2050 तक, उपचार के अभाव में, ढाई अरब लोगों की श्रवण क्षमता खोने का ख़तरा

3 मार्च 2021

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में, हर चार में से एक व्यक्ति, यानि लगभग 25 प्रतिशत आबादी, किसी ना किसी हद तक, श्रवण क्षमता में कमी की अवस्था के साथ जी रही होगी. यूएन एजेंसी ने, बुधवार, 3 मार्च, को ‘विश्व श्रवण दिवस’ के अवसर पर पहली बार, इस विषय में एक रिपोर्ट जारी की है. 

रिपोर्ट दर्शाती है कि अगले 30 वर्षों से भी कम समय में, दुनिया भर में, लगभग ढाई अरब लोगों की सुनने की क्षमता खो जाने का ख़तरा है.   

समुचित कार्रवाई के अभाव में, इनमें से, कम से कम 70 करोड़ लोगों को, कानों की व श्रवण क्षमता की देखभाल सहित, अन्य पुनर्वास सेवाओं की आवश्यकता होगी. 

यह संख्या, मौजूदा 43 करोड़ प्रभावित लोगों की संख्या से कहीं ज़्यादा है, जिनके सुनने की शक्ति, अक्षमता का एहसास कराने की हद (Disabling hearing loss) तक चली गई है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “सुनने की हमारी क्षमता मूल्यवान है. अगर नहीं सुन पाने की अवस्था का उपचार ना किया जाए, तो लोगों की प्रेषण क्षमता, अध्ययन और आजीविका कमाने पर विनाशकारी असर पड़ता है.” 

“इससे लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और रिश्ते निभाने की योग्यता भी प्रभावित हो सकती है.”

नई रिपोर्ट में श्रवण शक्ति के खोने की चुनौती से निपटने और उसकी रोकथाम के लिये, कानों और श्रवण क्षमता देखभाल सम्बन्धी सेवाओं में निवेश किये जाने की पुकार लगाई गई है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि इस सम्बन्ध में, हर एक डॉलर का निवेश किये जाने पर, 16 डॉलर की बचत हो सकती है. 

विकलाँगता की हद तक सुनने की क्षमता खोने वाले अधिकांश लोग, निम्न और मध्य आय वाले उन देशों में रहते हैं, जहाँ नीतियों, प्रशिक्षित पेशेवरों, मूलभूत ढाँचे, और बुनियादी जागरूकता का अभाव है.

यूएन एजेंसी के असंचारी रोग विभाग में निदेशक बेन्टे मिकेलसन ने बताया कि कान और श्रवण शक्ति देखभाल हस्तक्षेपों को, राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल किये जाने, और सार्वजनिक स्वास्थ्य कवरेज के ज़रिये उपबल्ध बनाकर, इसके पीड़ितों या उसका जोखिम झेल रहे लोगों की मदद की जा सकती है. 

रोकथाम उपाय

बच्चों में सुनने की क्षमता खोने के लगभग 60 प्रतिशत मामलों की रोकथाम, हल्का ख़सरा (Rubella) और मस्तिष्क ज्वर (Meningitis) के लिये टीकाकरण, बेहतर मातृत्व व नवजात शिशु देखभाल, और ओटिटिस मीडिया (कान में सूजन आना) की शुरुआती जाँच व प्रबन्धन के ज़रिये की जा सकती है.

वयस्कों में, शोर पर नियन्त्रण करने, सुरक्षित ढँग से सुनने और कानों पर ज़हरीला असर डालने वाली दवाओं की निगरानी और स्वच्छता बरते जाने से श्रवण क्षमता पर पड़ने वाले असर को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है. 

सुनने की क्षमता पर असर और सम्बन्धित बीमारियों के उपचार के लिये पहला क़दम, समस्या की शिनाख़्त करना है.

यूएन एजेंसी के मुताबिक, जीवन में अहम पड़ावों पर जाँच कराया जाना, इसकी रोकथाम सुनिश्चित कर सकता है, बशर्ते कि कानों की बीमारियों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके. 

हाल के समय में टैक्नॉलॉजी क्षेत्र में प्रगति के फलस्वरूप, सटीक और इस्तेमाल किये जाने में आसान औज़ारों के ज़रिये, कानों की बीमारियों और किसी भी आयु में श्रवण क्षमता में कमी को पहचाना जा सकता है. 

एक बार रोग की पहचान होने के बाद, जल्द से जल्द उपचार अहम है. 

चिकित्सा के ज़रिये कान सम्बन्धी अधिकतर रोगों का इलाज किया जा सकता है, और जिन मामलों में, श्रवण शक्ति के खोने के बाद, उसे ठीक नहीं किया जा सकता, वहाँ पुनर्वास सेवा के ज़रिये उसके दुष्प्रभावों को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है.

सुनने में सहायक यन्त्र सहित अन्य टैक्नॉलॉजी, और उपयुक्त समर्थन सेवाओं व पुनर्वास थैरेपी की मदद से बच्चों और वयस्कों को एक समान मदद मुहैया कराई जा सकती है.

रिपोर्ट बताती है कि अनेक बधिर लोगों के लिये, स्पीच रीडिंग सहित, संकेत भाषा (Sign language) और अन्य सम्वेदक (sensory) अहम विकल्प हैं.

यही बात, सुनने में सहायक टैक्नॉलॉजी व सेवाओं, जैसे कि कैप्शनिंग की सुविधा के लिये कही जा सकती है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड