करोड़ों को भरपेट भोजन मयस्सर नहीं, कोविड-19 बना मुसीबतों का पहाड़

16 अक्टूबर 2020

वर्ष 2020 के दौरान भी दुनिया भर में करोड़ों लोगों को जीने के लिये काफ़ी बुनियादी भोजन ख़ुराक भी मयस्सर नहीं है क्योंकि जलवायु परिवर्तन और आर्थिक समस्याओं ने विश्व भर में भुखमरी का स्तर बढ़ा दिया है, और कोविड-19 महामारी ने तो ग़रीबी में मुसीबतों का पहाड़ ही खड़ा कर दिया है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की एक ताज़ा रिपोर्ट में ये चिन्ता ज़ाहिर की गई है.

भोजन की एक ख़ुराक़ की क़ीमत नामक ये रिपोर्ट (Cost of a Plate of Food 2020) में उन देशों का उल्लेख किया गया है जहाँ चावल और फलियों वाली मामूली ख़ुराक भी लोगों की आमदनी की तुलना में बहुत महंगी होती है. 

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व खाद्य दिवस के मौक़े पर दिये अपने वीडियो सन्देश में बहुत बेबाक शब्दों का इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा, “बहुतायत वाली इस दुनिया में, ये बहुत दुखद है कि करोड़ों लोग अब भी हर रात भूखे पेट सोने को मजबूर हैं.”

महासचिव ने एक टिकाऊ भविष्य हासिल करने के संयुक्त राष्ट्र के सपने और लक्ष्य को हासिल करने के लिये और ज़्यादा प्रयास करने का आहवान किया, जहाँ, हर जगह, हर एक इनसान को ज़रूरत के अनुसार पोषक भोजन मिल सके. 

एंतोनियो गुटेरेश ने खाद्य प्रणालियों को ज़्यादा टिकाऊ और जलवायु परिवर्तन के झटकों के लिये सहनशील बनाए जाने की महत्ता रेखांकित करते हुए, भोजन की बर्बादी रोकने की भी पुकार लगी. उन्होंने ये सुनिश्चित किये जाने पर भी ख़ास ज़ोर दिया कि हर एक इनसान को टिकाऊ और स्वस्थ भोजन ख़ुराक उपलब्ध हो. 

संघर्ष, हिंसा और भुखमरी के बीच सम्बन्ध

दक्षिण सूडान ऐसे देशों की सूची में सबसे ऊपर है जहाँ भोजन की मामूली ख़ुराक की क़ीमत लोगों की दैनिक आमदनी की तुलना में 186 प्रतिशत होती है. ऐसे 20 देशों की सूची में से 17 देश सब सहारा अफ्रीका क्षेत्र में स्थित हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली का कहना है, “नई रिपोर्ट ने संघर्षों, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकटों के विनाशकारी प्रभाव उजागर कर दिये हैं, जिन्हें कोविड-19 महामारी ने और ज़्यादा जटिल व गम्भीर बना दिया है.”

“कमज़ोर हालात में रहने वाले लोगों को इस स्थिति का दंश सबसे ज़्यादा झेलना पड़ता है. कोरोनावायरस का क़हर शुरू होने से पहले भी उनकी ज़िन्दगियाँ तबाही के किनारे पर थीं, महामारी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भीषणतम मानवीय संकट पैदा कर दिया है.

इन लोगों की तकलीफ़ें बेतहाशा बढ़ गई हैं क्योंकि कोविड-19 ने एक मानवीय विनाश की स्थिति का जोखिम पैदा कर दिया है.”

रिपोर्ट में अनेक देशों में संघर्षों को भुखमरी का प्रमुख कारण बताया गया है क्योंकि संघर्षों के कारण बहुत से लोग अपने घरों व ज़मीनों से दूर हो जाते हैं, उनके रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं और उनकी आमदनियों में बेतहाशा कमी हो जाती है और उनकी ख़रीद क्षमता के भीतर भोजन की उपलब्धता भी कम हो जाती है.

BSWM-UNDP Philippines-GEF5 SLM Project
फ़िलीपीन्स में मक्का की खेती में महिला किसान. वहाँ टिकाऊ फ़सल के उत्पादन की तकनीकें सीख रहे हैं.

खाद्य सुरक्षा और शान्ति के बीच निकट सम्बन्ध होने पर पिछले सप्ताह तब भी ज़ोर दिया गया था जब विश्व खाद्य कार्यक्रम को भुखमरी के ख़िलाफ़ इसके असाधारण काम के लिये नोबेल शान्ति पुरस्कार देने की घोषणा की गई. 

दक्षिण सूडान में भोजन की एक ख़ुराक बहुत ज़्यादा महंगी होने के साथ-साथ पूर्वी हिस्से में हिंसा के कारण 60 हज़ार से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं. कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और ज़्यादा गम्भीर बना दिया है और वहाँ अकाल का जोखिम पैदा हो गया है.

2020 के दौरान आजीविका जोखिम

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने इस रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया है कि अगर कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिये समय रहते ठोस उपाय नहीं किये गए तो वर्ष 2020 के दौरान भी लगबघ 27 करोड़ लोगों की ज़िन्दगियाँ और आजीविकाएँ अत्यन्त गम्भीर जोखिम का सामना करेंगी, 

इस सूची में बुर्किना फ़ासो का नाम भी पहली बार शामिल हुआ है जहाँ हिंसा, संघर्ष और जलवायु परिवर्तन भुखमरी के मुख्य कारण रहे हैं. भुखमरी के संकट का सामना करने वाले लोगों की संख्या लगभग 34 लाख तक पहुँच गई है, जबकि उत्तरी प्रान्तों में लगभग 11 हज़ार लोगों को अकाल जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. 

बुरूण्डी भी इस सूची में जहाँ राजनैतिक अस्थिरता, इसका नागरिकों द्वारा विदेशों से भेजी जाने वाली राशि में भारी कमी और व्यापार व रोज़गार में व्यवधानों ने भुखमरी के हालात और गम्भीर बना दिए हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली का कहना है कि अनेक देशों में शहरी इलाक़ों में रहने वाले इलाक़ों में भी बहुत से लोक कोविड-19 के कारण नाज़ुक हालात का सामना कर रहे हैं क्योंकि बेरोज़गारी में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है.

इन हालात के कारण अब उन बाज़ारों का इस्तेमाल करने में अक्षम हैं जहाँ से वो अपने लिये भोजन ख़रीदा करते थे. 

करोड़ों लोगों के लिये एक दिन की आमदनी खो जाने का मतलब है कि उन्हें और उनके बच्चों के लिये एक दिन का भोजन नहीं मिल पाना. ऐसे हालात के कारण सामाजिक तनाव और अस्थिरता बढ़ सकते हैं. 

विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा चलाए जा रहे सहायता कार्यक्रमों के तहत ज़रूरतमन्द लोगों को खाद्य और नक़दी सहायता मुहैया कराना शामिल है, साथ ही ऐसे कार्यों में सरकारों की भी मदद की जाती है. 

एजेंसी का कहना है कि दीर्घकालीन रूप में, असरदार खाद्य प्रणालियों की ज़रूरत होगी जो किफ़ायती और पोषक भोजन उपलब्ध करा सकें. 

 

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