WHO की चेतावनी – कैंसर मरीज़ों की देखभाल पर कोविड-19 का गहरा असर

2 फ़रवरी 2021

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से दुनिया भर में कैंसर बीमारी के निदान और उपचार पर भारी असर हुआ है और इससे लगभग सभी देश प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी  4 फ़रवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ से पहले,  मंगलवार को बताया कि अब, स्तन कैंसर के मामले सबसे अधिक संख्या में सामने आ रहे हैं. 

कोरोनावायरस संकट के शुरू होने के एक वर्ष बाद, इस महामारी का कैंसर मरीज़ों की देखभाल पर भारी असर देखने में आया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन में ग़ैर-संचारी रोगों के विभाग में डॉक्टर आन्द्रे इलबावी ने बताया कि महामारी के कारण 50 फ़ीसदी देशों में कैंसर सेवाओं में आंशिक या पूर्ण रूप से व्यवधान आया है. 

“निदान में देरी होना सामान्य बात है. उपचार में व्यवधान आने या उसके रुक जाने के मामले भी बहुत बढ़े हैं.” 

यूएन स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा कि इसका असर, आने वाले वर्षों में कैंसर मौतों की संख्या में बढ़ोत्तरी के रूप में हो सकता है. 

“स्वास्थ्य देखभालकर्मियों पर सेवाएँ प्रदान करने का भारी दबाव रहा है और शोधकार्य व क्लीनिकल परीक्षण में पंजीकरण पर भी असर पड़ा है.”

“सरल शब्दों में कहें तो, कैंसर पर क़ाबू पाने के प्रयासों पर, महामारी के गहरे नतीजे रहे हैं.”

यूएन एजेंसी के मुताबिक सभी आय स्तरों वाले देशों में यह असर देखने को मिला है, हालाँकि कुछ धनी देशों ने हालात पर बहुत हद तक नियन्त्रण कर लिया है. 

उदाहरणस्वरूप, नैदरलैण्ड्स में, कैंसर के सम्भावित लक्षणों वाले लोगों के निदान व उपचार को तेज़ी से सुलभ बनाने के वास्ते, विशेष कार्यक्रम शुरू किये गए हैं.

अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कैंसर मरीज़ों के लिये कौन सी कोविड-19 वैक्सीन सबसे फ़ायदेमन्द होगी. 

कैंसर के मरीज़ों को कोविड-19 का गम्भीर संक्रमण होने का ख़तरा अधिक है और कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज़ों के स्वास्थ्य और निर्बलताओं के मद्देनज़र यह जानना अहम होगा. 

लेकिन इस क्रम में वैक्सीन परीक्षणों के नतीजे अभी प्रकाशित किये जाने हैं.  

इलाज की ऊँची क़ीमत

यूएन एजेंसी के मुताबिक समुदायों पर कैंसर का आर्थिक बोझ बहुत ज़्यादा है और ये लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2020 में इसकी क़ीमत एक ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा आँकी गई थी. 

डॉक्टर इलबावी ने बताया, “वर्ष 2020 में दुनिया भर में, एक करोड़ 93 लाख कैंसर मरीज़ों का पता चला जबकि इससे होने वाली मौतें बढ़कर एक करोड़ हो गईं.”
यूएन एजेंसी के मुताबिक़ वर्ष 2020 में स्तन कैंसर के 23 लाख नए मामले सामने आए, जोकि कुल मामलों का लगभग 12 फ़ीसदी हैं. 

महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के लिये सबसे बड़ा कारण स्तन कैंसर है.

डॉक्टर इलबावी ने गुरुवार को ‘विश्व कैंसर दिवस’ से पहले, जिनीवा से सम्बोधित करते हुए कहा कि यह पहली बार जब स्तन कैंसर के मामले सबसे बड़ी संख्या में देखने को मिल रहे हैं. 

इससे पहले फेफड़ों का कैंसर सबसे प्रमुख कारण था. 

विश्वव्यापी बोझ

यूएन एजेंसी अधिकारी ने सचेत किया है कि आने वाले समय में अनेक कारणों से कैंसर का बोझ बढ़ने की आशंका है. जनसंख्या वृद्धि इसकी एक प्रमुख वजह है – वर्ष 2040 में 2020 की तुलना में 47 प्रतिशत ज़्यादा मामलों का पता चलने की सम्भावना है.

सर्वाईकल कैंसर महिलाओं में कैंसर का चौथा सबसे बड़ा कारण है – वर्ष 2020 में छह लाख से ज़्यादा मामले सामने आए, लेकिन वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर सात लाख तक पहुँच जाने की सम्भावना है, जबकि हर वर्ष चार लाख मौतों की आशंका है. 

इन मामलों में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी, निम्न और मध्य आय वाले देशों में होगी जहाँ बीमारी का अक्सर देर से पता चलता है और गुणवत्तापूर्ण व सस्ता उपचार भी उपलब्ध नहीं है. 

निर्धन देशों में भी कैंसर मरीज़ों पर इसका अनुपात की तुलना में अधिक असर होगा. 

 

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