कोविड-19: वैक्सीन उत्पादन की गति तत्काल बढ़ाना ज़रूरी, चार उपाय पेश

मोलदोवा, कोवैक्स पहल के तहत, कोविड-19 वैक्सीन पाने वाला पहला योरोपीय देश है.
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मोलदोवा, कोवैक्स पहल के तहत, कोविड-19 वैक्सीन पाने वाला पहला योरोपीय देश है.

कोविड-19: वैक्सीन उत्पादन की गति तत्काल बढ़ाना ज़रूरी, चार उपाय पेश

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि यह सप्ताह, न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये शुरू की गई, कोवैक्स पहल के नज़रिये से अभूतपूर्व साबित हुआ है. कोवैक्स के तहतअब तक, 20 देशों में दो करोड़ टीकों की ख़ुराकें पहुँचाई जा चुकी हैं. मगर, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने आगाह भी किया है कि वैक्सीन उत्पादन की रफ़्तार धीमी है और महामारी पर जल्द क़ाबू पाने के लिये, वैक्सीन उत्पादन क्षमता, जल्द से जल्द बढ़ानी होगी. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए बताया कि घाना और आइवरी कोस्ट में वैक्सीनों की खेप पहुँचने के बाद टीकाकरण की शुरुआत हो गई है. 

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इन दो देशों के अलावा, कोवैक्स पहल के अन्तर्गत अंगोला, कम्बोडिया, कोलम्बिया, काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य, गाम्बिया, भारत, केनया कोरिया गणराज्य, फ़िलिपीन्स, सूडान, युगाण्डा सहित अन्य देशों में भी वैक्सीने भेजी जा चुकी हैं.  

कुल मिलाकर 20 देशों में, कोरोनावायरस वैक्सीन की दो करोड़ ख़ुराकें भेजी गई हैं, और अगले सप्ताह, 31 अन्य देशों में एक करोड़ 44 लाख ख़ुराकें भेजी जाएंगी.

इसके बाद, कोवैक्स पहल के तहत टीके पाने वाले देशों की संख्या बढ़कर 51 हो जाएगी. ध्यान रहे कि कोवैक्स पहल, न्यायोचित ढंग से वैक्सीन वितरण के लिये शुरू की गई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैक्सीन वितरण में मौजूदा प्रगति को उत्साहजनक बताया है लेकिन आगाह किया है कि अब भी कम ख़ुराकों का ही वितरण हो पा रहा है. 

पहले दौर के वितरण में, कोवैक्स के ज़रिये वैक्सीन पाने वाले देशों की दो से तीन फ़ीसदी आबादी के लिये ही टीकों का इन्तज़ाम हो पाया है. 

यूएन एजेंसी प्रमुख ने महामारी पर जल्द से जल्द क़ाबू पाने के लिये वैक्सीन उत्पादन को तेज़ी से बढ़ाए जाने की बात कही है. 

वैक्सीनों के उत्पादन की क्षमता और रफ़्तार को बढ़ाने की वजह निर्यात प्रतिबन्धों, और काँच, प्लास्टिक सहित कच्चे माल की अनुपलब्धता जैसे कारण बताए गए हैं.

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन, इन चुनौतियों पर पार पाने के लिये, चार बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है.

चार अहम उपाय

पहला, वैक्सीन उत्पादन कर रही कम्पनियों को उन कम्पनियों से जोड़ना, जिनके पास तेज़ी से टीके तैयार करने की ज़्यादा क्षमता है.   

उदाहरणस्वरूप, जॉनसन एण्ड जॉनसन कम्पनी और मर्क कम्पनी के बीच हुए समझौता हुआ है. इस समझौते के तहत मर्क कम्पनी, जॉनसन एण्ड जॉनसन को वैक्सीन निर्माण में सहायता प्रदान करेगी.  

दूसरा, द्विपक्षीय रूप से टैक्नॉलॉजी का हस्तान्तरण करना, यानि एक वैक्सीन का पेटेण्ट रखने वाली कम्पनी, दूसरी किसी ऐसी कम्पनी को स्वैच्छिक रूप लाइसेंस प्रदान करे, जो वैक्सीन का उत्पादन करने में सक्षम हो.

इसका उदाहरण, ऑक्सफ़र्ड-ऐस्टाज़ेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन है, जिसे भारत में सीरम संस्थान और कोरिया गणराज्य में SKBio कम्पनी के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है. 

तीसरा, समन्वित टैक्नॉलॉजी हस्तान्तरण. इससे विश्वविद्यालयों और विनिर्माता, यूएन स्वास्थ्य की देखरेख वाली एक वैश्विक प्रक्रिया के तहत अपनी वैक्सीन का लाइसेंस अन्य कम्पनियों को प्रदान करेंगे. 

चौथा, बहुत से ऐसे देश, जिनके पास वैक्सीन विनिर्माण की क्षमता है, बौद्धिक सम्पदा अधिकारों में छूट मिलने के बाद, वे भी अपनी वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर सकते हैं. 

यूएन स्वास्थ्य प्रमुख ने कहा कि ये प्रावधान, आपात हालात के मद्देनज़र किये जा रहे हैं.

“ये अभूतपूर्व समय है, और विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि यह समय उन आपात प्रावधान लागू करने और पेटेण्ट अधिकारों में छूट दिये जाने का है.”