवाई में पूरी तरह शामिल करना.

यूएन न्यूज़: अब 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण शुरू कर दिया गया है. क्या इस तरह की स्थिति से निपटने के लिये टीकाकरण ही एकमात्र तरीक़ा है? और क्या भारत इतने व्यापक स्तर पर सामूहिक टीकाकरण करने के लिये पूरी तरह तैयार है?

डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ्रिन: भारत उन देशों में से एक है जो बड़े पैमाने पर टीकाकरण करते रहे हैं – वो भी बहुत अच्छी तरह से.

अगर आप देखें तो अमेरिका में  बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था, तो उन्हें इसकी आदत नहीं थी, क्योंकि इससे पहले वो आम टीकाकरण ही करते थे.

लेकिन इस पैमाने पर टीकाकरण करने की, भारत में न केवल परम्परा या इतिहास रहा है, बल्कि इसका परिचालन तंत्र भी तैयार है, और यही कारण है कि 16 जनवरी को टीकाकरण सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया था.

आपका प्रश्न कि टीकाकरण एकमात्र तरीक़ा है, उसके लिये मैं पहले से ही कहता रहा हूँ कि यदि वायरस अनेक तरीक़ों से फैल रहा है, तो इस पर अंकुश लगाने के अनेक उपाय भी हैं. टीकाकरण उनमें से केवल एक उपाय है. 

‘हर्ड इम्युनिटी’ हर किसी को संक्रमित करने से नहीं लानी है, क्योंकि अधिक मामलों का मतलब होगा, अधिक मौतें. यह सही रास्ता नहीं है. ‘हर्ड इम्युनिटी’प्राप्त करने के लिये हर किसी को टीका लगाया जाना चाहिये. लेकिन इसके साथ ही, लोगों को कोविड- उचित व्यवहार का पालन करना भी बेहद ज़रूरी है.

यूएन न्यूज़: वर्तमान कोविड संकट पर WHO की क्या प्रतिक्रिया रही है? वर्तमान लहर का मुक़ाबला करने के प्रयासों में संगठन कैसे मदद कर रहा है?

डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ्रिन: यह जानना महत्वपूर्ण है कि हमारे पास देश में मौजूद विशेषज्ञों का नैटवर्क है. हमारे पास 23 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में 2600 विशेषज्ञ हैं.

स्टाफ़ के इस नैटवर्क ने सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्य पहले भी हासिल किये हैं - चाहे वह पोलियो की समाप्ति का लक्ष्य हो या हाल-फ़िलहाल में टीबी को समाप्त करने की प्रक्रिया.

इसीलिये हमने यही अत्यन्त विशाल तकनीकी और परिचालन संसाधन इसमें लगाए हैं.  

हमने अपने कुछ ऐसे कर्मचारियों को भी इसमें काम करने के लिये बुलाया है, जो स्वास्थ्य प्रणालियों के विशेषज्ञ हैं और टीबी या उपेक्षित उष्णकटिबन्धीय बीमारियों की पूरी प्रतिक्रिया में शामिल रहे हैं – यानि जितने ज़्यादा हाथ एकजुट हो सकें, उतना ही बेहतर.

इसके अलावा, जिन महत्वपूर्ण आवश्यकताओं का मैंने उल्लेख किया है, उनमें भी हम मदद करने की कोशिश कर रहे हैं – फिर चाहे छोटी मात्रा में ही सही, हम चार हज़ार ऑक्सीजन कॉन्सैन्ट्रेटर्स की आपूर्ति करके, ज़रूरत पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं.

साथ ही, अन्य सुविधाएँ, जैसे अस्पतालों में जगह बढ़ाने के लिये मौजूदा सुविधाओं में और वृद्धि.

आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ, जोखिम संचार की तरह, जवाबी कार्रवाई के हमारे अनेक कार्य जारी रहेंगे. इस मिशन के महत्वपूर्ण सन्देशों के लिये फ़ेसबुक और WHO इण्डिया और यूनीसेफ़ इण्डिया के साथ एक संयुक्त अभियान भी चल रहा है.

प्रयोगशालाओं के लिये ज़रूरी सामान की आपूर्ति की जा रही है क्योंकि इन चीज़ों की बहुत कमी है. हम आरटी-पीसीआर परीक्षण के लिये 4 लाख परीक्षण किटें भेज रहे हैं, जिनमें उससे सम्बन्धित अन्य वस्तुएँ भी शामिल हैं.

तेज़ जवाबी कार्रवाई की ज़रूरत है. इसके अलावा, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है,  ख़ासतौर पर अगर आप एक अस्थाई स्वास्थ्य सुविधा बना रहे हैं, लेकिन पहली प्राथमिकता महत्वपूर्ण चीज़ों की कमियों को पाटना ही रहेगी.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड