WHO: पथभ्रष्ट राष्ट्रवाद को नकारने और घावों पर मरहम लगाने का लम्हा 

9 नवंबर 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सदस्य देशों को आगाह किया है पाँच वर्ष पहले जलवायु परिवर्तन और ग़रीबी से निपटने के जिन समझौतों पर महत्वपूर्ण समझौते हुए थे, उन पर कार्रवाई वैश्विक एकजुटता के अभाव में अवरुद्ध हो गई है. उन्होंने सोमवार को विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली के सत्र को सम्बोधित करते हुए अमेरिका में निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को बधाई देते हुए उनके साथ काम करने के अवसर का स्वागत किया है. 

कोविड-19 महामारी के कारण मई 2020 में विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली के वार्षिक सत्र को सीमित कर दिया गया था जिसके बाद सोमवार को 73वें सत्र के शेष भाग की फिर शुरुआत हुई है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने ऐसेम्बली की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2015 में टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर 2030 एजेण्डा, जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता और विकास के लिये वित्तीय संसाधनों पर ‘अदीस अबाबा एक्शन एजेण्डा’ पर देशों की सरकारों में सहमति क़ायम होना एक बड़ी उपलब्धि थी. 

“उसके बाद से पथभ्रष्ट राष्ट्रवाद और अलग-थलग रहने की भावनाओं के बढते उफ़ान ने साझा उद्देश्यों के प्रति समझ को नुक़सान पहुँचाया है.”

“पेरिस समझौते को कमज़ोर किया गया है; अदीस अबाबा एक्शन एजेण्डा में लिये गये संकल्पों को पूर्ण नहीं किया जा सका है; और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति के बावजूद अक्सर हमारे प्रयास खण्डित और आपसी समन्वय के बग़ैर रहे हैं.”

कोविड-19 महामारी के कारण टिकाऊ विकास लक्ष्यों के मार्ग पर आई रूकावट 2030 एजेण्डा को हासिल करने की अहमियत को भी दर्शाती है. 

साझा उद्देश्य

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा कि ईमानदारी से यह समझने की ज़रूरत है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों की पूर्ण शक्ति व सम्भावनाओं को तभी साकार किया जा सकता है जब अन्तरराष्ट्रीय समुदाय उन साझा इरादों व प्रयोजनों पर फिर से अपनी पकड़ बनाये. 

“इसी भावना के साथ, मैं राष्ट्रपति पद के लिये निर्वाचित जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति पद के लिये निर्वाचित कमाला हैरिस को बधाई देता हूँ और उनकी प्रशासनिक टीम के साथ नज़दीकी तौर पर काम करने के लिये प्रतीक्षित हूँ.”

यूएन एजेंसी के महानिदेशक ने इस समय को सहयोग का एक नया युग क़रार दिया है जिसमें दुनिया भर में स्वास्थ्य व कल्याण पर ज़ोर दिया जायेगा. 

“यह समय दुनिया के लिये अपने घाव भरने का है – महामारी के विध्वंस से, और उन भू-राजनैतिक विभाजनों से जो हमें अस्वस्थ, असुरक्षित व अन्यायपूर्ण भविष्य के गर्त में आगे धकेल रहे हैं.”

जलवायु परिवर्तन व कार्बन उत्सर्जन में कटौती सम्बन्धी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब उसी दर से वातावरण में कार्बन डाय ऑक्साइड उत्सर्जित करने और स्वच्छ हवा में साँस ले पाना सम्भव नहीं है. इन दोनों में से एक को चुनना होगा.

“हम और गहरी होती विषमताओं के साथ शान्ति व समृद्धि के जारी रहने की अपेक्षा का जोखिम मोल नहीं ले सकते. हमें चुनना होगा.”

यूएन एजेंसी प्रमुख ने आगाह किया कि अच्छे स्वास्थ्य को विकास प्रक्रिया के एक उत्पाद के रूप में, या एक ऐसी वस्तु के रूप में नहीं देखा जा सकता जिस तक महज़ धनी लोगों की पहुँच हो. 

उनके मुताबिक आज और हर दिन, हमें स्वास्थ्य को चुनना होगा, हम एक बड़ा परिवार हैं. 
 

 

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