यमन: कूटनैतिक एकता है युद्ध का अन्त करने की कुंजी

विकट हालात के बावजूद, यमनी नागरिक रमदान के लिये तैयार हो रहे हैं.
WFP/Marco Frattini
विकट हालात के बावजूद, यमनी नागरिक रमदान के लिये तैयार हो रहे हैं.

यमन: कूटनैतिक एकता है युद्ध का अन्त करने की कुंजी

शांति और सुरक्षा

यमन के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने गुरूवार को एक अपील जारी करके, युद्धरत पक्षों से राष्ट्रव्यापी युद्धविराम लागू करने और शान्ति वार्ता के लिये किसी निश्चित तारीख़ पर सहमति बनाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि ये क़दम देश में हिंसक संघर्ष पर विराम लगाने की योजना के अनुरूप हैं.

साथ ही, संयुक्त राष्ट्र ने देश में, कोविड-19 संक्रमण मामलों में उभार के बीच, खाद्य सुरक्षा व आम लोगों की सुरक्षा सहित अन्य महत्वपूर्ण मामलों में समर्थन बढ़ाए जाने की अपील की है.

विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबन्धन सेनाओं से समर्थन प्राप्त सरकारी सुरक्षा बलों और अंसार अल्लाह गुट (हूती) के बीच छह वर्ष से चली आ रही लड़ाई को समाप्त करने के लिये अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता की अहमयित को रेखांकित किया है.

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"इन क़दमों से जीवन को सामान्य बनाने में मदद मिलेगी, जोकि अक्सर, और शायद आज, यमन के लोगों के लिये एक क्रूर आशा नज़र आती है."

"इसलिये, आइये, हम एक साथ आकर, पक्षों से, निराश करने के बजाय, यमन को उसकी व्यथा से बाहर निकालने की पुकार लगाएँ."

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स के मुताबिक सुरक्षा परिषद की एकता को, कूटनैतिक सर्वसम्मति और अनेक देशों द्वारा विशिष्ट क़दम उठाए जाने से मज़बूती मिलती है.

यूएन के विशेष दूत ने ओमान, सऊदी अरब और अमेरिका का उनके समर्थन के लिये आभार जताते हुए ऐसे उदाहरण भी साझा किये जो समझौते के ज़रिये हासिल किये जा सकते हैं.

"राष्ट्रव्यापी युद्धविराम का अर्थ यह है कि बन्दूकें शान्त हो जाएंगी; और अग्रिम मोर्चों द्वारा अवरुद्ध मार्गों को चरणबद्ध ढंग से खोला जा सकेगा – एक दिन में नहीं, मगर धीरे-धीरे, ताकि पहले सामान और मानवीय राहत और वहाँ लोगों की मुक्त आवाजाही हो सके."

विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने मारिब इलाक़े में ख़तरनाक होते हालात पर और ताइज़ में लड़ाई तेज़ होने व तनाव भड़कने पर चिन्ता जताई है.

कोविड-19 की लहर

बताया गया है कि यमन में दुनिया के सबसे बदतर मानवीय संकट के हालात बने हुए हैं, और इसी दौरान देश कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी तेज़ लहर से जूझ रहा है.

मानवीय राहत कार्य मे संयोजन के लिये यूएन कार्यालय के प्रमुख मार्क लोकॉक ने भी सुरक्षा परिषद को अवगत कराते हुए बताया कि कोविड-19 संक्रमण मामलों की संख्या छह हफ़्तों में ही दोगुनी हो गई है.

"यह दूसरी लहर, एक ऐसे समय में आ रही है, जब देश व्यापक स्तर पर अकाल के हालात से जूझ रहा है. लाखों लोग पहले से ही भुखमरी का शिकार हैं, और 50 लाख लोग बस उनसे एक ही क़दम पीछे हैं."

मार्च के अन्तिम दिनों में, यमन को कोवैक्स पहल के तहत तीन लाख 60 हज़ार वैक्सीन ख़ुराकें उपलब्ध कराई गई थीं, और आगामी महीनों में 16 लाख अतिरिक्त ख़ुराकें भेजे जाने की योजना है.

घातक महीना

मार्क लोकॉक ने महामारी से निपटने के लिये और आम लोगों की सुरक्षा सहित अन्य महत्वपूर्ण मामलों में समर्थन को बढ़ाए जाने की अपील की है.

पिछले महीने 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जोकि इस वर्ष अब तक का सबसे घातक महीना साबित हुआ है.

मारिब में जारी लड़ाई से लाखों लोगों के लिये संकट पैदा हो गया है, और इनमें वे लोग भी हैं जोकि देश के अन्य इलाक़ों से विस्थापित हैं.

उन्होंने कहा कि अगर लड़ाई जारी रही, तो लाखों लोगों को फिर से सुरक्षित स्थान की तलाश में, मजबूरी में इलाक़े को छोड़ना होगा. कोविड-19 के फैलाव में तेज़ी के दौरान इसे बेहद ख़तरनाक बताया गया है.

पिछले महीने एक दानदाता सम्मेलन में, यमन के लिये एक अरब 70 करोड़ डॉलर का संकल्प लिया गया था. यह धनराशि मानवीय राहत अभियानों के लिये ज़रूरी राशि के आधे से भी कम है.

इसके मद्देनज़र, मार्क लोकॉक ने देशों से सहायता का स्तर बढ़ाए जाने की अपील की है ताकि बड़ी संख्या में यमनी नागरिकों को राहत मुहैया कराई जा सके.