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WHO: टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में प्रगति पर ख़तरा

भारत में एक डॉक्टर फेफड़ों में संक्रमण की शिनाख़्त के लिये मरीज़ की छाती के एक्सरे की जाँच कर रहा है.
© UNICEF/Vinay Panjwani
भारत में एक डॉक्टर फेफड़ों में संक्रमण की शिनाख़्त के लिये मरीज़ की छाती के एक्सरे की जाँच कर रहा है.

WHO: टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में प्रगति पर ख़तरा

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि तपेदिक (टीबी) बीमारी के ख़िलाफ़ वैश्विक लड़ाई में प्रगति को बरक़रार रखने के लिये वित्तीय संसाधनों और कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने बुधवार को अपनी नई रिपोर्ट के साथ एक चेतावनी जारी करते हुए आगाह किया है कि समुचित उपायों के अभाव में टीबी की रोकथाम व उपचार के लिये निर्धारित लक्ष्यों को पाने में विफलता हाथ लगने की आशंका है.  

टीबी दुनिया की उन सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में है जिनसे हर दिन लगभग चार हज़ार लोगों की मौत होती है. 

बुधवार को जारी ‘Global Tuberculosis Report 2020’ में टीबी पर वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली उच्चस्तरीय बैठक में निर्धारित लक्ष्यों और टीबी उन्मूलन के लिये यूएन स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा किये जा रहे प्रयासों का लेखाजोखा पेश किया गया है.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वर्ष 2015 से 2019 के बीच टीबी के मामलों में 9 फ़ीसदी और उसकी वजह से होने वाली मौतों में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है. 

लेकिन इसके बावजूद टीबी का मुक़ाबला करने में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता अब भी एक चुनौती बनी हुई है.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने इन तथ्यों की जानकारी देते करते हुए कहा, “गुणवत्तापूर्ण और समय रहते निदान, रोकथाम, उपचार और देखभाल की न्यायसंगत सुलभता अब भी एक चुनौती है.”

“अगर हमें अपने लक्ष्यो 2022 तक हासिल करने हैं तो दुनिया भर में त्वरित कार्रवाई की तत्काल ज़रूरत है.”

टीबी की बीमारी ‘Mycobacterium tuberculosis’ नामक बैक्टीरिया से संक्रमित होने के कारण होती है जिसका अक्सर सर्वाधिक असर फेफड़ों पर होता है. टीबी अक्सर इसके मरीज़ों द्वारा खाँसने, छींकने या थूकने से निकलने वाली बैक्टीरिया हवा में फैलने से होती है.

टीबी का इलाज सम्भव होने के बावजूद, इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है,और यह एचआईवी संक्रमित लोगों की मौत का भी एक प्रमुख कारण है. 

विश्व में हर वर्ष टीबी से बीमार होने वाले लगभग 90 फ़ीसदी लोग 30 देशों में रहते हैं.

टीबी से ग्रस्त अधिकाँश लोग वयस्क होते हैं और महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज़्यादा मामले सामने आते हैं. 

चुनौतियाँ बरक़रार

वर्ष 2019 में क़रीब 14 लाख लोगों की मौत टीबी और उससे सम्बन्धित बीमारियों से हुई. 

यूएन एजेंसी का कहना है कि इस वर्ष जिन एक करोड़ लोगों के टीबी की चपेट में आने की आशंका है उनमें से लगभग 30 लाख लोगों के रोग का पता नहीं चल पाया और ना ही उन्हें राष्ट्रीय आधिकारिक आँकड़ों में शामिल किया गया. 

दवाओं के ख़िलाफ़ प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाली टीबी बीमारी (Drug-resistant TB) के मामलों में हालात और भी ख़राब है.

वर्ष 2019 में चार लाख 65 हज़ार ऐसे नए मामलों का पता चला और उनमें से 60 फ़ीसदी मरीज़ इलाज करा पाने में सक्षम नहीं थे.  

इथियोपिया के अदीस अबाबा में टीबी का उपचार करा रहीं दो महिलाएँ.
The Global Fund/John Rae
इथियोपिया के अदीस अबाबा में टीबी का उपचार करा रहीं दो महिलाएँ.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टीबी की रोकथाम के लिये उपचार सुलभता का दायरा बढ़ाने में सीमित प्रगति ही हुई है जिसके लिये वित्तीय संसाधनों को सबसे बड़ी चुनौती माना गया है. 

वर्ष 2020 में टीबी की रोकथाम, निदान, उपचार और देखभाल के लिये धनराशि साढ़े छह अरब डॉलर तक ही उपलब्ध हो पाई. 

जबकि वर्ष 2018 में विश्व नेताओं ने इस अभियान के लिये 13 अरब डॉलर की धनराशि मुहैया कराने का संकल्प लिया था और यह रक़म उसकी आधी है.   

कोविड-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में आए व्यवधान से टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में और भी कठिनाइयाँ पेश आई हैं.

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अनेक देशों में मानव, वित्तीय, और अन्य संसाधन टीबी से हटाकर कोविड-19 पर जवाबी कार्रवाई में लगाए गए हैं जिससे आँकड़े जुटाने और उनकी जानकारी रखने का काम भी बाधित हुआ है. 

कोविड-19 और टीबी

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के दिशानिर्देशों के अनुसार सदस्य देशों ने आवश्यक टीबी सेवाओं पर कोविड-19 से होने वाले असर को कम करने के लिये उपाय किये हैं. इसके तहत संक्रमण नियन्त्रण उपाय भी मज़बूत किये गए हैं. 

108 देशों में डिजिटल टैक्नॉलॉजी की मदद से दूरस्थ परामर्श और सहायता (Remote advice and support) की उपलब्धता का दायरा बढ़ाया गया है, इनमें से 21 देश ऐसे हैं जो टीबी से सर्वाधिक प्रभावित देशों में हैं. 

साथ ही देश घर-आधारित उपचारों को प्रोत्साहन दे रहे हैं ताकि मरीज़ों को स्वास्थ्य केन्द्रों तक आने की ज़रूरत ना हो.  

यूएन एजेंसी में वैश्विक टीबी कार्यक्रम की निदेशक टेरेज़ा कासेवा ने बताया कि देशों, नागरिक समाजों और अन्य साझीदार संगठनों ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए टीबी व कोविड-19 मरीज़ों के लिये ज़रूरी सेवाओं की निरन्तरता सुनिश्चित की है.

उन्होंने कहा कि ये प्रयास स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत बनाने, सर्वजन के लिये स्वास्थ्य सुनिश्चित करने और ज़िन्दगियाँ बचाने के लिये बेहद अहम हैं.