कोविड-19: दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में टीकाकरण की अभूतपूर्व तैयारी 

13 जनवरी 2021

भारत, इण्डोनेशिया सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिये व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान की तैयारियाँ चल रही हैं जिनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन का क्षेत्रीय कार्यालय हरसम्भव सहायता प्रदान कर रहा है. इस क्षेत्र में स्थित देशों में पोलियो उन्मूलन अभियान में सफलता मिली थी और उस मुहिम के अनुभव व सबक़ का इस्तेमाल कोरोनावायरस से निपटने के लिये भी किया जा रहा है.

 दस वर्ष पहले 2011 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय ने जंगली पोलियो वायरस (Wild Poliovirus) का आख़िरी मामला भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में पता चलने की पुष्टि की थी. 

पिछले एक दशक में पोलियो का कोई नया मामला क्षेत्र में सामने नहीं आया है.

पोलियो अभियान की सफलता के बाद इस क्षेत्र में स्थित देश एक बार फिर व्यापक स्तर पर टीकाकरण की तैयारियों में जुटे हैं और इस क्रम में पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से लिये गये अनुभवों को फिर समझा जा रहा है. 

कोविड-19 महामारी से निपटने और बचाव के लिये टीकाकरण कार्यक्रम का स्तर और दायरा पोलियो टीकाकरण से कहीं बड़ा होगा.

यूएन एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय में निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने बताया, “हम सदस्य देशों द्वारा अभूतपूर्व प्रयासों को देख रहे हैं जो वैक्सीन के ज़रिये अपने जनसमूहों की कोविड-19 से रक्षा करना चाहते हैं.” 

टीकाकरण अभियान की शुरुआत

इण्डोनेशिया में टीकाकरण बुधवार को शुरू हो गया जबकि भारत में 16 जनवरी से शुरू होने वाले अभियान की विशाल तैयारियाँ चल रही हैं जिसे दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम के तौर पर देखा जा रहा है.  

अन्य देशों में आगामी दिनों में वैक्सीन दिये जाने की मुहिम को आगे बढ़ाया जायेगा. 

कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में सुरक्षित और असरदार बेहद मददगार साबित हो सकती हैं, बशर्ते के वे दुनिया भर में उपलब्ध हों और सभी निर्बल समुदायों की उन तक पहुँच हो. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन क्षेत्र में स्थित देशो के साथ कोविड-19 के लिये वैक्सीन योजना को आगे बढ़ाने के लिये साथ मिलकर काम कर रहा है. 

इसके तहत एक राष्ट्रीय तैनाती और टीकाकरण योजना को तैयार किया जा रहा है जहाँ वैक्सीन वितरण की योजना व उसके प्रबन्धन पर ख़ासा ध्यान दिया गया है. 
भारत, बांग्लादेश, म्याँमार और नेपाल सहित अन्य देशों में इस प्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारियों का नैटवर्क मुस्तैद है.

इसी नैटवर्क के योगदान के परिणामस्वरूप पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम में सफलता हासिल हुई थी और इसी की मदद से ज़िला स्तर पर कोविड-19 टीकाकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जायेगा.

पोलियो उन्मूलन अभियान के अनुभव से लिये गये सबक पर आधारित सर्वश्रेष्ठ समाधानों और अभियान सम्बन्धी दिशानिर्देशों को भी उपलब्ध कराया गया है. 

इसके अतिरिक्त टीकाकरण में जुटे कर्मियों की ट्रेनिंग, वैक्सीन वितरण की योजना और तैयारी सम्बन्धी गतिविधियों की निगरानी का भी प्रबन्ध किया गया है. 

ऐहतियाती उपाय भी ज़रूरी 

उम्मीद जताई जा रही है कि वैक्सीन की मदद से कोविड-19 महामारी पर काफ़ी हद तक क़ाबू पाने में सफलता मिलेगी. 

लेकिन विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि शुरुआत में उनकी आपूर्ति व संख्या सीमित है, इसलिये महज़ सीमित संख्या में दिये जाने भर से चुनौती को हल नहीं किया जा सकता. 

इसे ध्यान में रखते हुए सभी ऐहतियाती उपायों का आने वाले हफ़्तों और महीनों में भी पालन करने के लिये कहा गया है, जैसेकि मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता सुनिश्चित करना, छींकते या खाँसते हुए मुँह ढँकना और शारीरिक दूरी को बरता जाना.

इसके समानान्तर स्थानीय प्रशासनिक अमले के लिये परीक्षण करना, संक्रमणों का पता लगाना, संक्रमितों को अलग रखना और उनका उपचार करना, व उनके सम्पर्क में आये लोगों का पता लगाने की प्रक्रिया को जारी रखना अहम होगा. 

इससे संक्रमितों की संख्या और बीमारी से होने वाली मौतों को कम किया जा सकेगा. 

वायरस के फैलाव को रोकने के नज़रिये से ऐहतियाती उपायों के लिये सामुदायिक स्तर पर लोगों की हिस्सेदारी को अहम बताया गया है. 

 

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