सीरिया: 'युद्ध को रोकना, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक ज़िम्मेदारी'

30 मार्च 2021

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने संकटग्रस्त देश सीरिया में लोगों की मदद जारी रखने के लिये, धन एकत्र करने के वास्ते हुए संकल्प सम्मेलन में कहा है कि देश में, 10 वर्षों से जारी संघर्ष को समाप्त करना, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक ज़िम्मेदारी है. इस ब्रसेल्स सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र और योरोपीय संघ ने संयुक्त रूप से किया.

यूएन प्रमुख ने पाँचवें ब्रसेल्स सम्मेलन को अपने वीडियो सन्देश में कहा, “एक दशक तक युद्ध देखने के बाद, बहुत से सीरियाई जन, का ये भरोसा ही ख़त्म हो गया है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय, उन्हें इस संकट से बाहर निकालने का रास्ता तलाश करने में कोई मदद कर सकता है. मुझे भरोसा है कि हम अब भी ऐसा कर सकते हैं, सीरियाई पक्ष भी ऐसा कर सकते हैं.”

इस वर्चुअल सम्मेलन में, सीरिया में रहने वाले लोगों की मदद के लिये लगभग चार अरब 20 करोड़ डॉलर और क्षेत्र के ही अन्य देशों में रहने वाले सीरियाई शरणार्थियों और मेज़बान समुदायों की मदद के लिये, पाँच अरब 80 करोड़ डॉलर की रक़म एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया था.

ये केवल सीरिया का युद्ध नहीं

यूएन प्रमुख ने देशों की सरकारों से ज़ोर देकर कहा कि उन्हें सीरियाई लोगों की वित्तीय और मानवीय सहायता के लिये अपने संकल्प बढ़ाने होंगे. ऐसे ही संकल्प उन देशों के लिये भी बढ़ाने होंगे जिन्होंने सीरियाई संघर्ष से बचकर सुरक्षा की तलाश में भागने वाले लाखों लोगों को पनाह दी है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “सीरिया में चल रहा युद्ध, केवल सीरिया की लड़ाई नहीं है. इस युद्ध को, और इसके कारण होने वाली भीषण तबाही और तकलीफ़ों को बन्द करना, हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है.”

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि इस वर्ष सीरिया के भीतर रहने वाले लगभग एक करोड़ 30 लाख लोगों को मानवीय सहायता की ज़रूरत होगी, जोकि वर्ष 2020 की तुलना में, 20 प्रतिशत ज़्यादा संख्या है.

क्षेत्र में ही रहने वाले, दीगर, एक करोड़ पाँच लाख सीरियाई शरणार्थियों और मेज़बान समुदायों को भी, सहायता की आवश्यकता होगी.

उन्होंने कहा, “सीरिया की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो चुकी है और अब कोविड-19 महामारी के भीषण प्रभाव ने हालात और भी जटिल व कठिन बना दिये हैं. लगभग आधी जनसंख्या की आदमनी के स्रोत ख़त्म हो गए हैं, हर 10 में से नौ सीरियाई लोग, निर्धनता में जी रहे हैं.”

शान्ति की अथक चाह

यूएन महासचिव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2254 के अनुसार, सीरिया में संघर्ष का राजनैतिक समाधान तलाश करने के लिये अथक प्रयास करना जारी रखेगा. इस प्रस्ताव में राष्ट्रीय युद्धविराम का भी आहवान किया गया है.

सीरिया के लिये महासचिव के विशेष दूत गियर पैडर्सन ने ख़बर दी है कि लगभग एक साल के दौरान, वैसे तो ज़मीनी स्थिति कुछ बेहतर हुई है, मगर शान्ति स्थापना अब भी बहुत दूर नज़र आती है.

