पोप फ़्रांसिस की इराक़ यात्रा, ‘शान्ति का प्रतीक’ 

5 मार्च 2021

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने कहा है कि पोप फ़्रांसिस का इराक़ी शहर मोसुल का दौरा, आशा का प्रतीक होगा और शान्ति व एकता के लिये एक साथ आने का अवसर प्रदान करेगा. पोप फ़्रांसिस, शुक्रवार को इराक़ की राजधानी बग़दाद पहुँचे हैं, और उनका रविवार को मोसुल जाने का कार्यक्रम है.

ख़बरों के अनुसार, पोप फ़्रांसिस, मोसुल में इस्लामिक स्टेट (दाएश) की हिंसक गतिविधियों के पीड़ितों के लिये प्रार्थना करेंगे. इस हिंसा में हज़ारों आम लोगों की मौत हुई है.   

यूनेस्को के अनुसार, पोप का आगमन, अपने साथ शान्ति और एकता का एक ऐसा सन्देश लाएगा जिसे विविधता के स्तम्भ से सहारा मिला होगा.

“यह सन्देश, हमारे शासनादेश की बुनियाद में है, जहाँ समावेशन और विविधता, आपसी समझ, पारस्परिक सम्मान और अन्तत: एक ज़्यादा शान्तिपूर्ण व न्यायोचित दुनिया के लिये अहम हैं.” 

यूएन एजेंसी के अनुसार, पोप की मोसुल यात्रा, इसलिये भी विशेष महत्व रखती है, चूँकि यह दुनिया के प्राचीनतम शहरों में है, और सदियों से एक सांस्कृतिक और धार्मिक केन्द्र रहा है. 

लेकिन दाएश चरमपंथियों के क़ब्ज़े के दौरान, वर्ष 2014 से लेकर 2017 तक, शहर को व्यापक क्षति पहुँची थी. 

उन तीन वर्षों के दौरान, अनेक लड़ाईयाँ लड़ी गईं, जिस वजह मोसुल बर्बाद हो गया, और उसके विरासत स्थल, धार्मिक स्मारक और प्राचीन काल की वस्तुएँ धूल के गुबार में तब्दील हो गए. 

बहुत सारे लोगों को शहर छोड़कर विस्थापन के लिये मजबूर होना पड़ा, और उन्हें मानवीय सहायता की आवश्यकता पैदा हुई. 

यूनेस्को ने, मोसुल को दाएश के क़ब्ज़े से मुक्त कराए जाने के बाद, इराक़ सरकार और अन्य साझीदार संगठनों के साथ मिलकर, शहर की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत को संरक्षित रखने और बढ़ावा देने के प्रयास शुरू किये हैं. 

इसके साथ ही, शिक्षा के प्रसार से हिंसक चरमपंथ की रोकथाम की कोशिशें की जा रही हैं. 

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजूले ने अपने सन्देश में कहा, “शिक्षा और संस्कृति के ज़रिये, इराक़ी पुरुष और महिलाएँ, अपने भाग्य की डोर अपने हाथों में फिर ले पाएँगे, और देश को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने के काम में भागीदार होंगे.”

मोसुल की भावना को पुनर्जीवित करना

इन प्रयासों के तहत, यूनेस्को ने मोसुल शहर की मूल आत्मा को फिर से जीवित करने के लिये फ़रवरी 2018 में, एक पहल शुरू की.

इसका लक्ष्य शहर के महत्वपूर्ण विरासत स्थलों का  ना केवल पुनर्निर्माण करना है, बल्कि आम लोगों को सशक्त बनाना भी है ताकि वे बदलाव के वाहक बन सकें. 

बताया गया है कि अल-नूरी मसजिद और उसकी प्रसिद्ध, झुकी हुई मीनार, और अल-ताहिरा व अल सा-आ चर्चों की मरम्मत का कार्य चल रहा है.

इसके साथ ही यूनेस्को ने, अल-अग़ावत मसजिद सहित शहर के अन्य पुराने घरों को ठीक करने का काम शुरू किया है. 

मोसुल शहर मे, संगीत में फिर से जान के फूँकने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समसरता को नए सिरे से मज़बूती प्रदान की जा सके.

शहर की महत्वपूर्ण धरोहरों की मरम्मत व पुनर्निर्माण के साथ-साथ, युवाओं के लिये रोज़गार-अनुकूल प्रशिक्षण प्रदान किये जाने की भी व्यवस्था की जा रही है. 

हिंसक चरमपन्थ के प्रसार से निपटने के लिये स्कूल बनाए जा रहे हैं और अध्यापकों को सशक्त बनाया जा रहा है.

अब तक इस क्रम में, प्राथमिक स्कूलों में 743 अध्यापकों व प्रबन्धकों, 26 प्रशिक्षकों और 307 अभिभावकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. 

 

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