कोविड-19: विषमताओं पर पार पाने के लिये पाँच अहम समाधान 

7 अप्रैल 2021

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कोविड-19 महामारी द्वारा उजागर विषमताओं को दूर करने के लिये पाँच महत्वपूर्ण उपायों को पेश किया है. उन्होंने बुधवार को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर वैक्सीन, परीक्षण और उपचार की न्यायसंगत सुलभता, बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल में निवेश, सामाजिक संरक्षा व समावेशी पड़ोस सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों को मज़बूती प्रदान किये जाने का आहवान किया है.   

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि कोविड-19 महामारी का असर सभी पर हुआ है, मगर सबसे निर्धन और हाशिएकरण का शिकार समुदायों का जीवन और आजीविका, इससे सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं. 

उन्होंने आगाह किया है कि कोरोनावायरस संकट ने विश्व की विषमताओं को उजागर किया है जिनसे निपटने के लिये पाँच अहम उपायों पर ध्यान दिया जाना होगा.  

महानिदेशक घेबरेयेसस ने इस वर्ष की शुरुआत में, सभी देशों से 2021 के पहले 100 दिनों में सभी स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण शुरू किये जाने की पुकार लगाई थी. 

वैक्सीन की न्यायसंगत उपलब्धता

क़रीब 190 देशों ने इस समयसीमा में यह काम शुरू किया है, और न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये ‘कोवैक्स’ पहल के तहत, दुनिया भर में साढ़े तीन करोड़ ख़ुराकों को वितरित किया जा चुका है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार महामारी के सबसे गम्भीर चरण पर क़ाबू पाने के लिये वैक्सीन उत्पादन और उसके न्यायोचित वितरण का स्तर बढ़ाया जाना बेहद अहम है. 

संगठन प्रमुख ने क्षोभ जताया कि कुछ देशों में स्वास्थ्यकर्मियों और संक्रमण के जोखिम का सामना कर रहे समूहों के टीकाकरण की शुरुआत भी नहीं हो पाई है.    

उन्होंने सरकारों से वैक्सीन ख़ुराकों को साझा किये जाने और न्यायोचित वैक्सीन वितरण, त्वरित टैस्टिंग व उपचार की पहल, ACT Accelerator, को समर्थन प्रदान किये जाने का आग्रह किया है.

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश

वैश्विक महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों की कमियाँ भी उजागर हुई हैं. इस पृष्ठभूमि में, यूएन एजेंसी प्रमुख ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश बढ़ाया जाना होगा. 

विश्व आबादी के लगभग आधे हिस्से की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच नहीं है, और चिकित्सा व्यय के कारण हर वर्ष 10 करोड़ लोग निर्धनता के गर्त में धँस जाते हैं. 

उन्होंने आगाह किया कि स्वास्थ्य और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में सार्वजनिक ख़र्च में कटौती से बचा जाना होगा, चूँकि इससे पहले से ही वंचित समूहों के लिये विकट हालात पैदा होने का ख़तरा है.

सरकारों से, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अतिरिक्त एक फ़ीसदी हिस्सा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश किये जाने का आग्रह किया गया है. 

साथ ही दुनिया भर में एक करोड़ 80 लाख स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को भी दूर किया जाना होगा ताकि वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के वादे को पूरा किया जा सके.  

सामाजिक संरक्षा, सुरक्षित पड़ोस

यूएन एजेंसी प्रमुख ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों से आग्रह किया है कि स्वास्थ्य एवँ सामाजिक संरक्षा उपायों को प्राथमकिता के तौर पर लेते हुए सुरक्षित, स्वस्थ व समावेशी समाजों का निर्माण किया जाना होगा. 

“सुरक्षित पड़ोस में स्वस्थ आवास की सुलभता, सभी के लिये अच्छा स्वास्थ्य हासिल करने की कुँजी है.”

“मगर अक्सर, बुनियादी सामाजिक सेवाओं का अभाव कुछ समुदाय बीमारी और असुरक्षा के गर्त में फँसते चले जाते हैं. इसे बदला जाना होगा.”

साथ ही, ग्रामीण समुदायों तक स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सेवाओं को पहुँचाने के लिये प्रयासों को तेज़ किया जाना होगा.

मज़बूत डेटा प्रणाली

महानिदेशक घेबरेयेसस ने ज़ोर देकर कहा कि डेटा और स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों को मज़बूती प्रदान किये जाने की आवश्यकता है, जिससे विषमताओं की शिनाख़्त करने और उन पर पार पाने में मदद मिलेगी. 

बताया गया है कि स्वास्थ्य विषमता निगरानी को सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों का हिस्सा बनाया जाना महत्वपूर्ण है. लेकिन फ़िलहाल, दुनिया के महज़ पचास फ़ीसदी देशों में इसकी क्षमता मौजूद है. 

 

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