बांग्लादेश: 'सौर घर प्रणाली कार्यक्रम' साबित हुआ नया विकास वाहक

15 अप्रैल 2021

विश्व बैंक (World Bank) ने अन्य साझीदारों के साथ मिलकर, बांग्लादेश में घरों तक बिजली पहुँचाने के लिये 'सौर ऊर्जा घर प्रणाली' (SHS) कार्यक्रम को वित्तीय पोषण प्रदान किया, जिससे देश की विकास प्रक्रिया में अहम सहयोग मिला है. इस कार्यक्रम के ज़रिये, दूर-दराज़ के क्षेत्रों में समुदायों तक बिजली पहुँचाने वाले एक 'ऑफ़-ग्रिड सौर बाज़ार' के निर्माण के लिये सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच भागीदारी को समर्थन दिया गया. 

     

    विश्व बैंक और बांग्लादेश सरकार, 25 वर्ष से अधिक समय से, 'आधारभूत ढाँचा विकास कम्पनी लिमिटेड' (IDCOL) के साथ साझेदारी में, दूर-दराज़ के क्षेत्रों में समुदायों को स्वच्छ और सस्ती बिजली प्रदान करने के प्रयासों में जुटे हैं.

    इसके तहत, एक सौर घर प्रणाली (Solar Home System/SHS) कार्यक्रम को समर्थन दिया गया है, जिससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच एक ऑफ़-ग्रिड सौर बाज़ार के निर्माण में मदद मिली है. 

    ‘Living in the Light – The Bangladesh SHS Story’ शीर्षक वाली एक नई किताब में इस परियोजना के बारे में विस्तार से बताया गया है.

    इस प्रणाली के ज़रिये, देश के विकास के लिये, स्थानीय लोगों तक तेज़ी से बिजली पहुँचाई गई.

    इससे यह दर्शाना सम्भव हुआ कि अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर जुटाई गई लाखों डॉलर की रक़म से, दूर-दराज़ के इलाक़ों के घरों में, 100 डॉलर से भी कम ऋण में क्या कुछ हासिल किया जा सकता है. 

    यह एक ऐसी सफलता की कहानी है, जो बताती है कि नए उत्पादों और सेवाओं के वितरण के लिये, किसी देश की आन्तरिक संस्थागत क्षमताएँ किस तरह जुटाई जा सकती हैं. इसने देश में, एक बिल्कुल नए सौर उद्योग की नींव डाली.

    विकास में बिजली की भूमिका 

    बांग्लादेश की विकास की कहानी में भले ही कई तत्व हों, लेकिन इसका उद्देश्य एक ही है - वर्ष 2021 तक बिजली की सार्वभौमिक पहुँच में योगदान देना.

    बांग्लादेश में वर्ष 2003 के शुरू में, केवल 27 प्रतिशत ग्रामीण आबादी तक ही बिजली पहुँच पाई थी, और अनुमान था कि सभी तक बिजली पहुँचाने में अधिक समय लगेगा.

    बांग्लादेश सरकार ने राष्ट्रीय ग्रिड से समुदायों को जोड़ने की प्रतीक्षा करने के बजाय, आधारभूत ढाँचा विकास कम्पनी लिमिटेड (IDCOL) के नेतृत्व में, ‘सौर घर प्रणाली’ (SHS) कार्यक्रम शुरू किया, ताकि निजी और ग़ैर-सरकारी क्षेत्र, लोगों तक तेज़ी से स्वच्छ बिजली सेवाएँ पहुँचाने के लिये, नए रास्तों की तलाश कर सकें. 

    UN Kenya/Neil Thomas
    सौर ऊर्जा, दुनिया भर में, टिकाऊ व पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत के रूप में तेज़ी से, एक वैकल्पिक ऊर्जा संसाधन के रूप में उभर रही है.

    सौर घर प्रणाली कार्यक्रम ने, 2018 तक, 41 लाख से अधिक सौर इकाइयाँ बेचीं, जिससे बांग्लादेश में लगभग 2 करोड़ लोगों को बिजली की आपूर्ति हुई.