विशेष दूत ने ओस्लो से मुख़ातिब होते हुए कहा, “एक ऐसे स्थान पर जहाँ सैन्य तनाव बहुत बढ़े हुए हैं, जहाँ जब-तब हिंसा भड़कती रहती है, जहाँ अस्पतालों और आमजन को अब भी निशाना बनाया जा रहा है, और जहाँ पाँच विदेशी सेनाएँ, एक दूसरे के नज़दीक रहते हुए ही तैनात हैं, ऐसी जगह, किसी भी समय, आग की लपटें भड़क सकती हैं.”

“सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 में जिस राष्ट्रव्यापी युद्धविराम की पुकार लगाई गई है, उस पर अमल करना बहुत तात्कालिक और अहम है.”सबसे ऊपर है एकता

© UNICEF/Delil Souleiman
सीरिया में जैसे-जैसे सर्दी का मौसम बढ़ता है, पूर्वोत्तर इलाक़े में स्थित अल होल शिविर में, रहने वाले बच्चों की ज़रूरतें भी बेतहाशा बढ़ जाती हैं, और विवशता भी.

विशेष दूत गियर पैडर्सन और उनकी टीम सीरियाई पक्षों के साथ सम्पर्क बनाए हुए, जिसमें संवैधानिक कमेटी का अगले सत्र का रास्ता साफ़ करने के लिये प्रयास करना भी शामिल है. सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में एक मुद्दा ये भी है.

उन्होंने कहा, “सीरिया के सामने दरपेश भीषण चुनौतियों का सामना करने और सीरियाई लोगों की शान्ति स्थापना की आकाँक्षाएँ पूरी करने के लिये, आज जिस चीज़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, वो है अन्तरराष्ट्रीय एकता.”

“स्वभाविक रूप में, आवश्यक वित्तीय सहायता के लिये संकल्प में एकता. सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 को लागू करने के लिये, संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को समर्थन देने में एकता...”

पूरे मार्च महीने के दौरान, संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया में संकट व संघर्ष के दस वर्ष पूरे होने को विभिन्न रूपों में याद किया है. 

इस दान संकल्प सम्मेलन की ही तरह, यूएन महासभा ने भी, न्यूयॉर्क में एक अनौपचारिक बैठक का आयोजन किया जिसमें, सीरिया में, मानवीय सहायता व मानवाधिकारों की स्थिति पर नज़र डाली गई.

भारी क़ीमत पर मदद जारी

यूएन महासभा के अध्यक्ष वोल्कान बोज़किर ने राजदूतों से कहा कि इस संकट ने, बहुत से जन समूहों को इतना कमज़ोर और असहाय बना दिया है कि उन्हें अपने परिवारों को जीवित रखने की ख़ातिर, बहुत कठिन काम करने पड़ रहे हैं, इनमें बच्चे भी हैं.

उन्होंने कहा, “लड़कियों के लिये हालात और भी बदतर हुए हैं क्योंकि उन्हें छोटी उम्र में ही शादी में धकेला जा रहा है; और इसलिये, अब उनके कभी स्कूली शिक्षा हासिल करने के लिये वापिस लौटने की सम्भानाएँ बिल्कुल ना के बराबर हैं, इसके अलावा, उनकी वयस्क ज़िन्दगी में, लैंगिक हिंसा का अनुभव करने की बहुत ज़्यादा सम्भावना है, जैसाकि, सीरिया में, महिलाओं की मौजूदी पीढ़ी को अनुभव करना पड़ रहा है.”

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठन, संघर्ष व संकट के दौरान सहायता पहुँचाने के काम में सक्रिय हैं. पिछले वर्ष, यूएन और उसकी साझीदार एजेंसियों ने 70 लाख से ज़्यादा लोगों तक, सहायता पहुँचाई. 

मगर, वोल्कान बोज़किर ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि ये सहायता मुहैया कराना कभी-कभी भारी क़ीमत पर होता है क्योंकि पिछले 14 महीनों के दौरान, पश्चिमोत्तर सीरिया में, 14 सहायताकर्मियों को अपनी जान गँवानी पड़ी है.

 

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