ख़ामोश महामारी: अत्यधिक प्रयोग से एण्टीमाइक्रोबियल दवाओं का घटता असर

18 नवंबर 2020

दुनिया भर में व्यक्तियों, पौधों और पशुओं की ऐसे संक्रमणों के कारण मौत हो रही है जिनका सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध दवाओं से भी उपचार नहीं किया जा सकता है. इसकी वजह सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक क्षमता (Antimicrobial resistance) का बढ़ना बताया गया है. बुधवार को ‘विश्व एण्टीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह’ की शुरुआत पर संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवँ कृषि संस्था ने यह बात कही है.     

यूएन एजेंसी के मुताबिक एण्टीबायोटिक सहित एण्टीमाइक्रोबियल दवाओं का लम्बे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है और उनका ग़लत इस्तेमाल भी हुआ है, जोकि सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक क्षमता के फैलाव का तेज़ी से विस्तार होने के लिये ज़िम्मेदार है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार एण्टीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बैक्टीरिया संक्रमणों की रोकथाम और उनका उपचार करने के लिये किया जाता है. इन्हें एण्टीमाइक्रोबियल के तहत ही शामिल किया जाता है.    

व्यक्तियों व पशुओं के बजाय बैक्टीरिया में सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक (AMR) क्षमता विकसित हुई है और वे बैक्टीरिया लोगों व जानवरों को संक्रमित कर सकते हैं. 

ऐसे बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों पर क़ाबू पाना और उपचार करना अन्य बैक्टीरिया की तुलना में मुश्किल साबित होता है. 

यूएन खाद्य एवँ कृषि एजेंसी के मुताबिक अगर इस समस्या से नहीं निपटा गया तो AMR के कारण करोड़ों लोग चरम ग़रीबी, भुखमरी और कुपोषण के गर्त में धँस सकते हैं. 

उपमहानिदेशक मारिया हेलेना सेमेदो ने कहा, “कोविड-19 महामारी की तरह, AMR अब एक भावी ख़तरा नहीं है. यह यहाँ अभी हो रहा है और हम सभी को प्रभावित कर रहा है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ज़ोर देकर कहा है कि AMR सामान्य संक्रमणों का उपचार भी कठिन बनाता है और बीमारी के फैलने, उसके गम्भीर रूप धारण करने और मौत होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 

वैश्विक स्वास्थ्य व विकास के लिये ख़तरा

बैक्टीरिया, वायरस, फफूँद (Fungi) या परजीवी (Parasites) में समय के साथ आने वाले बदलावों और दवाओं का उन पर असर ना होने की वजह से सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इससे वैश्विक स्वास्थ्य और विकास के लिये ख़तरा पैदा हो गया है.   

व्यक्तियों, मवेशियों और कृषि में दवाओं के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल और स्वच्छ पानी व साफ़-सफ़ाई की सुलभता के अभाव से दुनिया भर में AMR का जोखिम बढ़ा है. 

यूएन एजेंसी के मुताबिक AMR नियामकों और निरीक्षण की कमी के कारण एण्टीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है और नुस्ख़े के बिना और ऑनलाइन पर ख़राब गुणवत्ता से फ़र्ज़ी उत्पादों का भी इस्तेमाल बढ़ रहा है.

उपमहानिदेशक सेमेदो ने कहा, “दुनिया भर में इनसान, पशु और पौधे ऐसे संक्रमणों से मौत का शिकार हो रहे हैं जिनका उपचार नहीं किया जा सकता – हमारे सबसे मज़बूत सूक्ष्मजीवीरोधी उपचारों के बावजूद.”

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने AMR को उन 10 सार्वजनिक स्वास्थ्य ख़तरों की सूची में शुमार किया है जो मानवता के समक्ष चुनौती के रूप में मौजूद हैं. 

इससे वैश्विक स्वास्थ्य, विकास, टिकाऊ विकास लक्ष्यों और अर्थव्यवस्था पर ख़ासा असर पड़ने की आशंका है.

यूएन विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर AMR पर क़ाबू नहीं किया गया तो अगली महामारी बैक्टीरिया के कारण हमारे सामने आ सकती है, जो ज़्यादा घातक होगी और जिसके इलाज में दवाएँ काम नहीं आएँगी. 

‘विश्व एण्टीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह’ के ज़रिये आम लोगों, स्वास्थ्यकर्मियों और नीतिनिर्धारकों में AMR की चुनौती और उसका मुक़ाबला करने के लिये सर्वश्रेष्ठ उपायों के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है. 

क्या आप जानते हैं?

- दवा-प्रतिरोधक बीमारियों के कारण हर वर्ष कम से कम सात लाख लोगों की मौत होती है. 

- अगले 10 वर्षों में बढ़ती जनसंख्या और मानव ज़रूरतों को पूरा करने के लिये मवेशियों में एण्टीमाइक्रोबियल का इस्तेमाल दोगुना होने की सम्भावना है.

इन 10 वर्षों में लगभग ढाई करोड़ लोग AMR के कारण चरम ग़रीबी का शिकार हो सकते हैं. 

- यूएन खाद्य एवँ कृषि एजेंसी अफ़्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में 40 से ज़्यादा परियोजनाओं पर काम कर रहा है ताकि खाद्य एवँ कृषि समुदायों को आवश्यक समर्थन व एण्टीमाइक्रोबियल का इस्तेमाल ज़िम्मेदार ढँग से किये जाने के लिये प्रोत्साहित किया जा सके. 

 

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