कोविड-19: महामारी पर क़ाबू पाने के लिये इसराइल व फ़लस्तीन के बीच सहयोग की दरकार

26 अक्टूबर 2020

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादैनॉफ़ ने सोमवार को सुरक्षा परिषद को मौजूदा हालात से अवगत कराते हुए बताया कि महामारी ने इसराइल और फ़लस्तीन, दोनों के लिये गम्भीर हालात पैदा किये हैं. उन्होंने शान्ति स्थापना के लिये हर विकल्प पर विचार किये जाने की अहमियत को रेखांकित करते हुए आगाह किया कि अस्थिरता भरे माहौल में कोरोनावायरस के फलने-फूलने का ख़तरा है.

निकोलाय म्लादैनॉफ़ ने 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद को वर्चुअली सम्बोधित करते हुए कहा कि महामारी को रोकने के लिये सुसंगत और समन्वित प्रयासों की ज़रूरत होगी.  

इस सम्बन्ध में उन्होंने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की वैश्विक युद्धविराम की अपील को ध्यान दिलाया है जिसके ज़रिये यूएन प्रमुख ने कोविड-19 महामारी से निपटने पर प्रयास केंद्रित किये जाने की पुकार लगाई है. 

उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र इसराइल और फ़लस्तीन में पारस्परिक सहयोग बढ़ाये जाने के लिये पैरवी करता रहेगा. 

इस सिलसिले में दोनों देशों से जोखिमों के असर को कम करने, ज़िंदगियाँ बचाने और उन प्रयास को कमज़ोर बनाने वाली एकतरफ़ा कार्रवाई से बचने के लिये साथ मिलकर काम करने पर बल दिया गया है. 

ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र इसराइल और ग़ाज़ा में सख़्त पाबन्दियों को लागू किया गया है और क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में आपात हालात की अवधि को बढ़ाया गया है. 

विशेष समन्वयक ने परिषद को बताया कि कोविड-19 के फिर उभार लेने से ज़मीनी स्तर पर मानवीय और आर्थिक चुनौतियाँ और भी ज़्यादा गहरा गई हैं.

यूएन की मध्यस्थता से हुए समझौतों की मदद से मरीज़ों को ग़ाज़ा से अन्य अस्पतालों में ले जा पाना और मानवीय राहत सामग्री को पहुँचाना सम्भव हुआ है. 
लेकिन फ़लस्तीनी प्रशासन अब भी इसराइल के साथ समन्वय रोकने के अपने फ़ैसले पर अडिग है.  

“संयुक्त राष्ट्र फ़लस्तीनी प्राधिकरण की भूमिका और ज़िम्मेदारियों या इसराइली सरकार का स्थान नहीं ले सकता. इस सम्बन्ध में संयुक्त राष्ट्र के लिये ज़िम्मेदारियों का बढ़ना सीमित और तयशुदा अवधि के लिये होना चाहिये.”

ग़ौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के कारण घरेलू कर राजस्व में तेज़ गिरावट आई है और फ़लस्तीनी सरकार ने इसराइल से मिलने वाले राजस्व को नकार दिया है. 

उन्होंने भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र वित्तीय संकट के समाधानों क लिये मध्यस्थता के लिये तैयार है ताकि फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा किया जा सके. 

निकोलाय म्लादैनॉफ़ ने फ़लस्तीनी नेतृत्व से इसराइल के साथ समन्वय को फिर शुरू किये जाने और राजस्व स्वीकार करने की अपील की है.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि यह धन फ़लस्तीनी जनता का है और दानदाताओं से मिलने वाली धनराशि इसका स्थान नहीं ले सकती. 

विशेष समन्वयक ने आगाह किया कि महामारी ने गम्भीर हालात पैदा किये हैं और इसलिये संघर्ष को समाप्त करने के लिये हर विकल्प पर विचार करना होगा. 
शान्ति की आशाओं के पूरा ना हो पाने के अभाव में सिर्फ़ चरमपंथियों के हाथ मज़बूत होने की आशंका जताई गई है. 

निकोलाय म्लादेनॉफ़ ने हाल के दिनों में इसराइल और बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और सूडान के बीच सम्बन्ध सामान्य होने की घोषणाओं का भी उल्लेख किया. 
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप क्षेत्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मोटे तौर पर सहमति के ज़रिये दो-राष्ट्र समाधान के प्रति संकल्प को पुष्ट किया जाना जारी है. 

इस पृष्ठभूमि में उन्होंने आशा जताई है कि इसराइल और फ़लस्तीन में शान्ति को आगे बढ़ाने के लिये सहयोग के नए रास्ते उभार लेंगे. 

 

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