सीरिया: हिंसक संघर्ष, दस वर्ष बाद भी एक भयावह सपना

10 मार्च 2021

 संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गेटरेश ने सीरिया में गृहयुद्ध के राजनैतिक हल की तलाश के लिये, यूएन के दृढ़ संकल्प को रेखांकित किया है. उन्होंने, बुधवार को, यूएन के न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक से जारी हिंसक संघर्ष, स्थानीय आबादी के लिये एक “जीवित दुस्वप्न” बनकर रह गया है.     

महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि देशों को आपसी मतभेद दरकिनार रखकर, इस संकट का समाधान ढूँढने में सीरियाई नागरिकों को समर्थन देना होगा.

“सीरिया, एक दशक के हिंसक संघर्ष के बाद, वैश्विक महामारी के दौरान, और नए संकटो की लहर के समक्ष, मुख्य पन्नों से दूर हो गया है.”

“और फिर भी देश में हालात एक जीवित दुस्वप्न बने हुए हैं.”

यूएन प्रमुख के अनुसार दुनिया ने सीरिया को विध्वंस के रास्ते पर जाते हुए और एक ऐसे रक्तपात में घिरते हुए देखा है, जिससे कोई परिवार अछूता नहीं है.

लाखों सीरियाई लोगों की मौत हुई है, लाखों विस्थापित हुए हैं, और असंख्य अन्य लोग या तो हिरासत में हैं, लापता हैं, या फिर अनिश्चितता में जीवन गुज़ार रहे हैं. 

“सीरिया में तबाही की सीमा को समझ पाना असम्भव है, लेकिन यहाँ के लोगों ने ऐसे गम्भीरतम अपराध सहन किये हैं, इस सदी में दुनिया उनकी गवाह बनी है.”

उन्होंने मानवाधिकार उल्लंघनों, घेराबन्दी किये जाने, रासायनिक हथियार हमलों और युद्ध के दौरान अन्य भयावह घटनाओं का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि क्रूरता का स्तर, अन्तरात्मा को झकझोक देता है, इसलिये सीरिया में टिकाऊ शान्ति के लिये, दोषियों की जवाबदेही तय की जानी होगी.

यूएन प्रमुख ने बताया कि सीरिया में ज़रूरतमन्दों को मानवीय सहायता प्रदान किया जाना जारी रखना होगा. देश की 60 प्रतिशत आबादी, इस वर्ष भुखमरी के नज़दीक पहुँचने के जोखिम का सामना कर रही है, इसलिये मानवीय राहत सामग्री हर ज़रूरतमन्द तक पहुँचाने के लिये रास्ते खुले रखने होंगे.

इस क्रम में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से सहमति पर पहुँचने का आग्रह किया है.

राजनैतिक प्रगति की दरकार

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि संकट के राजनैतिक निपटारे के लिये, संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 के अनुरूप प्रयास करता रहेगा. इस प्रस्ताव में सीरियाई नागरिकों के नेतृत्व में राजनैतिक रोडमैप का समर्थन किया गया है.

उन्होंने बताया कि सीरियाई संवैधानिक समिति में ठोस प्रगति इस दिशा में पहला क़दम होगा. 

“सभी पक्षों के पास साझा ज़मीन ढूंढने और सभी सीरियाई लोगों की ज़रूरतों को समझने के लिये, अपनी इच्छा दर्शाने अवसर है, जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं.”

“यही एक रास्ता है जिसके ज़रिये समाधान निकलेगा, और जोकि सभी सीरियाई लोगों की जायज़ आकांक्षाओं को पूर्ण करेगा.”

यूएन महासचिव ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि ऐसी परिस्थितियों का निर्माण सम्भव है, जिससे शरणार्थियों की सुरक्षित व गरिमामय वापसी का रास्ता सुनिश्चित हो, और सीरिया की सार्वभौमिकता, क्षेत्रीय अखण्डता और स्वतन्त्रता का सम्मान किया जाए. 

दरार को पाटना

यूएन प्रमुख के मुताबिक़ सभी सीरियाई नागरिकों को इस प्रक्रिया में शामिल होना होगा, और इस क्रम में अन्तरराष्ट्रीय समुदाय की भी एक आवश्यक भूमिका है.

इस मौक़े पर, एक पत्रकार ने यूएन महासचिव से सवाल किया कि क्या संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद, सीरियाई जनता की मदद करने में विफल रहे हैं. 

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि अगर कोई युद्ध 10 वर्षों तक चलता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि मौजूदा अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा शासन प्रणाली असरदार नहीं है. 

उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा विषय है जो इस प्रक्रिया में शामिल, हर किसी के लिये चिन्तन-मनन का स्रोत है.

महासचिव गुटेरेश के मुताबिक, यूएन, सुरक्षा परिषद और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के अन्य तन्त्रों के लिये यह अहम होगा, कि लम्बे समय से चली नाटकीय परिस्थितियों में ज़्यादा तेज़ी से हस्तक्षेप किया जाए. 

उनके मुताबिक़ फ़िलहाल जो ढाँचा मौजूद है, उसके ज़रिये इस चुनौती से निपटने के लिये पूर्ण रूप से जवाबी कार्रवाई नहीं की जा सकती. 

 

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