जलवायु परिवर्तन: यूएन प्रमुख की चेतावनी, संकल्प पूर्ति में, 2021 बहुत अहम वर्ष

जलवायु परिवर्तन के कारण, जो प्रभाव नज़र आ रहे हैं, उनमें दक्षिण प्रशान्त का तुवाली द्वीप, समुद्रों में बढ़ते जलस्तर के जोखिम से प्रभावित होने वाले स्थानों में शामिल है.
UNDP/Silke von Brockhausen
जलवायु परिवर्तन के कारण, जो प्रभाव नज़र आ रहे हैं, उनमें दक्षिण प्रशान्त का तुवाली द्वीप, समुद्रों में बढ़ते जलस्तर के जोखिम से प्रभावित होने वाले स्थानों में शामिल है.

जलवायु परिवर्तन: यूएन प्रमुख की चेतावनी, संकल्प पूर्ति में, 2021 बहुत अहम वर्ष

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विश्व, जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते की शर्तों के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि में कमी लाने के सहमत लक्ष्य हासिल करने के रास्ते पर अभी बहुत पीछे है. महासचिव ने,  ये चेतावनी भरी बात, जलवायु संकट से बचने में, ज़्यादा महत्वाकाँक्षी प्रतिबद्धताएँ हासिल करने की अपनी कोशिशों के तहत, सोमवार को कही. 

यूएन प्रमुख ने, नवम्बर 2021 में, स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में होने वाले जलवायु सम्मेलन - कॉप26 की तैयारियों के लिये, सोमवार को आयोजित एक बैठक में, सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए ये बात कही है.

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, ये सम्मेलन 2020 में होना था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे वर्ष 2021 के लिये स्थगित करना पड़ा.

‘लक्ष्यों से बहुत दूर’

यूएन प्रमुख ने पिछले वर्ष के दौरान हुई प्रगति को पहचान देते हुए ये भी दर्ज किया कि कार्बन उत्सर्जन में कमी हुई है, मगर साथ ही ये भी कहा कि ये पर्याप्त नहीं है.

उन्होंने सदस्य देशों के राजदूतों से कहा, “दुनिया, पेरिस समझौते में निर्धारित, तापमान वृद्धि की दर 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य से, अभी बहुत दूर है.”

“इसलिये ये बहुत आवश्यक है कि हमें और ज़्यादा महत्वाकाँक्षी होना होगा - जलवायु परिवर्तन का असर कम करने के उपायों में ज़्यादा महत्वकाँक्षा, ख़ुद को जलवायु के अनुरूप ढालने के प्रयासों में ज़्यादा महत्वाकाँक्षा और वित्त मामलों में भी और अधिक महत्वाकाँक्षा.”

जर्मनी के ऐरलांगन शहर में प्रदर्शन.
Unsplash/Markus Spiske
जर्मनी के ऐरलांगन शहर में प्रदर्शन.

यूएन महासचिव ने जलवायु परिवर्तन का मुक़ाबला करने के प्रयासों में, 2021 को एक अति महत्वपूर्ण वर्ष क़रार देते हुए, सदस्यों देशों की तरफ़ उम्मीद की नज़र टिकाई कि वो, ग्लासगो जलवायु सम्मेलन की तरफ़ जाने वाले रास्ते पर इसी भावना को आगे बढ़ाएँगे.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकता को सामने रखते हुए कहा कि शून्य कार्बन उत्सर्जन को एक वास्तविकता बनाने के लिये, वैश्विक गठबन्धन को आगे बढ़ाना होगा, ताकि वातावरण में दाख़िल होने वाले कार्बन 90 प्रतिशत से भी अधिक हिस्से को कम करने के लक्ष्य पर नज़र टिकाई जा सके. 

यूएन प्रमुख ने देशों से आग्रह करते हुए कहा कि संकल्पों के समर्थन में स्पष्ट और भरोसेमन्द योजनाएँ पेश करनी होंगी और उन पर अमल करना होगा, जैसाकि पेरिस समझौते में प्रावधान किया गया है. “बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों और जी-20 संगठन के सदस्य देशों को, इस क्षेत्र में मिसाल क़ायम करनी होगी.”

बेहतर करने का नैतिक दायित्व

महासचिव ने कहा कि कोयला ईन्धन प्रयोग को वर्ष 2040 तक समाप्त करने के लक्ष्य पर काम करना होगा, और कोयला व अन्य जीवाश्म ईन्धन पर ख़र्च किया जाने वाला धन, दरअसल, स्वच्छ ऊर्चा समाधानों की तरफ़ मोड़ना होगा.

एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु अनुकूलन, लचीलेपन व मज़बूती क्षमता हासिल करने के प्रयासो में भी साहस दिखाने का आहवान किया, जिसमें कमज़ोर देशों को सहायता व समर्थन बढ़ाना शामिल है. इनमें दुनिया के कम विकसित देश और लघु द्वीपीय विकासशील देश प्रमुख हैं.

यूएन प्रमुख ने कहा, “बेहतर प्रयास व कामकाज करना, और नए व ज़्यादा प्रतिबद्धताओं वाली वित्तीय कार्यक्रमों पर अमल करना, हमारा नैतिक दायित्व है.”

उन्होंने कहा, “विकसित देशों को अपनी उन प्रतिबद्धताओं पर अमल करना होगा, जो उन्होंने 10 वर्ष पहले व्यक्त की थीं और पेरिस समझौते में भी जिन पर बल दिया गया था. इन प्रतिबद्धताओं में, विकासशील देशों को जलवायु वित्तीय सहायता के रूप में, प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर की रक़म मुहैया कराना शामिल है.”

“ये प्रतिबद्धताएँ, कॉप26 सम्मेलन के रास्ते पर चलते हुए, अवश्य पूरी होनी चाहियें.”

महामारी कोई बाधा नहीं

ग्लासगो सम्मेलन होने में 9 महीने बाक़ी होने और कोविड-19 महामारी द्वारा व्यवधान खड़े किये जाने के मद्देनज़र, एंतोनियो गुटेरेश ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा, इस जलवायु सम्मेलन के लिये तैयारियों सम्बन्धी बातचीत व बैठकें, वर्चुअल और ऑनलाइन माध्यमों के ज़रिये कराने का संकल्प दोहराया. 

उन्होंने कहा, “हम महामारी को, ग्लासगो के महत्वपूर्ण रास्ते पर आगे बढ़ने के लिये, हमें साथ मिलकर काम करने में रुकावट पैदा करने की अनुमति नहीं दे सकते. निसन्देह, चुनौतियाँ होंगी, मगर हमें उन पर पार पाना होगा. क्योंकि ऐसा नहीं करने के परिणाम व प्रभाव बहुत गम्भीर होंगे.”

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर में, तमाम यूएन अधिकारियों को ये हिदायत दी है कि वो कार्यालयों व स्थानों को इस तरह से उपलब्ध कराएँ ताकि तमाम देश, वर्चुअल वार्ताओं में शिरकत कर सकें.

उन्होंने कहा, “हम इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिये, इसे हर सम्भव व भरपूर समर्थन और सहयोग देंगे.”