इंजीनियरिंग के क्षेत्र में समानता, टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिये अहम

उज़बेकिस्तान में युवा महिलाएँ, स्थानीय लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिये तकनीक का सहारा ले रही हैं.
Rimma Mukhtarova and Sabina Baki
उज़बेकिस्तान में युवा महिलाएँ, स्थानीय लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिये तकनीक का सहारा ले रही हैं.

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में समानता, टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिये अहम

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) व साझीदारों द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा को साकार करने, और किसी को भी पीछे ना छूटने देने के लिये, अभियान्त्रिकी (इंजीनियरिंग) में व्याप्त क्षेत्रीय विसंगतियाँ को दूर किया जाना होगा.  

‘Engineering for Sustainable Development: Delivering on the Sustainable Development Goals’, नामक यह रिपोर्ट, गुरुवार, 4 मार्च को, टिकाऊ विकास के लिये ‘विश्व इंजीनियरिंग दिवस’ के मौक़े पर जारी की गई है.

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यह अध्ययन दर्शाता है कि टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने में मौजूदा इंजीनियरिंग प्रणालियाँ अपर्याप्त हैं, और इस क्षेत्र में विविधता का भी अभाव है. 

टिकाऊ विकास पर आधारित 2030 एजेण्डा, अन्तरराष्ट्रीय सहमति प्राप्त, ऐसे 17 लक्ष्यों का समूह है, जिनके ज़रिये एक शान्तिपूर्ण व समृद्ध पृथ्वी का ब्लूप्रिण्ट तैयार किया गया है.

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्री अज़ोले ने कहा, “इंजीनियरिंग, हमारे समाजों के टिकाऊ विकास और पूर्ण सम्भावनाओं को हासिल करने की अहम कुँजियों में से एक है.”

“दुनिया को और ज़्यादा इंजीनियरों और ज़्यादा समानता की आवश्यकता है.” 

विशेषज्ञों के अनुसार “कोविड-19 महामारी ने टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के लिये तत्काल कार्रवाई किये जाने की पुकार को और प्रबल किया है.”

“साथ ही टिकाऊ विकास में इंजीनियरिंग की प्रासंगिकता को भी पुष्ट किया है.” 

महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम

रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी के लिये समान अवसर सुनिश्चित किया जाना, एक ऐसे पेशे में समावेशन व लैंगिक सन्तुलन के लिये अहम है, जिसकी विकास व मानव कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका है.

यूनेस्को के मुताबिक़, जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने और एसडीजी को आगे बढ़ाने के लिये इंजीनियरिंग बेहद अहम है, विशेष रूप से अफ़्रीका और लघु द्वीपीय विकासशील देशों में. 

यूएन एजेंसी ने स्पष्ट किया कि, इस पेशे के महत्व के बावजूद, इंजीनियरिंग में महिलाओं का प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से कम रहा है. कुल कार्यबल का केवल 10 से 20 फ़ीसदी ही महिलाएँ हैं. 

महिलाओं के रास्ते में पेश आने वाले अवरोधों में, इस क्षेत्र में व्याप्त लैंगिक रूढ़िवादिता, अपर्याप्त नीतियाँ, और ऐसे शैक्षणिक माहौल का होना है, जहाँ उनकी आवश्यकताओं व आकाँक्षाओं को पूरा नहीं किया जाता.

रूपान्तरकारी व नवाचारी

रिपोर्ट में ऐसे इंजीनियरिंग नवाचार और कार्रवाइयाँ भी पेश किये गए हैं, जिनकी मदद से टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल रही है. 

इन 17 लक्ष्यों के तहत, निर्धनता का अन्त करने, विषमता घटाने, आर्थिक प्रगति को रफ़्तार देने, और पर्यावरण की रक्षा करने का आहवान किया गया है. 

इन नवाचारों के उदाहरणों में, महामारी से लड़ाई में डिजिटल टैक्नॉलॉजी के इस्तेमाल में बढ़ोत्तरी होने, वर्चुअल उपचार के लिये टैली-मेडिसिन का सहारा लेने का उल्लेख किया गया है. 

साथ ही बताया गया है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस के ज़रिये जल प्रणालियों को पहले से कहीं अधिक दक्ष बनाया जा रहा है. 

विशेषज्ञों का कहना है कि ज़्यादा नवाचारी, समावेशी, सहयोगी और ज़िम्मेदार होने के लिये, इंजीनियरिंग की भी कायापलट किये जाने की ज़रूरत है. 

इसके तहत, ऐसी नई पद्धतियाँ अपनाने पर ज़ोर दिया गया है जिनसे जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण, और महासागरों व वनों के स्वास्थ्य की रक्षा करने जैसे जटिल मुद्दों से निपटने में मदद मिले.