सूडान: दारफ़ूर मिशन समाप्ति के बाद भी सहायता का संकल्प

31 दिसम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव और अफ्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष ने सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में, इन दोनों संगठनों का संयुक्त सहायता मिशन गुरूवार, 31 दिसम्बर को ख़त्म हो जाने के बाद भी, वहाँ शान्ति और सामान्य स्थिति को मज़बूत करने में अपना योगदान जारी रखने का आश्वासन दोहराया है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश और अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष मूसा फ़ाकी महमत ने गुरूवार को एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया.

वक्तव्य में, सूडान में सभी पक्षों से ये आग्रह भी किया कि वो दारफ़ूर में अफ्रीकी संघ और संयुक्त राष्ट्र के संयुक्त सहायता मिशन (UNAMID) के अभियान 31 दिसम्बर को बन्द हो जाने के बाद भी, अगले छह महीनों के दौरान इसकी तमाम तरह की मौजूदगी को समेटने के लिये सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल सुनिश्चित कराते रहें.

वक्तव्य में कहा गया है, “ये संयुक्त सहायता मिशन शुरू किया जाना, एक ऐतिहासिक गतिविधि थी, संगठन व शान्तिरक्षकों और पुलिस की संख्या, दोनों के नज़रिये से. अनेक देशों और दानदाताओं ने दारफ़ूर में आम आबादी को सुरक्षा मुहैया कराने और शान्ति निर्माण कार्यों में मदद करने के लिये सामूहिक प्रयासों में शिरकत की है.”

“अध्यक्ष और महासचिव अपना ये संकल्प दोहराते हैं कि सूडान में शान्ति निर्माण प्रयासों में हासिल की गई प्रगति और वहाँ के लोगों और सरकार की सहायता करना जारी रखेंगे. साथ ही नागरिक सुरक्षा पर कार्रवाई के लिये राष्ट्रीय योजना को लागू करने में भी सहायता जारी रखी जाएगी.”

संस्थापना व शासनादेश

यूएन सुरक्षा परिषद ने सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में, सहायता मिशन की स्थापना, जुलाई 2007 में की थी. उससे पहले वहाँ गम्भीर संकट जारी था.

इस मिशन का शासनादेश (Mandate) – सूडान सरकार की ज़िम्मेदारी के बारे किसी पूर्वाग्रह के बिना, आम लोगों को सुरक्षा मुहैया कराना. साथ ही मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति करना और सहायता कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इसका मक़सद था.

इस मिशन की ज़िम्मेदारियों में सूडान सरकार और दारफ़ूर में शान्ति के लिये दोहा दस्तावेज़ के आधार पर सुलह-सफ़ाई और मध्यस्थता कराना भी शामिल था. 

साथ ही, समुदायों के स्तर पर संघर्ष को ख़त्म करने में मध्यस्थता प्रयासों में सहायता करना भी इसकी ज़िम्मेदारियों में शामिल था, संघर्ष के मूल कारणों को समझना व उनका हल निकालने के उपाय भी इसमें शामिल थे.

इस मिशन के लिये, स्वीकृत कार्यक्षमता में 4050 सैन्यकर्मी (शान्तिरक्षक) और 2500 पुलिस सलाहकार व संगठित पुलिस इकाइयाँ थीं.

मिशन के अनुसार, इसमें मौजूदा तैनाती में, 4005 सैन्यकर्मी (शान्तिरक्षक), 480 पुलिस सलाहकार, 1631 संगठित पुलिस ईकाइ अधिकारीगण, 483 अन्तरराष्ट्रीय सिविल कर्माचारी, 64 यूएन स्वैच्छिक कार्यकर्ता, और 945 राष्ट्रीय सिविल कर्मचारी शामिल थे.

मिशन के सिविल और वर्दीधारी कर्मचारियों में 288 को सर्वोच्च बलिदान देना पड़ा, जिनमें से 73 की मौत, दुर्भावना वाले कृत्यों के परिणामस्वरूप हुईं.

 

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