कोविड-19 के दौरान घरेलू हिंसा बढ़ोत्तरी से निपटने के लिये यूएन एजेंसियों के सक्रिय प्रयास

10 दिसम्बर 2020

वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा के मामलों में बढोत्तरी दर्ज की गई और सख़्त पाबन्दियों के कारण सहायता सेवाओं की उपलब्धता भी सीमित रही है. भारत में संयुक्त राष्ट्र घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को सहारा देने वाले संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है और उन्हें हरसम्भव सहायता उपलब्ध कराने के लिये प्रयासरत है. एक रिपोर्ट... 

वर्ष 2020 के शुरुआती दिनों में पूर्वोत्तर भारत में स्थित चाय के एक बागान में मन्जीता (वास्तविक नाम नहीं) नामक एक महिला के समक्ष कठिन स्थिति पैदा हो गई.

कोविड-19 बीमारी के फैलाव के कारण तालाबन्दी लागू हो चुकी थी और उन्हें घर पर अपने ऐसे संगी के साथ रहने के लिये मजबूर होना पड़ रहा था, जो उनका उत्पीड़न कर रहा था. 

मन्जीता को किसी भी प्रकार की मदद हासिल नहीं थी. फिर एक रात मन्जीता के पति ने पिटाई करने के बाद उन्हें घर से बाहर निकाल दिया. सिर छिपाने के लिये कोई अन्य स्थान ना होने की वजह से मन्जीता ने जुगनू क्लब की एक सदस्य से सहायता की पुकार लगाई. 

जुगनू क्लब एक स्व-सशक्तिकरण समूह है जिसकी नींव असम में चाय के बागान में काम करने वाली महिलाओं और फ़ैक्ट्री कर्मचारियों ने रखी थी. 

यह समूह, महिला सशक्तिकरण के लिये प्रयासरत यूएन संस्था (UN Women) के समर्थन से, असम में चुनिन्दा स्थानों पर कृषि कार्य को सुरक्षित बनाने और सभी महिलाओं व लड़कियों के लिये समानता हेतु प्रयासों में जुटा है. 

जुगनू क्लब के सदस्यों ने मन्जीता को तत्काल मदद मुहैया कराने का आश्वासन दिया और उन्ही के एक घर में मन्जीता को रात में शरण मिल गई. 

इसके बाद मन्जीता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और पुलिस की उपस्थिति में अपने पति व उसके परिजनों के साथ बातचीत की. 

बदलाव का वाहक

अन्धेरे में चमकने वाले कीट जुगनू पर इस क्लब का नाम रखा गया जोकि महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने और उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाने का प्रतीक है. 

यह क्लब महिलाओं व लड़कियों को अपने अनुभव व चिन्ताएँ साझा करने के लिये सुरक्षित माहौल मुहैया कराता है. 

जुगनू क्लब के सदस्यों को यूएन महिला संस्था द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है.
UN Women
जुगनू क्लब के सदस्यों को यूएन महिला संस्था द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है.

इस क्लब के सदस्य उत्सवों, सामुदायिक बैठकों और अन्य आयोजनों में लघु नाटकों के ज़रिये सार्वजनिक शिक्षा का प्रसार करते हैं और चाय के बागानों में कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये अनुशंसाएँ भी पेश की गई हैं. 

कोविड-19 महामारी के दौरान इस क्लब के सदस्यों ने ज़रूरतों का दायरा बढ़ने पर अपने नैटवर्क का विस्तार करते हुए उसे मज़बूत बनाया है. 

यूएन एजेंसी ने, इस क्लब को समर्थन देने के अलावा, ग्रामीण इलाक़ों में महिला सुरक्षा के लिये फ़्रेमवर्क भी विकसित किया है जिसे तैयार करने में चाय के बागान में महिलाओं के अनुभवों से मदद मिली है. 

यूएन एजेंसियाँ लम्बे समय से लिंग आधारित हिंसा पर विराम लगाने के लिये प्रयासरत हैं. अब इस नैटवर्क की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है. 

भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की प्रतिनिधि अर्जेन्टीना मातावेल का कहना है कि कोविड-19 महामारी ने लाखों लोगों की ज़िन्दगियों व आजीविकाओं को उलटपुलट कर रख दिया है. 

कोविड-19 के दौरान सरकार द्वारा संचालित ‘वन स्टॉप’ केन्द्र (One-stop centers) भी सक्रिय रहे हैं जिसमें हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं की सहायता की जाती है. 

समन्वित प्रयास

ऐसा ही एक केन्द्र, उड़ीसा के कटक शहर में है जहाँ आपात आवास, परामर्श और अन्य सेवाएँ प्रदान की जाती हैं.

इस केन्द्र में कार्यरत सौम्या साहू ने बताया, “मैं पीड़ितों की बात सुनती हूँ, उनकी कहानियों को समझती हूँ, परामर्श देती हूँ, और यह सुनिश्चित करती हूँ कि केन्द्र पर कर्मचारी उन्हें हर ज़रूरी देखभाल और समर्थन प्रदान कर सके.”

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष संकट परामर्श व अन्य सेवाओं के लिये कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहा है.
UN Women
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष संकट परामर्श व अन्य सेवाओं के लिये कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहा है.

उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी ज़िम्मेदारी है और ऐसे केन्द्र इसे अपने आप नहीं कर सकते. 

इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस, ज़िला स्तर पर क़ानूनी सेवा प्राधिकरण, महिलाओं की स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण बाल देखभाल केन्द्रों पर कॉलेज छात्रों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है. 

इन केन्द्रों को यूएन एजेंसी से भी सहायता मिली है और इन प्रयासों के तहत कर्मचारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य लोगों को प्रशिक्षण व अन्य मदद दी गई है. 

सौम्या साहू का कहना है कि कोरोनावायरस संकट के दौरान महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा रुकी नहीं है. 

“हमने अपना केन्द्र खुला रखा और तालाबन्दी के दौरान भी सेवाएँ प्रदान करना जारी रखा.”

“मेरा स्टाफ़ और मैं नियमित रूप से स्कूल, कॉलेज, नर्सिंग संस्थान और अन्य इलाक़ों में जाते हैं, जहाँ हम, लोगों से बातचीत करते हैं और लैंगिक मुद्दों पर ट्रेनिंग देते हैं.”
जुगनू क्लब की एक सक्रिय सदस्य अमृता ने बताया कि कोविड-19 के कारण लागू पाबन्दियों से लोग अलग-थलग पड़ गए हैं, सेवाओं की उपलब्धता में गिरावट आई है और घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं.  

“जागरूकता ही एकमात्र रास्ता है. लोगों को यह जानने की ज़रूरत है कि घरेलू हिंसा क्या है और कार्यस्थलों को महिलाओं के लिये सुरक्षित बनाने के लिये किन क़दमों की आवश्यकता है.”

भारत में यूएन महिला संस्था की देशीय प्रतिनिधि सूज़ेन जेन फ़र्ग्युसन के मुताबिक इस ज़िम्मेदारी को निभाने में हर एक इनसान की भूमिका है. 

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित  हुआ. 

 

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