म्याँमार: रैली से पहले हिंसा की आशंका, मानवाधिकार विशेषज्ञ की कड़ी चेतावनी

16 फ़रवरी 2021

म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर टॉम एण्ड्रयूज़ ने बुधवार को यंगून में सैन्य शासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों से पहले हिंसा की आशंका जताई है. स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कड़े शब्दों में कहा है कि म्याँमार ऐसे पड़ाव पर है जहाँ सेना, जनता के ख़िलाफ़ पहले से भी बड़े अपराधों को अंजाम दे सकती है. उन्होंने ध्यान दिलाया है कि स्थानीय लोगों की बुनियादी स्वतन्त्रता और मानवाधिकारों के दमन को तुरन्त बन्द किया जाना होगा. 

स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने मंगलवार को एक बयान जारी कर बताया कि बुधवार को रैली से पहले सैनिकों को अन्य इलाक़ों से यंगून लाये जाने की रिपोर्टें मिल रही हैं. 

स्थानीय लोगों का मानना है कि स्टेट काउन्सलर आँग सान सू ची और राष्ट्रपति विन म्यिन्त पर गुपचुप मुक़दमे की सुनवाई की शुरुआत हो गई है. 

इन अपुष्ट ख़बरों के बाद यंगून के मुख्य इलाक़े में बुधवार को एक रैली का आयोजन किया गया है, और अन्य शहरों व टाउनशिप में भी प्रदर्शन हो सकते हैं. 

सेना ने, सोमवार, 1 फ़रवरी को देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया था और अनेक राजनैतिक हस्तियों को बन्दी बना लिया था. 

इस घटनाक्रम से पहले, नवम्बर 2020 में, चुनाव हुए थे जिनमें आँग सान सू ची के नेतृत्व वाले दल नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रोसी (एनएलडी) ने बहुमत हासिल किया था.

मगर सेना ने चुनावों में धाँधली होने के आरोपों का हवाला देते हुए हुए सत्ता पर क़ब्ज़ा कर लिया और देश में एक वर्ष के लिये आपात स्थिति की घोषणा कर दी. 

विशेष रैपोर्टेयर ने आशंका जताई है कि अतीत में, सेना की ऐसी गतिविधियों की परिणति मौतों, जबरन गुमशुदगी, सामूहिक गिरफ़्तारियों की घटनाओं के रूप में होती रही है. 

यूएन विशेषज्ञ ने सरकारों, व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम एक अपील जारी करते हुए कहा है कि उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर यह सुनिश्चित करना होगा कि बुधवार को विरोध-प्रदर्शन बिना किसी हिंसा या हिरासत के सम्पन्न हों.

म्याँमार पर, स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़
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म्याँमार पर, स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञ थॉमस एण्ड्रयूज़

उन्होंने कहा कि सैन्य नेतृत्व के आदेशों को पालन करने वालों को, उनकी रैंक की परवाह किये बग़ैर, क्रूरता के लिये ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा, और इसलिये उन्हें आदेशों की ्अवहेलना करनी होगी. 

विशेष रैपोर्टेयर ने कड़े शब्दों में सचेत किया है शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की पृष्ठभूमि में ऐसे उद्यम व व्यवसाय, जोकि सैन्य शासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, उन्हें भी हिंसा में अपनी भागीदार को स्वीकारना होगा. 

मार्टिन लूथर किन्ग को याद करते हुए उन्होंने कहा, “एक ऐसा समय आता है, जब चुप्पी धोखे के समान होती है.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि म्याँमार की जनता की बुनियादी स्वतन्त्रता और मानवाधिकारों के दमन को तुरन्त बन्द करना होगा. 

इससे पहले, यूएन प्रमुख के प्रवक्ता ने रविवार को एक बयान जारी कर म्याँमार में हिंसा के जारी रहने, लोगों को डराए-धमकाए जाने और सुरक्षाकर्मियों द्वारा उत्पीड़न के मामलों को अस्वीकार्य क़रार दिया. 

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि राजनैतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों, नागरिक समाज कार्यकर्ताओं, और मीडिया प्रतिनिधियों की गिरफ़्तारियाँ और इण्टरनेट व संचार सेवाओं पर लगी पाबन्दियां बेहद चिन्ताजनक है. 

स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं.

 

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