महामारियों से निपटने के लिये प्रस्तावित सन्धि - स्वास्थ्य रक्षा का 'पीढ़ीगत संकल्प'

1 अप्रैल 2021

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि भावी महामारियों से निपटने पर केन्द्रित एक अन्तरराष्ट्रीय सन्धि की पेशकश के लिये समर्थन बढ़ रहा है, जोकि दुनिया को सुरक्षित रखने के लिये एक पीढ़ीगत संकल्प होगा. यूएन एजेंसी प्रमुख के अनुसार, महामारी को फैलाने वाले नए वायरसों का ख़तरा हमेशा बना रहेगा, जिसके मद्देनज़र, स्वास्थ्य कार्यबल को मज़बूत बनाए जाने को, सर्वोपरि प्राथमिकता देनी होगी, जोकि एक सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणाली की बुनियाद है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ने गुरुवार को जिनीवा में एक प्रैस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा, “इस सप्ताह, जी20, जी7 और हर क्षेत्र के 25 से ज़्यादा नेता, महामारी पर सन्धि के विचार पर एकजुट हुए.” 

यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक़ इन नेताओं ने माना है कि दुनिया, कोरोनावायरस वैश्विक महामारी का सामना करने के लिये तैयार नहीं थी, और भविष्य में महामारी के फैलाव से निपटने के लिये सामूहिक रूप से बेहतर तैयारी करनी होगी. 

“योरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल के साथ मंगलवार को प्रैस वार्ता में बातचीत के बाद से, इस दिशा में तेज़ प्रगति हुई है.”

महानिदेशक घेबरेयेसस ने प्रसन्नता जताई कि महामारी सन्धि पर पुकार को समर्थन देने वाले नेताओं की संख्या बढ़ रही है, जोकि इस दुनिया को सुरक्षित रखने के लिये एक पीढ़ीगत संकल्प होगा. 

उन्होंने कहा कि ऐसे वायरसों का अन्देशा हमेशा बना रहेगा, जिनसे महामारी फैलने का ख़तरा होगा. 

इसके मद्देनज़र, नई सन्धि में स्वास्थ्य कार्यबल को मज़बूत बनाए जाने को सर्वोपरि प्राथमिकता देनी होगी, जोकि स्वास्थ्य प्रणाली की सुदृढ़ता की बुनियाद है. 

स्वास्थ्यकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान

उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य और देखभालकर्मी, कोविड-19 महामारी पर जवाबी कार्रवाई के अग्रिम मोर्चे पर हैं, और हम सभी की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाते हैं.”

वैश्विक महामारी के दौरान बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई है, लाखों संक्रमण का शिकार हुए हैं, और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर हुआ है. 

“बेचैनी, मानसिक अवसाद, अनिद्रा, तनाव, सभी कुछ बढ़ गया है. थकान होना आम बात है, और कलंकित करने, व यहाँ तक की दुर्व्यवहार के भी मामले सामने आए हैं.”

महानिदेशक घेबरेयेसस ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि मौजूदा हालात में, स्वास्थ्य व देखभालकर्मियों के परिवारों व समुदायों को इसकी एक बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी है.

महामारी से पहले भी, दुनिया, एक करोड़ 80 लाख स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का सामना कर रही थी. 

यूएन एजेंसी प्रमुख ने मानवता के समक्ष एक कठिनतम चुनौती के दौरान, मज़बूती से खड़े होने के लिये स्वास्थ्यकर्मियों का आभार जताया है.

उन्होंने साथ ही ज़ोर देकर कहा कि महामारी से उबरते समय स्वास्थ्यकर्मियों के लिये बेहतर प्रशिक्षण, सुरक्षा उपाय व समर्थन सुनिश्चित किया जाए, ताकि वे कारगर ढंग से अपने कार्य को पूरा कर पाएँ.

उन्होंने टिकाऊ विकास के लिये वित्तीय इन्तज़ामों पर यूएन की ताज़ा रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए ध्यान दिलाया कि महामारी से वास्तविक पुनर्बहाली के लिये स्वास्थ्य व लोगों में अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी.

इन दो प्राथमिकताओं को स्वास्थ्य कार्यबल में निवेश के ज़रिये, पूरा किया जा सकता है. 

वैक्सीन: न्यायोचित वितरण की चुनौती

यूएन एजेंसी के प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि साल के पहले 100 दिन पूरे होने में अब नौ दिनों का समय बचा है. 

यही वह अवधि है, जिसमें उन्होंने सभी देशों में स्वास्थ्यकर्मियों व संक्रमण का ज़्यादा जोखिम झेल रहे लोगों के लिये, टीकाकरण शुरू किये जाने का लक्ष्य रखा था.

यूएन के नेतृत्व वाली कोवैक्स पहल के तहत, 78 से ज़्यादा देशों में अब तक साढ़े तीन करोड़ ख़ुराकें पहुँचाई जा चुकी हैं. 

इसके बावजूद, वैक्सीन की उपलब्धता और न्यायसंगत वितरण, एक गम्भीर चुनौती बना हुआ है. 

महानिदेशक घेबरेयेसस ने बताया कि उन्होंने देशों से ‘आपात इस्तेमाल सूची’ में शामिल वैक्सीन की ख़ुराकों को तत्काल साझा किये जाने का आग्रह किया है.

एक करोड़ ख़ुराकों के इन्तज़ाम पर केन्द्रित, इस उपाय का उद्देश्य 10 अप्रैल से पहले –जोकि वर्ष 2021 का 100वाँ दिन है – उन 20 देशों में टीकाकरण की शुरुआत करना है, जहाँ अभी स्वास्थ्यकर्मियों व बुज़ुर्गों को वैक्सीन नहीं मिल पाई है. 

कोविड-19 से अब तक 12 करोड़ 85 लाख लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, और 28 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. 

31 मार्च 2021 तक, 54 करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन की ख़ुराकें दी जा चुकी हैं. 

 

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