'यूएन महासागर विज्ञान दशक’ - चुनौतियों व अवसरों पर चर्चा

अनेक देशों में लोग अपने भोजन व आजीविका के लिये महासागरों पर आश्रित हैं.
Coral Reef Image Bank/Philip Ham
अनेक देशों में लोग अपने भोजन व आजीविका के लिये महासागरों पर आश्रित हैं.

'यूएन महासागर विज्ञान दशक’ - चुनौतियों व अवसरों पर चर्चा

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने कहा है कि जनवरी 2021 एक बेहद अहम दशक (2021-2030) की शुरुआत को परिलक्षित करता है जिसके ज़रिये टिकाऊ विकास के लिये महासागरों की रक्षा के प्रयास किये जा रहे हैं. यूनेस्को ने बुधवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें अगले दस वर्षों में अहम कार्रवाई को आगे बढ़ाने और महासागरों से उपजती चुनौतियों व अवसरों पर चर्चा हुई. 

यूनेस्को ने इस क्रम में बुधवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम ‘A Brave New Ocean’ आयोजित किया जिसके साथ ही ‘टिकाऊ विकास के लिये महासागर विज्ञान के यूएन दशक’ (UN Decade of Ocean Science for Sustainable Development) की शुरुआत हो गई है. 

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इसका लक्ष्य टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में महासागरों से उपजने वाले अवसरों व चुनौतियों के प्रति जागरूकता का प्रसार करना है. 

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्री अज़ोले ने कार्यक्रम से पहले कहा, “तीसरा सदी की शुरुआत में, समुद्र विज्ञान के पास समस्याओं की शिनाख़्त करने और समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता है, बशर्ते कि हम उनके योगदान की अनदेखी करना बन्द करें.”

वर्ष 2021 को महासागरों के लिये एक बेहतरीन वर्ष (Super year) क़रार दिया गया है. 

यूनेस्को के अनुसार यह वर्ष स्वस्थ पृथ्वी के लिये संयुक्त राष्ट्र के व्यापक संकल्प की शुरुआत को इंगित करता है. 

बताया गया है कि महासागरों के दशक के ज़रिये देशों के पास साथ मिलकर काम करने का एक अवसर है जोकि जीवन में एक बार भी आता है. 

समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप वैश्विक महासागर विज्ञान का लाभ उठाने की योजना है ताकि साझा महासमुद्रों का टिकाऊ विकास सुनिश्चित किया जा सके.

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि महासागरों की रक्षा और उनका सतत प्रबन्धन बेहद अहम है – भोजन व आजीविका के लिये, और जलवायु व्यवधान व अन्य सम्बन्धित त्रासदियों से निपटने के लिये. 

“मानवता को पोषित और जलवायु को नियमित करने में महासागरों की क्षमता की पुनर्बहाली एक निर्धारक चुनौती है.”

प्रकृति के साथ निकट सम्बन्ध

उन्होंने आग्रह किया कि प्रकृति के साथ समरसता क़ायम करनी होगी ताकि सर्वजन के लिये एक समृद्ध और न्यायोचित विश्व सुनिश्चित किया जा सके, और किसी को भी पीछे ना छूटने दिया जाए. 

बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में विश्व नेताओं, वैज्ञानिकों, यूएन एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों और खेल जगत से जुड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया जोकि महासागर कार्रवाई से जुड़ी हैं.

यूएन एजेंसी प्रमुख ऑड्री अज़ोले ने बताया कि कोरोनावायरस के उभरने के बाद जैसे-जैसे दुनिया नए हालात में ढल रही है, महामारी के बाद पुनर्बहाली प्रयासों में महासागर विज्ञान की अहम भूमिका होगी. 

इस कार्यक्रम का आयोजन यूनेस्को के अन्तरसरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (Intergovernmental Oceanographic Commission) ने किया जिसमें सभी आयु वर्गों और महाद्वीपों से कार्यकर्ताओं को साथ लाने के रास्तों पर चर्चा हुई.  

महासागर दशक के तहत आयोजनों की कड़ी में यह पहला कार्यकम था जिसका उद्देश्य महासागरों के स्वास्थ्य व उनसे सम्बन्धित वैज्ञानिक जानकारी को बढ़ावा देना और जलवायु चुनौतियों के सन्दर्भ में उनके टिकाऊ व न्यायसंगत इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना था.