    वर्ष 2013 में ये बिक्री, 8 लाख 16 हज़ार की उँचाई तक पहुँच गई थी, जब लगभग 16 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को, ‘सौर घर प्रणाली कार्यक्रम’ के माध्यम से बिजली का लाभ मिल रहा था.

    आज बांग्लादेश, बिजली के क्षेत्र में लगभग सार्वभौमिक पहुँच हासिल करने में सफल रहा है.

    ‘सौर घर प्रणाली कार्यक्रम’, वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े और सबसे सफल ऑफ़-ग्रिड बिजली पहुँच कार्यक्रमों में से एक बन चुका है.

    ग्रामीण इलाक़ों में आकांक्षाएँ बढ़ने, संचार सेवाओं व गुणवत्तापरक बिजली की माँग बढ़ने के साथ-साथ ग्रिड नाकाम होने व जल्दी-जल्दी बिजली कटौती होने की वजह से, यह कार्यक्रम लगतार बढ़ता गया. 

    आर्थिक लाभ सम्भव

    ‘सौर घर प्रणाली कार्यक्रम’ आर्थिक रूप से भी फ़ायदेमन्द साबित हुआ  - ऐसे परिवारों को वित्तीय रूप से कुल 74 करोड़, 50 लाख डॉलर का फ़ायदा हुआ.

    सरकार ने SHS उत्पादों पर कर (Tax) के ज़रिये, 47 करोड़ 40 लाख डॉलर की राशि एकत्र की और कैरोसीन तेल को सब्सिडी देने में भी बचत हुई.

    सफलता के लिये सबसे बड़ी चुनौती थी - बदलती परिस्थितियों के साथ कार्यक्रम में बदलाव करना; जो कि 15 साल तक चलने वाले इस कार्यक्रम के लिये एक अनिवार्य आवश्यकता थी.

    कार्यक्रम के तहत, छोटे पैमाने पर लक्ष्य निर्धारित किये गए और उत्तरोत्तर अधिक महत्वपूर्ण उपलब्धियों तक पहुँचने में कामयाबी हासिल की.

    ‘सौर घर प्रणाली कार्यक्रम’ को विश्व बैंक द्वारा लगातार वित्तपोषित परियोजनाओं से 41 करोड़ 60 लाख डॉलर, कर्ज़ के तौर पर 18 करोड़ 50 लाख डॉलर और अन्य अन्तरराष्ट्रीय विकास भागीदारों से अनुदान में, 8 करोड़ 10 लाख की धनराशि प्राप्त हुई.

    ग्राहकों ने 16 करोड़ डॉलर का अग्रिम भुगतान किया, साथ ही ऋण के ब्याज़ भुगतान में अतिरिक्त लाखों डॉलर की राशि प्राप्त हुई.

    बांग्लादेश ‘सौर घर प्रणाली कार्यक्रम’ के अनुभव अन्य विकासशील देशों में बिजली की पहुँच बढ़ाने के लिये उपयोगी साबित हो सकते हैं, जैसे कि सब-सहारा का अफ्रीका क्षेत्र, जिसमें लगभग 60 करोड़ लोगों को बिजली हासिल नहीं है.

    अफ्रीकी समुदायों तक बिजली की सेवाएँ तेज़ी से पहुँचाने के एक तरीक़े के रूप में इस प्रणाली की व्यावहारिकता मौजूदा परिस्थितियों में और भी बढ़ जाती है,
    ख़ासतौर पर जब सौर, बैटरी और एलईडी के क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा मिला है; जिनसे लागत में कटौती हुई है और नए व्यवसाय मॉडल पनप रहे हैं जो आसानी से मोबाइल उपकरणों के ज़रिये धन भुगतान करने में मदद देते हैं.

    यह लेख, यहाँ प्रकाशित हो चुके लेख का संक्षिप्त संस्करण है. 

     

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